ये प्यास है बड़ी : न्याय को निगलने की कोशिश में कोका कोला


उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के मेंहदीगंज स्थित कोला कोका प्लांट को भूजल व् प्रदुषण के लिए जिम्मेदार मानते हुए प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड उ ० प्र ० ने गत 6 जून 2014 को बंद कर था. इस आदेश के खिलाफ कोका कोला ने राष्ट्रीय ग्रीन ट्राइब्यूनल अपील की थी. 
कोका कोला प्लांट मेहदीगंज बंद होने के उपलक्ष्य में विजय जुलुस
20 जून, 2014 को कोका कोला के खिलाफ लंका से अस्सी घाट तक लोक समिति और साझा संस्कृति मंच के तत्वाधान में विजय संकल्प जुलूस ढ़ोल नगाड़ो के साथ निकाली गयी जिसमें मेहदीगंज के सैकड़ो महिला पुरुषों ने कोका कोला को पूर्ण रूप से बंद करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में IIT BHU के छात्र भी बड़ी तादात में शामिल हुए। साथ ही साझा संस्कृति मंच के साथी भी शामिल हुए।
जिस पर 20 जून, 2014 को ग्रीन ट्राइब्यूनल ने सुनवाई करते हुए  अंतरिम आदेश तक कोका कोला को पूर्व क्षमता के अनुसार उत्पादन की अनुमति दे दी है। अगली सुनवाई 3 अगस्त 2014 को होनी है.

उक्त कंपनी को बंद करने की मांग को लेकर विगत एक दशक से मेंहदीगंज व आसपास के स्थानीय ग्रामीण आन्दोलनरत थे, जिनके प्रयास से कोकाकोला कंपनी बंद हुई। उ.प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा बिना अनुमति के अपनी क्षमता विस्तार कर लेने व भूगर्भ जल दोहन की बढ़ी मात्रा के बावजूद कचरे की मात्रा में वृद्धि न दिखाने के आरोप में कोका कोला संयंत्र के संचालन की अनुमति रद्द करने के फैसले को लेकर कोका कोला राष्ट्रीय ग्रीन ट्राइब्यूनल गई थी। ग्रीन ट्राइब्यूनल ने पहले यह भूमिका ली कि अतिरिक्त जल दोहन के लिए केन्द्रीय भूगर्भ जल प्राधिकरण की अनुमति आवश्यक है। केन्द्रीय भूगर्भ जल प्राधिकरण ने इस संदर्भ अभी कोई फैसला नहीं लिया है। इस आधार पर कि कोका कोला को व्यवसायिक नुकसान होगा फिलहाल ग्रीन ट्राइब्यूनल ने कोका कोला को पूर्व क्षमता के अनुसार उत्पादन की अनुमति दे दी है।
यह अनुमति देना गलत है क्योंकि मेंहदीगंज पहले भूगर्भ जल स्तर की दृष्टि से 'क्रिटिकल' इलाका नहीं था। इसीलिए शुरुआत में केन्द्रीय भूगर्भ जल प्राधिकरण की अनुमति आवश्यक नहीं थी और कोका कोला सिर्फ उ.प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनुमति प्राप्त कर अपना व्यवसाय की रही थी। किंतु भूगर्भ जल स्तर के चिंताजनक रूप से नीचे चले जाने के कारण अब इस अनुमति पर पुर्नविचार होना चाहिए।

कोका कोला एक प्रभावशाली कम्पनी है और पूर्व में इसने उ.प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, स्थानीय प्रशासन और यहां तक कि मीडिया को भी प्रभावित करने की कोषिष की है। इसलिए इसमें कोई आष्चर्य की बात नहीं होगी यदि वह राष्ट्रीय ग्रीन ट्राइब्यूनल को भी प्रभावित करने की कोषिष करती है।

किंतु मेंहदीगंज इलाके के ग्रामीण जिनका पानी खतरे में है और अन्य संवेदनशील नागरिक जिसमें  भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान व काशी हिन्दू विष्वविद्यालय के छात्र शामिल हैं संकल्प लेते हैं कि मेंहदीगंज के कोका कोला संयंत्र को हम प्लाचीमाडा, केरल और बलिया के संयंत्रों की भांति पुनः खुलने नहीं देंगे।

नंदलाल मास्टर, 9415300520, चंचल मुखर्जी, फादर आनंद, उर्मिला पटेल, कृपा शंकर पाण्डेय, मुकेष कुमार, जगरूपनी देवी, सुरेष, महेंद्र, रमेष, विनोद, धनंजय त्रिपाठी, चिंतामणि, प्रेमनाथ सोनकर, विषाल खण्डेलवाल, 7753069797, मोनीष बब्बर, 8953988126, नीतीष राय, संजय जायसवाल, नंदन, रमेष निषाद, संदीप पाण्डेय




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