जल सत्याग्रह का 19वां दिन : सरकार-प्रशासन मदमस्त !


जल सत्याग्रह के साथियों को समर्पित अनिल पुष्कर की कवितायें !

मैं उन आवाजों का गुलाम नहीं
जिन्हें रेत पर लिखा गया
और वर्षा-प्रपात ने मिटा दिया
मैं उन आवाजों का मुरीद हूँ
जो पानी पर चढकर बोल रही हैं
पाँव के घाव-घाव चीख-पुकार मचा रहे
घमासान युद्ध के अजेय-राग बजा रहे
हथेलियों पर मेंहदी के दाग सब धुल गए
आक्रोश औ’ बगावत का लहू बह रहा है
वो आवाजें
अब मिटने को कतई राजी नहीं
उन्हें एक फैसले की दरकार है
जो पानी पर इस तरह लिखी जाएँ
कि उसे तमाम तारीखें याद करें
मानो
देह में ये पानी इस कदर घुल गया है
यकीनन
संघर्ष का फलसफा सही अर्थों में मिल गया है.

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मध्य प्रदेश की नर्मदा घाटी में ओम्कारेश्वर बाँध विस्थापितों के जल सत्याग्रह के 19 दिन पुरे हो गए . जल सत्याग्रह कर रहे लोगों के शरीर में गलन शुरू हो गई है, पैरों से खून आ रहा है, मछलिया उनके शरीर पर हमला करने लगी हैं . नर्मदा बचाओ आन्दोलन की विज्ञप्ति; 
 
घोगलगाँव में 28 अप्रैल को 18 वें दिन भी जल सत्याग्रह जोर शोर से जारी रहा. कल नर्मदा मंत्री ने बयान जारी कर स्वीकार किया कि गत 23 अप्रैल को मुख्यामंत्री के निर्देश पर उन्होंने नर्मदा बचाओ आन्दोलन के एक प्रतिनिधि मंडल से मुलाकात की थी. उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि आन्दोलनकारियों के मुख्यमंत्री को मुलाक़ात के लिए पत्र भेजने पर यह बैठक हुई. अतः मुख्य मंत्रीजी का यह कथन गलत है कि आन्दोलनकारियों की ओर बातचीत का कोई प्रयास नहीं हुआ.

आन्दोलन की वरिष्ठ कार्यकर्ता सुश्री चित्तरूपा पालित के नेतृत्व में विस्थापितों का एक प्रतिनिधि मंडल 23 तारीख को नर्मदा मंत्री से मिला था और लम्बी चर्चा के बाद उन्होंने आश्वासन दिया था कि वह उन सभी विषयों पर मुख्यमंत्रीजी से चर्चा कर निर्णय लेंगे, विस्थापित आज भी इन्तजार कर रहे हैं कि श्री आर्य ने मुख्यमंत्रीजी से बात कर क्या निर्णय लिए. आज सर्वोच्च न्यायालय में दायर अर्जी पर न्यायालय ने उसकी तात्कालिकता को अस्वीकार करते हुए अवमानना याचिका की तारीख आगे बढ़ा दी. आज घोगलगाँव में जल सत्याग्रह 18वें दिन भी जोर शोर से जारी रहा.
आज सरकार की ओर से तहसीलदार श्री मुकेश काशिव ने सत्याग्रह स्थल पर आकर पुनः विस्थापितों की मांग लिखी. विस्थापितों ने कहा कि प्रभावितों को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश व् पुनर्वास नीति की कंडिका 5.4 के अनुसार अनुदान देकर यह सुनिश्चित किया जाये कि उन्हें पात्रतानुसार न्यूनतम 5 एकड़ जमीन उपलब्ध हो जाये. यह भी मांग की कि घर प्लाट एवं अन्य पुनर्वास की समस्याओं का समाधान भी तत्काल किया जाये.

गत 7 जून 2013 के पैकेज के भी कुछ आदेशों का आज तक पालन नहीं हुआ है उसका भी तत्काल पालन किया जाये. आज खंडवा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. पनिका, खंड चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी डा. गगन दिलवारे, स्वास्थ्य अधिकारी डा, अजय पाली, डा. सुनील और डा. संजय पटेल ने सत्याग्रह स्थल पर आकर जल सत्याग्रहियों की जाँच की. उन्होंने सत्याग्रहियों से इलाज का आग्रह किया जिसे पुनः सत्याग्रहियों ने यह कहकर ठुकरा दिया कि उनका इलाज उनकी मांगों को स्वीकार करना है.
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