छिंदवाडा में पेंच व अडानी पावर परियोजना के विस्थापितों ने की मालिकाना हक की घोषणा !

भू-अर्जन के नए कानून (2013) के तहत व्यपगत हो गई वर्षो पहले की भूअधिग्रहण प्रक्रिया!

30 सितंबर 2014 को मध्य प्रदेश के छिंदवाडा में किसान संघर्ष समिति-जनआंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय के बैनर तले किसानों ने चेतावनी धरने का आयोजन किया। पेंच व्यपवर्तन परियोजना में की गई भू अर्जन की कार्यवाही को निरस्त करने, अडानी द्वारा छोटे झाड के जंगल पर किए गए अतिक्रमण हो हटाने, सार्वजनिक रास्ते और कुओं आदि की जनता को सुपूर्दगी किए जाने एवं अडानी के साथ माचागोरा बांध के पानी को बेचने के संमझौते को रद्द किए जाने की मांग को लेकर चेतावनी धरने का आयोजन किया गया है। धरने में उपस्थित किसानों को जनआंदोलन के राष्ट्रीय समन्वय की राष्ट्रीय संयोजक सुश्री मेधा पाटकर तथा किसान संघर्ष समिति के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. सुनीलम ने भी संबोधित किया।

इस मोके पर किसान संघर्ष समिति-जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय द्वारा छिंदवाडा में पेंच व्यपवर्तन परियोजना तथा अदानी पेंच पावर प्रोजेक्ट के प्रभावित सेकड़ो किसानो द्वारा १ जनवरी २०१४ से लागू भू अर्जन-पुर्नवास और पुर्नस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम २०१३ की धारा 24 (2) के तहत वर्षो पहले भू अधिग्रहीत की गई उनकी संपत्ति पर फिर से मालिकाना हक प्राप्त होने की तथा भूअर्जन प्रक्रिया निरस्त/व्यपगत हो जाने की घोषणा की।

नए अधिनियम की धारा 24 में उल्लेख किया गया है कि 5 साल से अधिक समय से अवार्ड पारित हो चुके है, किंतु किसान जमीन व मकान के कब्जे में है, तो पुरानी भू-अर्जन कार्यवाही निरस्त मानी जायेगी, जहां अवार्ड पारित ही नहीं हुआ है, वहां पर नये भू-अर्जन के प्रावधान लागू होंगे, इस प्रकार किसान अपनी जमीन के मालिक हो चुके है। इस प्रावधान को लागू कराने के लिए किसान नीचें दिए गए प्रारूप में अपने क्षेत्र के जिलाधीशों के माध्यम से सरकार को सूचित कर सकते है।

इस आवेदन पत्र के साथ जिस मकान के मालिक किसान है, तथा खेत जो किसान के कब्जे में है, की फोटो निकलवाकर मकान के बिजली के बिल, संपति कर की रसीद, भूमि में खेती करने के दस्तावेज साथ में सलग्न करें।

प्रति,
जिलाधीश
जिला ......., राज्य......

आवेदकः नाम.........................................पिता का नाम............................................................ उम्र..........................व्यवसाय.............................स्थान.................. तहसील..................... जिला .......... राज्य.............।

विषयः भूमि अर्जन, पुर्नवासन और पुनर्व्यव्स्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्षिता का अधिकार अधिनियम 2013 की धारा 24(2) के परिपालन में कार्यवाही किए जाने के संबंध में।

उपरोक्त विषय में निवेदन है कि मै..............ग्राम............तहसील.....................जिला...................राज्य..........का निवासी हू। मेरा मकान/कृषि भूमि .........................................मे स्थित है। यह संपत्ति ................... परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई थी, दिनाक............ से आज तक मेरे मकान/कृषि भूमि का भौतिक कब्जा मेरे पास है। आज दिनॉक को मै अपने मकान में अपने परिवार के साथ निवास कर रहा हॅु तथा उक्त कृषि भूमि पर मेरा कब्जा हैं। मैने उक्त भूमि पर खरीब की फसल लगा रखी है। आज दिनॉक तक जल संसाधन विभाग द्वारा मेरी अर्जित संपत्ति का कब्जा/संयुक्त परिवार की संपत्ति का कब्जा नही लिया गया है। आज भी मेरे द्वारा उक्त भूमि पर खेती की जा रही है। इस लिए उपरोक्त संपत्ति का भू-अर्जन निरस्त हो चुका है। उस पर मेरा मालिकाना हक स्थापित हुआ है।

देश के संसद द्वारा पारित कानून भूमि अर्जन, पुर्नवासन और पुनर्व्यव्स्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्षिता का अधिकार अधिनियम 2013 की धारा 24(2) मे प्रावधान है कि उस संपत्ति पर मूल मालिक का कब्जा बरकरार है, उस संपत्ति की पूर्व की भू-अर्जन प्रक्रिया व्यपगत/निरस्त मानी जाएगी, तथा यह भी माना जाएगा की 1.1.2014 से मूल मालिक फिर से उस संपत्ति का भूमि स्वामी हो गया है।

मै उपरोक्त संपत्ति के कब्जे मे हूँ, और मूल मालिक हूँ। ऐसी उपरोक्त संपत्ति जिसका मै मालिक हूँ, न तो डुबोयी जा सकती है, न तो बर्बाद की जा सकती है, न ही उसपर किसी प्रकार का अतिक्रमण किया जा सकता है। भारत के संविधान नें मुझे यह अधिकार दिया है कि सरकार मेरी एवं मेरी संपत्ति की सुरक्षा करें। राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व जिलाधीश द्वारा किया जाता है। इस कारण जिलाधीश महोदय की यह जिम्मेदारी है कि वे मेरी संपत्ति की सुरक्षा करें। मुझे मेरे अधिकार से वंचित करना अपराध होगा, इसकी सूचना जाने।

मेरा आपसे अनुरोध है कि उपरोक्त कानूनी प्रावधानों के परिपालन में पूर्व मे अर्जित मेरी भूमि/मकान मेरे नाम पर दर्ज कर मुझे पावती (ऋण पुस्तिका) प्रदान करने का कष्ट करें।

स्थान ....................... आवेदन कर्ता का नाम हस्ताक्षर
दिनॉक .....................
सुश्री मेधा पाटकर जी, डा. सुनीलम् तथा एड. आराधना भार्गव की उपस्थिति में पेंच परियोजना के प्रभावित 31 गांव के जिन आदिवासी और अन्य किसानो की बहुफसलीय जमीन 1986 से 2004 तक बहुत कम मुआवजा लेकर जबरन भू अधिग्रहित की गई थी, उन्होने अपने व्यक्तिगत आवेदन पत्र बडी तादाद में एकत्रित होकर धरना स्थल पर आए, जिलाधीश के प्रतिनिध अनुविभागीय अधिकारी के सुपूर्द किए।

अडानी पेंच पावर प्रोजेक्ट के लिए भी 1988 में जिन 5 गांवो की जमीने जबरन अधिग्रहित करके म.प्र शासन ने मुआवजे (10,000 रू./एकड) से कई गुना अधिक दाम (13,00,000 रू./एकड) लेकर कंपनी के अडानी कंपनी को बेची थी। इन किसानों ने उस जमीन को कंपनी से फैंसिग किए जाने के बावजूद चारागाह तथा वनउपज के लिए उस जमीन पर अपना भौतिक कब्जा कायम रखा। आज उन्होने भी अपने व्यक्तिगत आवेदनो के द्वारा अपना अधिकार घोषित किया।

उपरोक्त दोनो परियोजना के प्रभावितो ने अपने व्यक्तिगत आवेदनों के द्वारा यह मांग की है कि 01.01.2014 से उनका मालिकाना हक प्राप्त होते हुए, म.प्र. प्रशासन का यह कर्तव्य बनता है कि वह इनके नाम से ऋण पुस्तिका जारी करें। इस कार्यक्रम के द्वारा म.प्र. के कोने कोने मे फैले हुए हर परियोजना के विस्थापितों को इस कानून के तहत अपना अधिकार प्राप्त करने की प्रक्रिया प्रारंभ करने का मौका देकर ऐलान किया गया है।

नर्मदा घाटी में 24 अगस्त २०१४ को बडवानी जिला स्तर पर, सरदार सरोवर के प्रभावित हजारों किसान, मजदूर, मछुवारा भाई बहनों ने एकत्रित होकर अपना हक पाने की घोषणा देश के 150 समर्थकों की उपस्थिति में की थी। छिंदवाडा से व्यक्तिगत आवेदनो की प्रक्रिया भी म.प्र. में आज से चालू हो गई है। आने वाले दिनो मे बडवानी एवं धार के सरदार सरोवर के विस्थापित तथा बैतूल, सीधी, कटनी, सतना, रीवा आदि जिलो में यह प्रक्रिया आगे बढ रही है।

चेतावनी धरने को संबोधित करते हुए सुश्री मेधा पाटकर जी ने कहा कि जनआंदोलनो का राष्ट्रीय समन्वय यह ऐलान करता है कि जिस कानून के लिए देश भर में विविध संघर्ष होकर ब्रिटिश परंपरा की भू-अर्जन प्रक्रिया एवं कानून खत्म होकर नई न्याय पूर्ण विकास प्रक्रिया हो यह आग्रह रखा गया, जिसके चलते सर्वदलिय संसद के दोनो सदनों में एवं राष्ट्रपति ने यह नया कानून 2013 मंजूर किया उसे उपयोग में लाकर सभी विस्थापित/प्रभावित अपना अधिकार ले ले। सभी राजनीतिक दलों को यह चुनौती है कि आजादी के बाद किसानो के पक्ष में लाए गए इस कानून के किसी भी प्रावधान को वे न बदले तथा यह जाहिर करे की वे किसानों के, खेती, खेतीहर एवं अन्य सुरक्षा के, ग्राम सभा के अधिकारों के पक्ष मे है या नही।

किसानो को संबोधित करते हुए पूर्व विधायक डॉ. सुनीलम् ने कहा कि छिंदवाडा में किसान विरोधी ताकतों ने पहले आंदोलन को कुचलने के लिए किसानो पर फर्जी मुकदमें लगाए एवं हमला कराया, मुझे सजा कराई, हमारे साथियो को जिला बदर कराया लेकिन किसान अपना हक पाने के लिए किसान संघर्ष समिति के नेतृत्व में संघर्ष कर रहा है। डॉ. सुनीलम् ने कहा कि सरकारे बदली, विधायक बदले, लेकिन किसानों का संघर्ष सतत रूप से जारी था, है और रहेगा। उन्होने कहा कि जमीन हडपने वाली ताकतों को मुहतोड जवाब देने के लिए किसानों ने कमर कस ली है। किसस की प्रदेश उपाध्यक्ष एड. आराधना भार्गव ने कहा कि छिंदवाडा के किसानो के लिए मेधा पाटकर जी को पुलिस दमन सहना पडा, जेल जाना पडा, उन्होने कहा कि 7 सालो से हम डटे हुए है। हम कोई न तो खरीद सकता है, न ही हमे कोई डरा सकता है। उन्होने कहा कि कानून हमारे पक्ष में है, लेकिन सरकार की नियत में खोट है। उन्हेाने कहा कि एकजुट होकर हम लडेगे और जितेंगे। उपस्थित किसानों को किसान संघर्ष समिति के संयोजक मण्डल के कुंजबिहारी शर्मा, कुंजबिहारी पटेल, बलराम पटेल, सुरेश वर्मा ने संबोधित करते हुए कहा कि पार्टियों ने सदा किसान आंदोलन को तोडने की कोशिश की है।

पार्टियों ने हमसें चार गुना मुआवजा दिलाने का लालच देकर हमसे वोट ले लिया। लेकिन अब पार्टियों के नेता किसानों को मुह दिखाने के लिए तैयार नही है। संयोजक मंडल के नेताओं ने कहा कि हम न तो जमीन देंगे, और न हि पिछे हटेंगे। उपस्थित किसानों ने बार बार अपनी मालिकी की घोषणा को लेकर नारे लगाए। चेतानवी धरना में मुलताई के सेमझिरा ग्राम के देहगुड बांध प्रभावित किसानों ने किसस के बैतूल जिला अध्यक्ष जगदीश दोडके, उपाध्यक्ष संतोषराव बारस्कर, प्रेमचंद मालवी, महिला अध्यक्ष सुमन बाई कसारे, युवा साथी कुलदीप पहाडें ने छिंदवाडा के किसानों के समर्थन में अपने विचार रखे।

झिंगा वर्मा, राजकुमार वर्मा, कमल सिंह पटेल, राधेश्याम वर्ता,मेखलाल पटेल, बलराम पटेल, रोकेश वर्मा, रामाचंद्रवंशी, अंजे चंद्रवंशी, गणेश यादव, विनोद वर्मा, रामभरोस साहु, कुष्णकुमार वर्मा, रूपेश यदुवंशी, दीपक माथे, नारायण वर्मा, जंतराम वर्मा, नवीन चंद्रवंशी, बंटी साहु, सुंदरलाल चंद्रवंशी, नत्थूलाल मालवी, जयराम उइके, ज्ञानलाल यादव, देवी पंचेश्वर, डा. रहमान, सुखलाल चंद्रवंशी, दिनेश चंद्रवंशी, रवि वर्मा, टिक्कु,केवलसिंह पटेल, रामगोपाल, दरेश, निहाली पटेल, अमर पटेल, नरेश पटेल, भरोस पटेल, श्यामलाल वर्मा,कांशीराम वर्मा, सखाराम वर्मा, दादू पटेल, बेजन उसरेठे, बगस वर्मा, रेखन गिर, सीताराम वर्मा, हीरा गिर, राजेन्द्र वर्मा ने भी किसानो को संबोधित किया।









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