सरदार सरोवर बांध : ऊंचाई बढ़ाने पर न्यायालय द्वारा नोटिस जारी

इंदौर, (सप्रेस)। नर्मदा बचाओ आंदोलन द्वारा जारी विज्ञप्ति में बताया गया है कि मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा 2008 में गठित न्यायमूर्ति श्रवण शंकर झा जांच आयोग द्वारा विगत 5 सालों से सरदार सरोवर विस्थापितों के पुनर्वास की प्रक्रिया में करीब 1,000 हजार करोड़ रु. के भ्रष्टाचार की जांच गंभीरता से जारी है। डूब क्षेत्र में निवासरत हजारों परिवारों के जीने का हक इस जांच से जुड़ा हुआ है। इसके बावजूद केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण द्वारा 12 जून, 2014 को बांध की ऊंचाई 17 मीटर आगे बढाने का गैरकानूनी निर्णय लिया गया। इसके खिलाफ नर्मदा बचाओ आंदोलन की ओर से मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर मुख्यपीठ में याचिका दाखिल की गई। न्यायालय ने इस याचिका को विचारार्थ स्वीकार किया और मुख्य सचिव, म.प्र. शासन, उपाध्यक्ष, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण और अध्यक्ष, नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण को नोटिस जारी किया।

उल्लेखनीय है कि विस्थापितों के पुनर्वास व जमीन खरीदी में करीब 2,500 फर्जी रजिस्ट्रियां हुई हैं  और इसमें करोडों रु. का घोटाला हुआ है। आयोग ने अपनी जांच प्रक्रिया में हजारों विस्थापितों और विक्रेताओं के बयान लिये हैं। 88 पुनर्वास स्थलों के निर्माण कायों में घोर अनियमितताओं पर आयोग द्वारा प्राधिकृत मेनिट, भोपाल ने तकनीकी जांच करके रिर्पोट पेश की है। जिस पर बहस जारी है। अनेक अनियमितताओं और जांच के चलते बांध की ऊंचाई बढ़ाने पर निर्णय लेना न केवल उच्च न्यायालय और सर्वोच्च अदालत के आदेशों को तीव्र उल्लंघन है बल्कि यह भ्रष्टाचारी दलालों और अधिकारियों को बचाने की साजिश भी है।

न्यायालय ने आदेश दिया कि 18 जुलाई तक आंदोलन की याचिका पर सभी पक्ष जवाब दें। अगली सुनवाई 25 जुलाई को रखी गई है। आंदोलन की ओर से सुश्री मेधा पाटकर ने पैरवी की।
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