भाटी माईनस विस्थापित मांगेंगे आपना हक़ : 15 दिसम्बर 2014 को जंतर मंतर पर प्रदर्शन

जो ज़मीन सरकारी है वो ज़मीन हमारी है, जल-जंगल और ज़मीन ये हों जनता के अधीन 

पिछले 50 साल से जारी शोषण के विरोध में दिल्ली के भाटी माईनस विस्थापित,  भागीरथ नगर के बाशिंदे, ओड़ घुमन्तु जनजाति की मज़दूर महिलाएं एवं गांव के प्रतिनिधि वरिष्ठ जन, अपने वंचित संवैधानिक अधिकारों को पाने के लिए एकजुट हो रहे हैं। 15 दिसम्बर 2014 को जंतर मंतर पर देश भर से आ रहे मेहनतकश वर्ग के हज़ारों संगठनों के साथ शामिल हो कर अपने संघर्ष को आगे बढ़ाने का संकल्प लेगे। पेश है अखिल भारतीय वन-जन श्रमजीवी यूनियन (AIUFWP)की विज्ञप्ति;

हमारा गांव भागीरथ नगर पिछले 50 साल से भाटी राजस्व गांव की ग्राम सभा भूमि पर बसा हुआ है। हमारे ओड़ समाज के पांच हज़ार परिवारों ने 1965 से लेकर 30 साल तक भाटी माईन्स की विशाल और खतरनाक खदानों में कड़ा परिश्रम किया है। अनगिनत मज़दूर खनन दुर्घनाओं में मारे गए हैं। सन् 1975 में खदानों की मिल्कियत भ्रष्ट सरकारी कम्पनी DSIDC/DSMDC को सौंपी गई थी, लेकिन श्रम कानूनों का उलंघन और श्रमिक अधिकारों का हनन ज़ारी रहा। सरकार की तरफ से भाटी माईन्स लेबर कालोनी के नाम पर हमारे गांव को राशन की दुकान, बिजली, सड़क, प्राथमिक व माध्यमिक स्कूल, अस्पताल आदि सुविधाए मुहैया कराई गईं। सन् 1990 में जब भाटी खानें अचानक बंद कर दी गईं, तब हम लोगों को हमारी किस्मत पर बेसहारा छोड़ दिया गया। न मुवाअज़ा मिला और न वैकिल्पक रोज़गार। हमें रोज़ी-रोटी की तलाश में दूर दूर तक भटकने को मजबूर किया गया। पर हमने अपने आशियाने को नहीं छोड़ा जहां हमारी पहचान सांस्कृतिक धरोहर मौज़ूद है। इतने में 1991 में आम चुनाव के मौके पर दिल्ली के शासक वर्ग ने  DSMDC के भ्रष्टाचारी अफसरों को कानूनी जांच से बचाने के लिए इस पूरे क्षेत्र को सेंचुरी घोषित कर वनविभाग को गैरकानूनी व असंवैधानिक तरीके से सौंप दिया व रातों रात हमें अतिक्रमणकारी बना दिया गया और 1996 में बिना हमारी जानकारी के हमारे गांव को यहां से बेदखल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से आदेश पारित कराया। हमारी पुरानी बसी आबादी को झुग्गी झोपड़ी कहकर अपमान जनक धब्बा दिया और गांव के विकास पर रोक लगा दी। आज सरकारी लेखे जोखे में भागीरथ नगर गांव का वजूद ही नहीं है, इस जगह संजय कालोनी जे0जे का उल्लेख है जिस का दर्जा एम अवैध शहरी स्लम का है। वे हमें यहां से बेदख़ल करने पर तुले हुए हैं।   

इस बार दोबारा चुनाव की घोषणा होने से पहले ही पार्टियां, नेता, माफिया व दलाल सक्रिय हो कर घूमने लगे हैं व हमारे वोट का सौदा करने को तैयार बैठे हैं। इस चुनाव में आइए हम सभी मिल कर यह तय करें कि हम किसी भी पार्टी या दलाल के कहने पर अपना वोट नहीं बेचेंगे व अपने हक़ व मुददों पर जो उम्मीदवार काम करेगा या पार्टी काम करेगी, हम उनको एकजुट हो कर अपना मत देंगे। हमारे बहुत सारे मुददे हैं, जिनके ऊपर हमें ध्यान देना है। सबसे पहला विरोध हमें वनविभाग व सरकार द्वारा दिए गए हमें विस्थापित करने के नोटिस पर देना है व हमें सन् 2006 में संसद में पारित ''वनाधिकार कानून'' के तहत सम्मानजनक बसाए जाने की मांग करनी है। हमारे पंचायत गठन करने या फिर वार्ड पंचायत गठन करने के अधिकार को भी समाप्त कर दिया गया व सेंचुरी भी वनकानून की परिभाषा के अनुरूप गठित नहीं की गई, न ही इसमे वन है और न ही वन्य जन्तु। वन के नाम पर केवल कीकर के पेड़ हैं और वन्य जन्तु के नाम पर केवल बंदर, ये दोनों ही पर्यावरण के दुश्मन हैं। वनविभाग द्वारा करोड़ों का बजट इस सेंचुरी में बंदरों को खाना खिलाने व कीकर जैसे दूषित पेड़ों को बचाने में खर्च किया जा रहा है व उल्टे वनविभाग द्वारा यहां के आदिवासी घुमन्तु जाति के बच्चों व महिलाओं के ऊपर बंदरों का खाना चुराने का आरोप लगा कर उन्हें चोर बनाया जा रहा है। इसलिए आइए हम सब यह संकल्प लें कि हम अपने भागीरथ नगर को एक आर्दश नगर बनाएंगे। इसे शोषण, अन्याय, भुखमरी, गरीबी और जातिगत हिंसा से मुक्त कराएंगे। इस संकल्प को लेने के लिए आप लोग ज्यादा से ज्यादा संख्या में 15 दिसम्बर 2014 को जंतर मंतर पर देश भर से आए मेहनतकश वर्ग के हज़ारों संगठनों के साथ शामिल हो कर अपने संघर्ष को आगे बढ़ाने का काम करें।

हमारी मांगें

पहले एक हाथ से विकास दो और फिर दूसरे हाथ से वोट लो
  1. भागीरथ नगर भाटी माईन्स को सन् 2006 में संसद में पारित वनाधिकार कानून के तहत बसाया जाए। इस कानून के तहत संरक्षित वनक्षेत्र में रहने वाले घुमन्तु जनजातीय समुदाय को वनाधिकार के साथ-साथ इस कानून की धारा 3 की उपधारा 2 के तहत 13 तरह के विकास के अधिकार प्रदान किए गए हैं।
  2. ओड़ घुमन्तु जनजाति समुदाय को पूरे देश में घुमन्तु जनजाति समूह का दर्जा दिया जाए।
  3. वनाधिकार कानून-2006 भाटी माईनस में रहने वाले ओड़ समुदाय के घुमन्तु जनजातीय समुदाय पर पूर्ण रूप से लागू होता है, चूंकि इस समुदाय को सरकार द्वारा ही खदानों में काम करने के लिए बसाया गया था व बाद में 80 के दशक में स्वयं सरकार द्वारा ही इस पूरे क्षेत्र को असोला सेंचुरी घोषित कर दिया गया। जिसमें भागीरथ नगर के तमाम संवैधानिक बुनियादी अधिकारों को समाप्त कर दिया गया व ग्राम सभा से भी बाहर कर दिया गया। देश के संविधान व वनाधिकार कानून के तहत यहां के अधिकारों को बहाल किया जाए।
  4. इस कानून की धारा 2 की उपधारा छः में यह स्पष्ट रूप से अंकित किया गया है कि किसी भी वनक्षेत्र में अगर ग्राम पंचायत व ग्राम सभा नहीं है, तो वह अपनी ग्राम सभा गठित कर सकते हैं तथा इसी कानून की धारा 3 की उपधारा ज में यह अंकित किया गया है कि ऐसे गांव वनग्राम की श्रेणी में आते हैं व इन गांवों को राजस्व ग्राम घोषित कर तमाम विकास के कार्यक्रमों को लागू किया जाए।
  5. भागीरथ नगर के गरीब व वंचित ओड़ घुमन्तु समुदाय को इस कानून की धारा 3 की उपधारा घ में स्पष्ट प्रावधान है कि यायावर समुदायों की मछली और जलाशयों के अन्य उत्पाद, चरागाह के उपयोग या उनके हकदारी ओर पारम्परिक मौसमी संसाधनों तक, जैसे; सभी वनोपज जलौनी लकड़ी, शहद, घास-फूस, तालाबों व मछली मारने पर अधिकार प्रदान किए जाएं।
  6. इसी कानून की धारा 4 की उपधारा 2 के तहत सेंचुरी के अंदर क्रिटिकल वाईल्ड लाइफ हेबिटेट के कार्यक्रम के तहत वन्य जन्तुओं के संरक्षण व वनों के संरक्षण के लिए स्थानीय समुदाय के साथ मिल कर योजना बनाने के प्रावधान हैं, लेकिन उल्टे वनविभाग यहां के समुदाय को अतिक्रमणकारी कह कर चोर बनाने पर अमादा है।
  7. इस कानून की धारा 3 की उपधारा 2 के तहत सभी विकास के अधिकार, संविधान के अनु0 21 में दिए गए ‘‘जीने के अधिकार’’ के मौलिक अधिकार के तहत व पंचायत की संशोधित अधिनियम के तहत इस गांव में जल्द से जल्द बुनियादी स्वास्थ के लिए 25 बेड की सुविधा वाला अस्पताल, प्राथमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालयों, पीने के पानी की समुचित व्यवस्था, सभी सड़कों का निर्माण, आंगनवाड़ी, सामुदायिक केन्द्र, जल एवं विद्युत योजनाएं, महिला पंचायत, बंदर व वन्य जन्तुओं के द्वारा घायल हो जाने की अवस्था में मुफ्त उपचार व मुआवज़ा भागीरथ नगर में ही देने के प्रावधान भी जल्द लागू किए जाएं।
  8. भाटी माईन्स में भ्रष्ट खदान कम्पनियों द्वारा श्रमिकों का वेलफेयर फंड जो कि करोड़ों में है, उसे वापिस किया जाए व यहां के श्रमिकों के विकास पर उसे खर्च किया जाए।
  9. DSIDC/DSMDC द्वारा अभी तक श्रमिकों को कम्पनी द्वारा लेखा-जोखा नहीं दिया गया व यह कम्पनी भगोड़ी है, जिसके द्वारा श्रमिकों की बकाया मज़दूरी का अभी तक भुगतान नहीं किया गया, इसे जल्द दिलवाया जाए।
  10. प्राकृतिक सम्पदाओं के ऊपर वनविभाग एवं सरकारी नियंत्रण के बदले सामुदायिक मालिकाना हक़ एवं स्वशासन कायम किया जाए व वनविभाग को वनों एवं वनभूमि से बेदख़ल किया जाए।
  11. महिला श्रमिकों के लिए खास तौर पर महिला श्रम योजनाए चालू की जाए, महिला हिंसा से निपटने के लिए व्यापक स्थानीय स्तर पर ठोस कदम उठाए जाए, भाटी माईन्स में महिला थाना को स्थापित किया जाए।
  12. ज़मीन एवं प्राकृतिक सम्पदाओं पर महिलाओं का अधिकार। असोला सेंचुरी के अंदर पैदा हो रही तमाम लघुवनोपज पर वनाधिकार कानून 2006 की संशोधित नियमावली 2012 के अनुसार सहकारी समितियों का गठन कर लघुवनोपज का मालिकाना हक़ समुदाय को सौंपा जाए।
  13. उद्योगों में ठेका-मज़दूरी प्रथा को समाप्त किया जाए और नियमित किया जाए । समस्त श्रमजीवियों के लिये सामाजिक सुरक्षा योजना पूर्णतया लागू की जाए, सम्मान पूर्वक वृद्धा पेंशन योजना, महिलाओं के लिए मातृत्व लाभ व अन्य योजनाओं को लागू किया जाए। सभी श्रमिकों के लिए सम्मान से जीने लायक वेतन सुनिश्चित किया जाए।
  14. इस गांव में ओड समुदाय व वंचित तबकों के ऊपर ज़ारी जातिगत हिंसा को समाप्त किया जाए।
  15. महिला श्रमिकों के लिए सम्मानजनक रोजगार का सृजन किया जाए।
  16. भागीरथ नगर में प्राथमिक एवं उच्च माध्यमिक स्कूलों में अध्यापकों की रिक्त स्थानों की पूर्ति की जाए, स्कूलों में सफाई रखी जाए, प्राथमिक स्कूल में बच्चों के लिए शौचालय बनाए जाए व पानी की व्यवस्था की जाए, वनविभाग द्वारा उच्च माध्यमिक स्कूल के निर्माण पर जो रोक लगाई गई है उसे चालू किया जाए व 12वीं से लेकर उच्च शिक्षा मुफ्त उपलब्ध करना, जिसमें फीस के साथ किताबें व अन्य व्यवस्थाएं भी शामिल हों।
  17. जंगली जानवरों व बंदरों द्वारा स्थानीय ग्रामीणों पर आक्रमण पर रोक लगाई जाए व बंदरों के उत्पात पर नियंत्रण किया जाए। बंदरों के घायल करने, हमला करने पर प्राथमिक उपचार वनविभाग द्वारा मुहैया कराया जाए व घायल को वनविभाग व सरकार द्वारा मुआवजा दिया जाए।
  18. संगठित क्षेत्र के लिए सातवें वेतन आयोग की तरह श्रमिक वर्ग के लिए अलग वेतन आयोग का गठन किया जाए।
  19. सभी खदानों का राष्ट्रीयकरण किया जाए व इन संसाधनों को लोकतांत्रिक मूल्य पर आधारित जांच के  दायरे में रखा जाए। कारपोरेट घरानों के प्राकृतिक संसाधनों के एकाधिकार को समाप्त किया जाए ।
भागीरथ नगर महिला संगठन
अखिल भारतीय वन-जन श्रमजीवी यूनियन (AIUFWP)
न्यू ट्रेड यूनियन इनिशिएटिव (NTUI)

सम्पर्क : 8377922402, 9711684176,9811360937
भागीरथ नगर, संजय कालोनी, भाटी माईनस, नई दिल्ली
बी-137, दयानंद कालोनी, लाजपत नगर फेस -4, नई दिल्ली 110024
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