कनहर बांध : बर्बर पुलिसिया दमन के विरोध में दिल्ली से उत्तर प्रदेश तक प्रतिरोध


14 अप्रैल 2015 को उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में कनहर बाँध का विरोध करने वाले प्रदर्शनकारी ग्रामीणों पर पुलिस गोली चालन के विरोध में इलाहबाद के मेजा में विस्थापन विरोधी मंच ने कल 15 अप्रैल को रैली निकाल कर प्रशासन को चेतावनी थी है कि दोषी अधिकारीयों पर तुरंत कार्यवाही नहीं की गई तो आंदोलन को तेज  किया जायेगा वही दूसरी और अखिल भरतीय किसान सभा और भूमि अधिकार आंदोलन ने  इस बर्बर पुलिसिया दमन के विरोध में  बयान जारी कर प्रशासन को चेताया है . पेश है भूमि अधिकार आंदोलन का बयान;

आम्बेडकर के जन्म दिन 14 अप्रैल 2015 को देश के संविधान पर हो रहे हमले के खिलाफ ‘संविधान बचाओ’ नारे के साथ कन्हर बाँध परियोजना के विरोध में चल रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने बर्बर लाठी चार्ज किया और गोलियां चलायीं, जिसमे बच्चे, बुजुर्ग, महिलायें और अन्य ग्रामीणों सहित ढेरों लोग घायल हो गए. 

 हजारों लोगों का यह प्रदर्शन विवादास्पद कन्हर बाँध पर गैर कानूनी ढंग से चल रहे निर्माण कार्य के विरोध में आयोजित था.  बिना पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव आंकलन अध्ययन किये और  24 दिसम्बर 2014 को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा पर्यावरणीय संरक्षण के सन्दर्भ में दिए गए निर्णय की अवमानना करते हुए इस नदी पर बांध का निर्माण कराया जा रहा है. वर्तमान उत्तर प्रदेश सरकार इस निर्माण कार्य को आगे बढाने के लिए बहुत तत्पर है. इस परियोजना के लिए  गैर संवैधानिक तरीके से किये जा रहे भूमि अधिग्रहण से ग्रामीणों के लिए बड़े पैमाने पर विस्थापन का खतरा उत्पन्न हो गया है जिसके खिलाफ ग्रामीण लामबंद होकर संघर्ष में उतरे हैं. 14 अप्रैल 2015 को आयोजित यह परियोजना विरोधी प्रदर्शन उस संघर्ष की ही एक कड़ी थी. 

कन्हर सिंचाई परियोजन को राष्ट्रीय जल आयोग द्वारा सोनभद्र जिले के दुद्धी तहसील अंतर्गत सुग्वाना गाँव के निकट वैन गंगा नदी और कन्हर नदी के संगम तट पर सितम्बर 1976 में स्वीकृत किया गया था, जिसमे 3.003 किमी क्षेत्र के फैले हुए 39.90 मीटर अधिकतम ऊँचाई का कच्चा बाँध प्रस्तावित था जो रिहंद जलाशय से जोड़ने की स्थिति में 52.90 मी की ऊँचाई तक बढ़ सकता है. इस परियोजना के लागू होने पर देश के तीन राज्यों उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड के 111 गाँवों के 4131.5 हेक्टयेर जमीनें डूब क्षेत्र में आ जायेंगीं. ग्रामीणों के प्रतिरोध संघर्ष के चलते वर्ष 1989 में परियोजना पूर्णतया स्थगित कर दी गयी थी, जिसे वर्तमान उत्तर प्रदेश की समाजवादी सरकार द्वारा 5 दिसम्बर 2014 से फिर से शुरू कराया गया है. सूचना अधिकार कानून,2005 के तहत प्राप्त की गयी जानकारी बताती है कि परियोजना शुरू कराने के सन्दर्भ में सरकार द्वारा पर्यावरणीय मंजूरी और वन मंजूरी हांसिल नही की गयी है.

कन्हर बाँध के निर्माण का एक मुख्य उद्देश्य यहाँ से रिहंद जलाशय को पानी भेजना है. वर्तमान में उसी रिहंद जलाशय से सिंगरौली स्थित पावर प्लांट में प्रति दिन 25000-30000 मेगा वाट की बिजली का उत्पादन हो रहा है. इस रिहंद जलाशय परियोजना को स्थापित करने के लिए इस इलाके के आदिवासी समुदायों को बड़े पैमाने पर विस्थापित किया गया था, और विस्थापित होने के क्रम में उन समुदायों ने पुलिस उत्पीड़न सहित हर प्रकार के हिंसा व उत्पीड़न का सामना किया था और पर्यावर्णीय बर्बादी झेली थी. उन विस्थापितों में से कुछ परिवारों को तो  बार-बार विस्थापन का दंश भी झेलना पड़ा है.

आज जब देश के कोने-कोने में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ और भूमि अधिकार के लिए संघर्ष तेज हो चला है. उसी संघर्ष के एक हिस्से के तौर पर, सोनभद्र के गाँवों में महिलाओं के नेतृत्व में चल रहा बहादुराना भूमि अधिकार संघर्ष जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे उत्तर प्रदेश के समाजवादी पार्टी सरकार का दोहरा चरित्र भी उजागर हो रहा है. एक तरफ यह सरकार केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा लाये गए भूमि अधिग्रहण अध्यादेश का विरोध कर रही है तो दूसरी तरफ अपने राज्य में भू-अधिकार की मांग के साथ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर लाठी गोली चलवा रही है. देश में सरकारों द्वारा देश की जनता के भूमि-अधिकार का निषेध किया जाना और लोगों के जीवन तथा आजीविका के अधिकारों की अवहेलना करना एक तरफ देश के राजनीतिक  पार्टियों के नैतिक पतन को दर्शाता है तो दूसरी तरफ यह कॉर्पोरेट-बिल्डरों, नौकरशाहों और राजनितिक पार्टियों के बीच मजबूत हो रहे गठजोड़ का भी प्रतीक है. 

भूमि अधिकार आन्दोलन सोनभद्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर हुए बर्बर लाठी चार्ज और चली गोली की तीखी निंदा करते हुए घटना के प्रभावितों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता है तथा लाठी चार्ज व गोली कांड में शामिल अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्यावाही की मांग करता है. आन्दोलन यह भी मांग करता है कि प्रभावितों को तत्काल चिकित्सीय सहायता मुहैय्या कराई जाय व उन्हें समुचित मुआवजा भी दिया जाए एवं घटना की न्यायिक जांच कराई जाए. आन्दोलन देश भर में जनता के आन्दोलनों पर बढ़ रहे राजकीय दमन के प्रति अपनी  चिंता व्यक्त करता है और हर प्रकार के दमन की निंदा करता है.

भूमि अधिकार आन्दोलन कन्हर बाँध परियोजना के विरोध में चल रहे संघर्ष के साथ अपनी एकजुटता जाहिर करता है और बाँध में चल रहे गैर कानूनी निर्माण को तत्काल प्रभाव से रोकने की मांग करता है. आन्दोलन मांग करता है कि स्थानीय गावों के निवासियों की भागीदारी सुनश्चित  करते हुए परियोजना का सामाजिक और पर्यावर्णीय प्रभाव आंकलन कराया जाय तथा परियोजना के सन्दर्भ में ग्रामसभाओं के निर्णयों का सम्मान किया जाए, और आदिवासियों तथा दलितों के लिए भू-अधिकार तथा वनाधिकार की गारंटी की जाए.

द्वारा: जन आन्दादोलनों का राष्ट्रीय समन्वय (एनएपीएम), अखिल भारतीय वन श्रम जीवी मंच, राष्ट्रीय किसान मज़दूर संगठन, एकता परिषद्, युवा क्रान्ति, जन संघर्ष समन्वय समिति, छत्तीसगढ़ बचाओ आन्दोलन, जनपहल, किसान संघर्ष समिति, संयुक्त किसान संघर्ष समिति, इन्साफ, दिल्ली समर्थक समूह, घर बचाओ - घर बनाओ आन्दोलन, नर्मदा बचाओ आंदोलन, अखिल भारतीय किसान सभा (अजय भवन), अखिल भारतीय किसान सभा (केनिंग लेन). किसान मंच

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