किसान मज़दूर विरोधी भूमि अध्यादेश की प्रति जलाते करछना के किसान


4 अप्रैल  2015 को जन संघर्ष समन्वय समिति एवं किसान कल्याण संघर्ष समिति करछना  के बैनर तले इलाहबाद जिले के करछना गाँव में भूअधिग्रहण अध्यादेश के विरोध में राज्यस्तरीय सम्मेलन आयोजित किया. ज्ञात रहे कि करछना के किसान पिछले 1688 दिनों से जेपी पॉवर प्लांट के भूमि अधिग्रहण के विरोध में धरना दे रहे है. सम्मेलन में नए भूमि अधिग्रहण की प्रति जलाई गई और करछना के किसान आंदोलन के समर्थन में प्रस्ताव पारित किया गया.

  जेपी करछना पावर प्लांट विरोधी आंदोलन के समर्थन में प्रस्ताव

मौजूदा समय में किसान कल्याण पुनर्वास संघर्ष समिति के नेतृत्व में विगत सात सालों से उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद जिले के कचरी करछना इलाके में जारी जनसंघर्ष भूमि की लूट के खिलाफ लड़ाई का एक ज्वलंत प्रतीक है. उसी कचरी करछना की संग्रामी भूमि पर 04 अप्रेल 2015 को आयोजित भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के विरोध में  राज्य स्तरीय यह सम्मेलन इस संघर्ष की जुझारू जनता को जेपी प्रायोजित सरकारी दमन तथा साम दाम दंड भेद के हथकंडों के बावजूद लड़ाई को जारी रखने के लिए सलाम करता है. अब यह लड़ाई न सिर्फ प्लांट क्षेत्र की है, बल्कि यह जबरिया भूमि अधिग्रहण विरोधी लड़ाई बन गयी है. जेपी प्रोजेक्ट की स्थापना के खिलाफ जारी इस ऐतिहासिक संघर्ष को ये सम्मेलन पूर्ण समर्थन का ऐलान करता है. कचरी करछना इलाके में जारी जेपी प्लांट विरोधी आंदोलन की आवाज़ को लखनऊ और दिल्ली के स्तर पर बुलंद करने का संकल्प ये सम्मेलन लेता है. इस संघर्ष की जीत के लिए देश भर के संघर्षशील साथी अपने संकल्प को दोहराते हैं.

पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप की नीति के तहत प्रदेश की सरकार गैर कानूनी ढंग से कचरी करछना पावर प्लांट के लिए आठ गाँवों की जमीनों का अर्जन कर रही थी। उस पर कानून के तहत अगुवाई कर रहे किसानों से सूबे की सरकार किसानों के संघर्ष व माननीय उच्च न्यायालय में हार गई! देश के अन्दर करचरी का किसान आन्दोलन बाइस अगस्त दो हजार दस से (22/08/2010) तमाम दुश्वारियों के बावजूद अबाद गति से चल रहा है। जिसका क्रमिक अनशन का आज 1688वां दिन है। शासन सत्ता के नुमाइन्दें लोकसेवक (नौकरशाही), एवं कारपोरेट घरानों की तिकड़ी के तमाम दमन, प्रलोभन, झूठे वादे किसानों के चट्टानी नेतृत्व एवं फौलादी एकता के आगे नतमस्तक हो गए। यही नहीं कचरी करछना का किसान संघर्ष आज पुरे प्रदेश में अपने नए तेवरों कुशलता एवं जिम्मेदारियों के लिए नायाब मिशाल के रूप में खडा है। कचरी में संघर्षशील जुझारू किसान गुलाब विश्वकर्मा की इक्कीस जनवरी दो हजार ग्यारह को पुलिस के द्वारा शहादत की गयी थी. इस बलिदान को यह सम्मेलन सलाम करता है.



आज सरकार देशी-विदेशी कंपनियों के लिए दलाल की भूमिका निभाते हुए देश की संप्रभुता को ही समाप्त करने पर तुली हुई है. सरकार की देशी-विदेशी कंपनियों के सामने आत्मसमर्पण की इस परवर्ती का यह राज्य सम्मेलन घोर निंदा करता है.

भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के विरोध में जनसंघर्षों का राज्य सम्मेलन
04 अप्रेल 2015, करछना, इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश
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