पोस्को विरोधी आंदोलन के समर्थन में तथा गैर-कानूनी खदानों की सी बी आई जांच की मांग पर प्रस्ताव

मौजूदा समय में पोस्को प्रतिरोध संग्राम समिति के नेतृत्व में विगत दस सालों से ओडिशा के जगतसिंहपुर जिले में ढिंकिया चारादेस इलाके में जारी जनसंघर्ष कारपोरेट लूट के खिलाफ लड़ाई का एक ज्वलंत प्रतीक है. उसी धिनकिया की संग्रामी भूमि पर 29-30 नवम्बर 2014 तक आयोजित जल, जंगल, जमीन और जीविका के हक़ के लिए लोकतंत्र की रक्षा में जनसंघर्षों का राष्ट्रीय सम्मलेन इस संघर्ष की जुझारू जनता को पोस्को प्रायोजित सरकारी दमन तथा साम दाम दंड भेद के हथकंडों के बावजूद लड़ाई को जारी रखने के लिए सलाम करता है. अब यह लड़ाई न सिर्फ प्लांट क्षेत्र की है, बल्कि पोस्को के लिए सुन्दरगढ़ जिले के खंडाधार पर्वत से लौह अयस्क खुदाई के लिए अनुमति देने के बाद उस क्षेत्र में खंडाधार सुरक्षा समिति के नेतृत्व में स्थानीय आदिवासियों ने आंदोलन का बिगुल बजा दिया है.

 सबसे ज़्यादा विदेशी पूंजी निवेश आकर्षित करने का नारा देकर केंद्र व राज्य सरकारो के द्वारा पोस्को प्रोजेक्ट की स्थापना के खिलाफ जारी इस ऐतिहासिक संघर्ष को ये सम्मलेन पूर्ण समर्थन का ऐलान करता है. ढिंकिया इलाके में जारी पोस्को प्लांट विरोधी संघर्ष एवं खंडाधार पर्वत क्षेत्र में शुरू खदान विरोधी आंदोलन की आवाज़ को भुवनेश्वर और दिल्ली के स्तर पर बुलंद करने का संकल्प ये सम्मलेन लेता है. इस संघर्ष की जीत के लिए देश भर के संघर्षशील साथी अपने संकल्प को दोहराते हैं.

पोस्को प्रोजेक्ट को क्रियान्वित करने के लिए जिस तरह पूर्व सरकार के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर कंपनी दबाव बनाती थी उसी तरह मौजूदा प्रधानमंत्री के कोरिया दौरे के दौरान पोस्को कंपनी द्वारा दबाव बनाया गया. भारत के प्रधानमंत्री के द्वारा यह ऐलान करना कि पोस्को प्रोजेक्ट के लिए सारे अवरोध खत्म किये जाएंगे, हमारी सरकार कैसे विदेशी कंपनियों के लिए झुक रही है यह दर्शाता है. हमारे मुल्क की संप्रभुता को समाप्त करने जैसे इस सरकारी आत्मसमर्पण की यह राष्ट्रीय सम्मलेन घोर निंदा करता है.

विगत दो दशकों से उदारीकरण के नाम पर देश के खनन क्षेत्रों में देशी-विदेशी कंपनियों को इजाज़त देने के बाद देश भर के जनांदोलन इन गलत नीतियों के परिणाम स्वरुप प्राकृतिक संपदाओं की बेलगाम लूट का सवाल उठाते रहे हैं. इस बीच सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त शाह आयोग के द्वारा ओडिशा के अलावा दूसरे राज्यों में जारी खनन की व्यापक जांच के बाद इन्हें गैर-कानूनी पुष्ट किया तथा सी बी आई की जांच की सिफारिश भी की. इसी तरह सेन्ट्रल एमपावर्ड कमिटी (सी ई सी) ने भी गैर-कानूनी खदान का पुष्टिकरण करते हुए ठोस कारवाई करने का सुझाव दिया है. लेकिन चुनाव के समय भ्रष्टाचार के खिलाफ चिल्लाने वाली भाजपा की केंद्र सरकार शाह कमीशन की स्पष्ट सिफारिश के बावजूद सी बी आई जांच को लेकर चुप्पी साधे हुए है. जन संघर्षों का यह राष्ट्रीय सम्मलेन यह मांग करता है कि देश के विभिन्न राज्यों में हुई गैर-कानूनी खदानों की सी बी आई द्वारा जांच की जाए और गुनाहगार कंपनियों तथा इसके लिए जिम्मेवार नेताओं – अफसरों पर कड़ी कारवाई की जाए.

जल, जंगल, जमीन और जीविका के हक़ के लिए लोकतंत्र की रक्षा में जनसंघर्षों का राष्ट्रीय सम्मलेन
29-30 नवम्बर 2014, ढिंकिया, जगतसिंहपुर ओड़िसा
प्रस्तावक: प्रफुल्ल सामन्तरा और अभय साहू
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