नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने महान कोल लिमिटेड की पर्यावरण मंजूरी को रद्द किया !

ग्रीनपीस और महान संघर्ष समिति ने मनाया उत्सव, महान को फिर से आवंटति न करने के लिये चेताया

सिंगरौली। 26 सितंबर 2014।  नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने आज कहा कि एस्सार व हिंडाल्कों के संयुक्त उपक्रम को मिली पर्यावरण मंजूरी सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद अवैध हो गया है, जिसमें उच्चतम न्यायालय ने 214 कोल ब्लॉक के आवंटन को रद्द कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट  के 214 कोल खदान को रद्द करने के फैसले के बाद एन जी टी के फैसले से महान कोयला खदान के अगल-बगल में रहने वाले लोगों में खुशी का माहौल है। वहां के हजारों ग्रामीण लोगों ने जुलूस निकालकर इस फैसले का स्वागत किया और इस संकल्प को दोहराया कि अब फिर से किसी भी परिस्थिति में कोल खदान को आबंटित नहीं देने दिया जाएगा।
एन जी टी का फैसला महान संघर्ष समिति (एमएसएस) द्वारा दायर किए गए याचिका के बाद आया है जिसमें एम एस एस ने महान में कंपनी को मिले वन मंजूरी को चुनौती दी थी। इस परियोजना से करीब 5 लांख पेड़ कटते और 50 हजार ग्रामीणों की जीविका प्रभावित होती।

सुप्रीम कोर्ट के बाद एनजीटी के फैसले से ग्रामीणों में उत्साह का माहौल है। महान संघर्ष समिति ने अमिलिया में एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित करके अपनी खुशी जाहिर की। आज सुबह से महान वन क्षेत्र में जश्न और मेले का माहौल रहा। महिलाओं, पुरुषों और बच्चों ने लोकगीत और लोकनृत्य करके अपनी खुशी को जाहिर किया। साथ ही, ग्रामीणों ने गांव में जुलूस निकाला और अपने देवता डीह बाबा की पुजा भी की।

एमएसएस  के कृपानाथ यादव  ने कहा, " एस्सार और हिंडालकों के प्रस्तावित कोल खदानों के खिलाफ लड़ते हुए हमने लगातार धमकियों, गैरकानूनी गिरफ्तारी और छापेमारी का सामना किया है । हम जानते हैं कि यह अस्थायी जीत है, लेकिन हमारी लड़ाई आगे भी जारी रहेगी क्योंकि हम आगे किसी भी परिस्थिति में फिर से कोल खदानों को आबंटित नहीं होने देगें और जंगल का विनाश होने से बचाएगें । "

महान संघर्ष समिति की सदस्य और ग्रीनपीस की सीनियर कैंपेनर प्रिया पिल्लई ने कहा, “जंगलों को खत्म करने वाली खनन परियोजनाओं के खिलाफ ग्रामीणों के बढ़ते विरोध का महान एक अच्छा उदाहरण है। कंपनी दुःसाहसी होगी जो वन क्षेत्र में पड़ने वाले कोल ब्लॉक में निलामी करके निवेश करेगी, जहां पहले से ही खनन का इतना तीव्र विरोध है। कोर्ट के फैसले से ग्रीनपीस के कामों को भी प्रमाणिकता मिली है, जिसपर महान में खनन कार्य के खिलाफ आवाज उठाने पर आईबी रिपोर्ट तक लाया गया था। कोर्ट ने दिखा दिया कि हमलोग सही थे”।

सरकार ने कहा है कि वो निरस्त कोल ब्लॉक की निलामी के लिये जल्दी से नीति बनायेगी। महान संघर्ष समिति और ग्रीनपीस ने मांग की कि सरकार को कोयला खदान के निलामी से पहले नयी कसौटी बनानी चाहिये जिससे महान जैसे घने जंगल क्षेत्र को बचाया जा सके।

इस क्षेत्र में वन अधिकार कानून लागू करने का बुरा हाल है।  हालात का अंदाजा सिर्फ इस बात से लगाया जा सकता है कि महान जंगल पर 54 गांव के लोग निर्भर हैं लेकिन सिर्फ अमिलिया गांव के ग्रामसभा से ही इसे पारित करवाया गया। उस ग्राम सभा में पारित प्रस्ताव को भी फर्जी तरीके से पास कराया गया था, जिसमें कम से कम 9 मरे हुए लोगों के हस्ताक्षर थे।

वनाधिकार कानून के तहत किसी भी परियोजना से पहले सामुदायिक वनाधिकार के दावे की पूर्ती करनी है। प्रिया ने कहा,  “महान वन क्षेत्र के पांच गावों के लोगों ने सामुदायिक वनाधिकार के दावे प्रस्तुत किये हैं लेकिन अभी तक उसे माना नहीं गया है। । स्थानीय प्रशासन उन लोगों को वन अधिकार दिलाने में पूरी तरह असफल रहा है ।"

महान संघर्ष समिति और ग्रीनपीस महान जंगल में कोल खदान को आबंटित करने के साथ-साथ वन अधिकार कानून में किसी भी परिवर्तन का विरोध करेगी ।












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