ओम्कारेश्वर बांध : जल सत्याग्रह चौथे दिन भी जारी, आप का समर्थन !


गुजरी 11 अप्रैल 2015 से ओंकारेश्वर बाँध में 189 मीटर से ऊपर पानी भरना चालू कर दिया गया है। जिसके विरोध में सैकड़ों विस्थापितों ने तुरंत घोगलगाँव जिला खंडवा में जल सत्याग्रह शुरू कर दिया है। अभी तक 191 मीटर तक जल भर दिया गया है और इससे अनेक किसानों के खेत बिना पुनर्वास के डुबों दिए गए हैं। इस अमानवीय डूब के खिलाफ 11 अप्रैल से जारी यह जल सत्याग्रह घोगलगाँव के विस्थापित रमेश कडवाजी की जमीन पर किया जा रहा है. पेश है नर्मदा बचाओ आंदोलन की विज्ञप्ति;

 क्या कहानी है रमेश कडवाजी की

ओम्कारेश्वर बांध प्रभावित रमेश कडवाजी की कहानी उनके जैसे सैकड़ों अन्य किसानों की है, उनकी 4.5 एकड़ जमीन डूब में आ रही है. सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद शिकायत निवारण प्राधिकरण ने अपने आदेश में कहा कि वह 5 एकड़ जमीन के पात्र हैं. आदेश के अनुसार रमेश ने मुआवजे के मिले 3 लाख रूपये वापस कर दिए. परन्तु उन्हें हरदा जिले की अतिक्रमित व् ख़राब जमीन दिखाई गयी. जो कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार सिचित व् उपजाऊ न होने के कारण उन्होंने इस जमीन को लेने से इंकार कर दिया. आज तक उन्हें अन्य कोई जमीन नहीं दिखाई गयी है और मुआवजा वापस करने के बावजूद उनके खेत में पानी भरा जा रहा है. ऐसे सैकड़ों किसान हैं जिन्होंने जमीन का पैसा वापस कर दिया है परन्तु आज तक सिंचित व् उपजाऊ जमीन नहीं दी गयी है.

आज आम आदमी पार्टी भी आयी समर्थन में
आज आम आदमी पार्टी ने ब्यान जारी कर बताया है कि प्रदेश संयोजक आलोक अग्रवाल विस्थापितों के साथ में पानी में उतर कर जल सत्याग्रह में शामिल हो गए हैं। आम आदमी पार्टी 15-अप्रैल को प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में इसके खिलाफ प्रदर्शन करेगी।

सरकार हुई तानाशाह: गावों की बिजली काटी, लोग पीने के पानी को मोहताज

सरकार ने विस्थापितों के साथ पूरा तानाशाही रवैया अपनाते हुए डूब के गावों घोगलगाँव, कामनखेड़ा, केलवा बुजुर्ग, एखंड आदि गावों में बिजली काट दी है, गाँव में अँधेरा होने के साथ पानी की व्यवस्था पम्प से चलने के कारण पीने के पानी की पूरी व्यवस्था बंद हो गयी है.   

आम आदमी पार्टी “जल सत्याग्रह” के समर्थन में पूरे प्रदेश में आन्दोलन चलायेगी सर्वोच्च

आम आदमी पार्टी घोगलगाँव में प्रारंभ किये गए “जल सत्याग्रह” का पूरी तरह समर्थन करती है. यदि सरकार ने बांध में पानी कम कर विस्थापितों को पुनर्वास नहीं दिया तो पूरे प्रदेश में आन्दोलन चलाया जायेगा. इस सम्बन्ध में 14 अप्रैल को अम्बेडकर जयंती पर सभी जिलों में विरोध प्रदर्शन व् ज्ञापन दिए जायेंगे. 

न्यायलय के आदेश का उल्लंघन : बिना पुनर्वास डूब नहीं

सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद शिकायत निवारण प्राधिकरण ने सभी ओम्कारेश्वर बांध प्रभावित किसानों के लिए आदेश दिया था कि ये किसान जमीन के बदले जमीन और न्यूनतम 5 एकड़ जमीन के पात्र हैं. इन आदेशों के बाद सैकड़ों बांध प्रभावितों ने अपनी जमीन का पूर्व में दिया मुआवजा वापस कर दिया था. यह पैसा प्रभावितों ने भारी ब्याज पर उठाया है. परन्तु इसके बाद भी इन विस्थापितों को बंजर और अतिक्रमित जमीन दिखाकर धोखा दिया गया और आज तक एक भी प्रभावित को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार सिंचित व् उपजाऊ जमीन नहीं दी गयी है. बिना पुनर्वास, प्रभावितों से जमीन का पैसा वापस लेने के बाद, इन जमीनों को डुबाना सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का खुला उल्लंघन है. उल्लेखनीय है कि सैकड़ों प्रभावितों को घर प्लाट एवं पुनर्वास की अन्य सुविधाएँ भी नहीं दी गयी हैं.

 नए भू अर्जन कानून का उल्लंघन
नए भू-अर्जन कानून (भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यस्थापन में उचित और प्रतिकार और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम 2013) की धारा 24 के अनुसार “जहाँ भू-अर्जन हुए 5 वर्ष से अधिक बीत चुके हैं और भौतिक कब्ज़ा नहीं लिया गया है वहाँ भू-अर्जन की करवाई निरस्त मानी जाएगी और यदि सरकार चाहे तो नए कानून के आधार पर नया भू-अर्जन कर सकती है.” चूँकि ओम्कारेश्वर बांध प्रभावितों का भू-अर्जन लगभग 10 वर्ष पूर्व हुआ है और जमीन का भौतिक कब्ज़ा प्रभावितों के पास है अतः नए कानून के अनुसार ओम्कारेश्वर बांध के हजारों प्रभावितों का भू-अर्जन निरस्त हो गया है. इस नए कानून के सम्बन्ध में मध्य प्रदेश शासन के राजस्व विभाग ने 29 जनवरी, 2014 को आदेश भी निकाल दिया है. इस सम्बन्ध में लगभग 1500 ओम्कारेश्वर बांध प्रभावित अपने दावे सरकार के समक्ष प्रस्तुत कर चुके हैं. अतः बिना इन दावों का निराकरण किये इन जमीनों को डुबाना नए भू-अर्जन कानून का स्पष्ट उल्लंघन है.

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