हक मांगने आए थे, क्यों गोली से मारा...

किसानों के हित मे संघर्ष जारी रहेगा : मुलताई किसान घोषणा-पत्र 2015

किसान संघर्ष समिति द्वारा आयोजित 17वां शहीद किसान स्मृति सम्मेलन 12 जनवरी 1998 को शहीद हुए 24 किसान साथियों को भावभीनी श्रद्धांजलि देता है। सम्मेलन शहीदों की कुर्बानी को याद करते हुए किसानों को हक और सम्मान के संघर्ष को अनवरत जारी रखने का संकल्प लेता है।

शहीद किसानों की याद में शहीद स्तंभ के निर्माण के लिए अब तक प्रदेश सरकार द्वारा भूमि आवंटित नहीं किए जाने, 12 जनवरी को पुलिस गोलीचालन में मारे गए किसानों को शहीद का दर्जा नहीं दिए जाने, शहीद परिवारों के एक आश्रित को स्थाई शासकीय नौकरी अब तक उपलब्ध नहीं कराए जाने की निंदा करता है। सम्मेलन की मान्यता है कि पूर्व की कांग्रेस सरकार द्वारा शहीदों के प्रति जो रूख अपनाया गया था, वहीं रूख आज भी कायम है। कांग्रेस सरकार ने अपने ही उप मुख्यमंत्री और प्रदेश के दो राज्यपालों-श्री बलराम जाखड़ और श्री रामनरेश यादव द्वारा गोलीचालन की मुलताई जाकर जांच के बाद तत्कालीन एसपी, कलेक्टर पर हत्या के मुकदमें दर्ज करने की मांग को नजरअंदाज कर दिया था। यही मांग उस समय भाजपा द्वारा दोहराई गई थी, यह मांग करने वाले आज भाजपा सरकार में मंत्री हैं, लेकिन 11 वर्ष बीत जाने के बाद भी आज तक दोषी अधिकारियों के खिलाफ मुकदमें दर्ज नहीं किए गए हैं। सम्मेलन दोषी अधिकारियों पर हत्या के मुकदमें दर्ज करने, किसानों पर लादे गए फर्जी मुकदमें वापस लेने तथा मुलताई तहसील को शहीद किसान स्मारक घोषित करने की मांग करता है। कलकत्ता के शहीद किसानों के परिवारों को हाल ही में 1993 में हुए पुलिस गोलीचालन की जांच को बनाए गए न्यायिक आयोग की सिफारिष के बाद 25 लाख रूपये राज्य सरकार द्वारा दिए गए हैं। वही राशि मुलताई के शहीद परिवारों को भी देने की सम्मेलन राज्य सरकार से मांग करता है। 
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12 जनवरी 2015 को मध्य प्रदेश के मुलताई में 17वें शहीद किसान स्मृति सम्मेलन में शहीद किसानों को देशभर से जुटे किसान संगठनों, जनसंगठनों के नेताओं ने भावभिनी श्रद्वांजलि दी। किसानों ने अपना घोषणा पत्र जारी करते हुए केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में लाए गए नए भू-अध्यादेश के खिलाफ आंदोलन देशभर में चलाने का ऐलान करने के साथ ही गरीब किसान, दलित, आदिवासी, मजदूरों के हक-हकूकों के साथ खिलवाड़ करने वालों को उखाड़ फैंकने का आह्वान किया। मुलताई के किसानों संधर्ष पर आधारित पुस्तिका 'संघर्ष के 17 वर्ष' साप्ताहिक पत्रिका 'जनयोद्वा' का सामूहिक विमोचन सांसद मुन्नवर सलीम की मौजूदगी में हुआ।

ज्ञात रहे कि 2 जनवरी 1998 को लगातार फसले खराब होने के कारण मुआवजा मॉंग रहे किसानों पर आंदोलन को कुचलने के उद्देश्य से पुलिस गोलीचालन प्रायोजित किया गया, जिसमे 24 किसान शहीद हुए, 150 किसानों को गोली लगी। सरकार ने 250 किसानों पर 66 फर्जी मुकदमे दर्ज किए। हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, आगजनी, सरकारी काम मे बाधा सहित तमाम अपराधों को लेकर दर्ज फर्जी मुकदमे 12 जनवरी 1998 से आज तक चल रहे है। किसान संघर्ष समिति द्वारा हर वर्ष 12 जनवरी को शहीद किसान स्मृति सम्मेलन का आयोजन मुलताई में किया जाता है ।

किसान संघर्ष समिति के भागवत परिहार ने सम्मेलन के आय-व्यय का लेखा-जोखा पेश किया। शहीद किसानों के परिजनों का सम्मान किया गया, साथ ही विद्या मेमोरियल ट्रस्ट ग्वालियर की ओर से 24 मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। रक्तदान शिविर भी आयोजित किया गया। इसमें डा. सुनीलम समेत देशभर से आए प्रतिनिधियों, किसान संघर्ष समिति के कार्यकर्ताओं ने रक्तदान किया।

सोमवार को मुलताई के हाईस्कूल ग्राउंड में किसान संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष टंटी चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित सम्मेलन में को संबोधित करते हुए समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद चौधरी मुन्नवर सलीम ने केंद्र सरकार की गरीब-श्किसान विरोधी नीतियों को गिनाते हुए कहा कि मोदी की दो मंुही बांते और दोहरी नीति अब स्पष्ट रूप से सामने आ रही है। नरेंद्र मोदी का मकसद उनके चुनाव में मोटी रकम लगाने वाले कॉरपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाना भर रह गया है। नए शहर बसाने के लिए सात हजार करोड़ देने वाली मोदी सरकार सिंचाई नहरों के निर्माण को सिर्फ एक हजार करोड़ देती है, यह खेती-किसानी करने वाली देश की 70 फीसदी बिरादरी के साथ अन्याय है। मुलताई गोलीकांड के शहीदों को श्रद्वांजलि देते हुए मुन्नवर सलीम ने कहा कि किसानों के खून की एक-एक बुंद इंकलाब लाएगा, संघर्ष और बुनियादी परिवर्तन का आधार बनेगा।
सांसद मुन्नवर सलीम ने कहा कि गरीबों के हित-अहित से उनका कोई सरोकार नहीं। ऐसे में, आने वाली नस्लों की भलाई के लिए संघर्ष करना होगा। उन्होंने कहा कि समाजवादियों ने जनता की समस्याएं हल करने के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया, डा. सुनीलम का मध्यप्रदेश के किसानों के लिए संघर्ष समाजवादी विचार की ही उपज है। किसानों को उनका वाजिब हक दिलाने के लिए इस संघर्ष को आगे बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि जब तक यह व्यवस्था सुनिचित नहीं की जाती है कि कलक्टर और मंत्री के बेटे का इलाज सरकारी अस्पताल हो, तब तक सरकारी अस्पतालों की हालत सुधर नहीं सकती। रक्षा, रेल क्षेत्र में एफडीआई लाकर मोदी सरकार हिंदुस्तान को गिरवी रखने का काम कर रही है। कालाधार, रोजगार देने की गारंटी पर कंेद्र बैकफूट पर है। देश में 43 करोड़ लोगों की आमदनी 32 रूपये है। किसान कराह रहे हैं, उनके सामने रोजी-रोटी का संकट है। असमानता की खाई बढ़ रही है, लेकिन सरकार लूटने और लूट की छूट देने में मस्त है।

किसान संघर्ष समिति के संस्थापक अध्ययक्ष और पूर्व विधायक डा. सुनीलम ने कहा कि शहीदों की प्रेरणा से मैं उर्जा पाते हुए 52 वर्ष की सजा के बावजूद किसान आंदोलन में सक्रिय हूं, किसानों की हालत बद से बदतर हो रही है, इसलिए 1998 से बड़े किसान आंदोलन को खड़ा करने की जरूरत थी, यह काम देश का कोई संगठन, व्यक्ति या पार्टी अकेले नहीं कर सकती, इसलिए किसान संघर्ष समिति, जनआंदोलनों के राष्टीय समव्य, जनसंघर्षों के सम्मेलन तथा समाजवादी समागम के साथ लिकर किसान आंदोलन को एकजुट एवं प्रभावशाली बनाने का संकल्प लिया। डा. सुनीलम ने कहा कि आने वाले समय में भू-अधिग्रहण का संघर्ष ऐतिहासिक संधर्ष के तौर पर तब्दील होगा तथा नरेंद्र मोदी ने किसानों-मजदूरों के लिए जो बुरे दिन लाए हैं, उन्हें अच्छे दिनों में तब्दील करने में कामयाब होगा।

उड़ीसा से आए एनएपीएम के राष्ट्रीय संयोजक प्रफुल सामंत राय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कॉरपोरेट प्रोटक्ट करार देते हुए कहा कि देश की राजनीति इस समय पंूजीपती घरानों के हाथों में है। नए  भू-अध्यादेश से अब किसानों की मर्जी के बगैर उनकी खेती की जमीनें छीनकर 70 प्रतिशत जनता को सड़क पर लाकर खड़ा करने की तैयारी हो चुकी है। उन्होंने खेती-किसानी और प्राकृतिक संसाधन बचाने के लिए एकजुट होने जरूरत बताते हुए नए भू-अध्यादेश की प्रति घर-घर और गांव-गांव में जलाने का आह्वान किया। प्रफूल दा ने फरवरी में भू-अध्यादेश के खिलाफ फरवरी में जनआंदोलन और विस्थापन विरोधी समूहों के साथ आंदोलन चलाने का भी ऐलान किया।

किसान संघर्ष समिति की प्रदेश उपाध्यक्ष एडवोकेट आराधना भार्गव ने छिंदवाड़ा, डा. राधिका वर्मा ने बैतूल, उमेश तिवारी ने सीधी, विंद क्षेत्र, लक्ष्मीचंद दूबे ने संगरौली में जबरन भू-अर्जन और विस्थापन की समस्याओं को रखा।

समारोह को ओड़िसा के लिंगराज, दिल्ली से मंजू मोहन, पुतुल बहन, मधुरेश भाई, राजस्थान के कैलाशा मीणा, सोशलिस्ट पार्टी (लोहिया) के ईश्वर शर्मा, जनता दल यू के राष्ट्रीय महामंत्री अरूण श्रीवास्तव, जबलपुर से जयंत वर्मा, ब्लू डायमंड यूनियन के अध्यक्ष अमरदास उपरारिया, इंदौर से मदन अग्रवाल, सिंगरौली के वेद प्रकाश पांडेय, मंडला से निशा सिंह, अर्थशास्त्री रोशन लाल अग्रवाल, झाबूआ से राजेश बैरागी, छिंदवाड़ा से कंजबिहारी पटेल, कुंज बिहारी शर्मा, महाराष्ट्र छात्रभारती के नेता दत्ता डांगे आदि ने संबोधित किया। 

मुलताई के शहीद किसानो की याद में मशाल जुलुस निकलते किसान

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