मुलताई एस.डी.एम. की तानाशाहीपूर्ण कार्यवाही : किसानों की अवैध गिरफ्तारी के विरोध में प्रदर्शन

मध्य प्रदेश के बैतूल जिले की मुलताई में किसान संघर्ष समिति के कार्यकारी अध्यक्ष पूर्व विधायक डॉ. सुनीलम ने सेमझिरा के ललित मानकर, रमेश मानकर, भगवान सिंह, पिंकी सिसोदिया, श्रीमती ललिता सिसोदिया, श्रीमती उर्मिला सिसोदिया, श्रीमती उमा बाई सिसोदिया, श्रीमती बबिता मानकर की गिरफ्तारी को अवैध एवं अलोकतांत्रिक बताते हुए इसे सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों की अवमानना तथा नए भू अर्जन कानून का सरेआम उलंघन बताते हुए कहा कि लगता है मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार भारत की संसद द्वारा पारित कानून को स्वीकार करने को तैयार नहीं है. डॉ. सुनीलम ने कहा कि पहले सरकार ने किसानो के साथ जोर जबरजस्ती के लिए पुलिस बल उपलब्ध न कराने वाले बैतूल पुलिस अधीक्षक को हटाया फिर भाजपा जिला पंचायत उपाध्यक्ष राजा पवार ने अनुविभागीय अधिकारी के कार्यालय में बैठकर 107, 116 के तहत किसानो को तहसील न्यायालय में बुलाकर बांड भराने की बजाये जेल भेजने की तानाशाही पूर्ण अवैधानिक कार्यवाही की.

डॉ. सुनीलम ने कहा कि मुलताई के इतिहास में कभी भी किसी अधिकारी ने महिलाओ के साथ इस तरह का निरंकुश व्यवहार नहीं किया है. निर्दोष घरेलु महिलाओ को न्यायालय में बुलाकर उन्हें जेल भेजा जाना कायराना एवं आपत्तिजनक कृत्य है.  डॉ. सुनीलम ने कहा कि एस डी एम को लगता है की वे सभी कानूनों के ऊपर है तथा अपनी मनमर्जी के मुताबिक जो चाहे जब चाहे करने को स्वतंत्र है. डॉ. सुनीलम ने कहा कि वे सदा हर स्तर पर प्रशासनिक तानाशाही का विरोध करते रहे है तथा आगे भी तानाशाहीपूर्ण मनमानी कार्यवाहियों का वे विरोध करेंगे.

सरकार की नजर में किसानो का दोष यह था कि वे भारत में नए भू अर्जन कानून के तहत कार्यवाही की मांग कर रहे थे. डॉ. सुनीलम ने कहा कि नए कानून की धारा 24(२) में स्पष्ट उल्लेख है की जिन किसानो का जमीन के ऊपर कब्ज़ा बरकरार है तथा जिन किसानो ने मुआवजा नहीं लिया है उनकी जमीन पर उनका अधिकार क़ानूनी तौर पर कायम रहेगा तथा नए कानून के तहत भू अर्जन की कार्यवाही नए सिरे से की जाएगी जिसमे सामाजिक आर्थिक एवं पर्यावरणीय प्रभावों का मूल्यांकन तथा जन सुनवाई की प्रक्रिया नए सिरे से की जाएगी.
किसान संघर्ष समिति द्वारा मुलताई में किसानो की अवैध गिरफ्तारी का विरोध कर ज्ञापन सौपा जायेगा. किसान संघर्ष समिति इस अवैध गिरफ्तारी के खिलाफ कानूनी कार्यवाही भी करेगी.

Share on Google Plus

संघर्ष संवाद के बारे में

एक दूसरे के संघर्षों से सीखना और संवाद कायम करना आज के दौर में जनांदोलनों को एक सफल मुकाम तक पहुंचाने के लिए जरूरी है। आप अपने या अपने इलाके में चल रहे जनसंघर्षों की रिपोर्ट संघर्ष संवाद से sangharshsamvad@gmail.com पर साझा करें। के आंदोलन के बारे में जानकारियाँ मिलती रहें।