दमन और शोषण के खिलाफ़ मारुति मज़दूरों की पद यात्रा

हरियाणा सरकार, पूंजीपतियों की गुलामी छोड़ो!
मेहनतकशों के हक़ पर हमला बंद करो!!

15 से 31 जनवरी 2014 तक मारुति मज़दूर और उनके परिजनों द्वारा दमन और शोषण के खिलाफ़ कैथल से दिल्ली तक पदयात्रा की जा रही है. यह पदयात्रा कैथल मिनीसचिवालय से शुरू होकर जींद, रोहतक, झज्जर, गुडगाँव होते  हुए दिल्ली पहुंचेगी. 31 जनवरी 2014 को दोपहर 2 बजे दिल्ली जंतर मंतर पर राष्ट्रपति को ज्ञापन दिया जायेगा.  पिछले 18 महीने से 148 मारुति मजदूर जेल में बंद है. मारुति मज़दूरों और उनके परिजनों पर हो रहे दमन और शोषण के हालातों पर मारुती सुजुकी वर्कर्स युनियन का यह पत्र;

सथियो!

न्याय और हक़ के संघर्ष में हमें लम्बा समय बीत गया है। गुडगांव स्थित मारूति मानेसर के हम लगभग ढाई हजार मजदूर दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। फर्जी आरोपों में आज भी हमारे 148 साथ जेल की सलाखों में बन्द हैं। मालिक-सरकार-पुलिस-प्रशासन का मिलाजुला हमला बरकरार है। लगातार दमन झेलकर भी हमारा संघर्ष जारी है।

आओ साथियों, साथ चलें ! 

आज हालात बेहद कठिन हैं। मालिकों के साथ सरकार और उसकी पुलिस प्रशासन, श्रम विभाग मुस्तैदी से खड़े हैं। इसलिए हम मेहनत करने वालों को भी एकजुट होना होगा। हमारी एकताबद्ध ताकत ही इस नापाक गठजोड़ का माकूल जवाब दे सकती है, शोषण व अन्याय से निपट सकती हैं इसलिए आओ साथयो साथ चलें। मारूति के मजदूरों को न्याय दिलाएं। हरियाणा में शोषण से मुक्ति के संघर्ष को आगे बढ़ाएं।

पदयात्रा कार्यक्रम का विवरण:
15 जनवरी - 31 जनवरी 2014
कैथल-जींद-रोहतक-झज्जर-गुडगांव-दिल्ली

15 जनवरी : कैथलः सभा 12 बजे से पदयात्रा शुरू (डी.सी. ऑफिस के सामने से)

16 जनवरी : देवबन से सुबह 9 बजे पदयात्रा शुरू - गुलियाना-किठाना

17 जनवरी : किठाना से सुबह 9 बजे पदयात्रा शुरू - शमदो-नागुरा

18 जनवरी : नागुरा से सुबह 9 बजे पदयात्रा शुरू - कंडेला-जींद

19 जनवरी : जींद में सभा, फिर सुबह 9 बजे पदयात्रा शुरू - बिशनपुरा-गतौली

20 जनवरी : गतौली से सुबह 9 बजे पदयात्रा शुरू - जुलाना-किला जफरगढ़

21 जनवरी : किला जफरगढ़ से सुबह 9 बजे पदयात्रा शुरू - लाखन माजरा-भगवतीपुर

22 जनवरी : भगवतीपुर से सुबह 9 बजे पदयात्रा शुरू - टिटोली-रोहतक

23 जनवरी : रोहतक में सभा - डीघल (झज्जर)

24 जनवरी : डीघल (झज्जर) से सुबह 9 बजे पदयात्रा शुरू - चमनपुरा-गुड्डा

25 जनवरी: गुड्डा से सुबह 9 बजे पदयात्रा शुरू - झज्जर कार्यक्रम - दादरी तय

26 जनवरी : दादरी से सुबह 9 बजे पदयात्रा शुरू - फरूखनगर

27 जनवरी : फरूखनगर से सुबह 9 बजे पदयात्रा शुरू - गढ़ी

28 जनवरी : गढ़ी से सुबह 9 बजे शुरू - दोपहर- गुडगांव में (कमला नेहरू पार्क, सुबह 11 बजे)

29 जनवरी: गुडगांव से सुबह 9 बजे शुरू - महिपालपुर

30 जनवरी : महिपालपुर से दिल्ली

31 जनवरी : दिल्ली जंतर-मंतर पर
वे सबकुछ करने को तैयार, सभी अफसर उनके


18 जुलाई 2012 को गुडगांव के मानेसर स्थित मारूति कंपनी की घटना के बारे में सिर्फ भारत ही नहीं विदेशों में भी मजदूरों के खिलाफ जबरदस्त प्रचार हुआ। हरियाणा सरकार, केंद्र सरकार, बड़े-बड़े राजनैतिक दलों और बड़े मीडिया हाउस ने मारूति मजदूरों के जायज संघर्ष को जानबूझ कर ऐसे प्रचारित किया, ताकि लोगों को लगे कि मारूति के 3000 मजदूर असल में क्रिमिनल थे। हरियाण की आम जनता को समझाया गया कि मारूति के मजदूर कंपनी में गुंडा-गर्दी कर रहे थे। लेकिन सच्चाई धीरे-धीरे सामने आ रही है। सच यह है कि मारूति जैसी बड़ी कंपनियों को देश के संविधान का उल्लंघन करने के लिए हरियाणा सरकार ने खुली छूट दे रखी है। इन सभी कंपनियों में अवैध ठेका प्रथा चलती है, ट्रेनिंग के नाम पर तीन-तीन साल तक मामूली दिहाड़ी पर खटाया जाता है, मजदूरों के साथ जानवरों की तरह व्यवहार किया जाता है। हमारा संघर्ष इसी शोषण के खिलाफ शुरू हुआ।

हम मारूति के मजदूर मारूति प्रबंधन के अवैध कामों को संवैधानिक तरीके से रोकने के लिए यूनियन बनाने के लिए एकजुट हुए। तब से सिर्फ मारूति प्रबंध ही नहीं हरियाणा सरकार भी हमारे पीछे पड़ गयीं 4 जून, 2011 से यह युद्ध जारी है। एक तरफ है दुनिया के बड़े पूंजीपतियों में से एक मारूति सुजुकी ग्रुप और हरियाणा सरकार, दूसरी तरफ है हम सामान्य मारूति मजदूर।

हमारा संघर्ष जायज है, इसलिए हमने संघर्ष की राह नहीं छोड़ी । इसको मजबूत बनाने के लिए तन-मन-धन लगा दिया। इसी मुद्दे पर आज हम हरियाणा और दिल्ली के मजदूर-किसान-छात्र-नौजवान के पास पहुंच रहे हैं। हम जानते हैं कि जनता की जाकत के सामने मारूति और उनके यारों की ताकत कुछ भी नहीं। हमने जनता की सलाह पर उनकी मदद पर, उनके बल पर अपने संघर्ष को जारी रखा है, और हक मिलने तक जारी रखेंगे, देश के मेहनतकशों की एकता को आगे बटाएंगे। जनता के ऊपर जारी हर तरह के अन्याय, जुल्म और अपमान का मुकाबला करने के लिए हम अपनी एकता, जागरूकता, साहस, समझदारी को हर पल मजबूत बनाने का संकल्प ले रहे हैं।

हरियाणा सरकार और उनकी एसआईटी

हरियाणा सरकार के कारनामें अपरम्पार हैं। बेगुनाह मजदूरों को जबरिया गुनाहगार साबित करने के लिए वह अजब-गजब करिश्में कर रही हैं 18 जुलाई मारूति मानेसर में हुए कांड की जांच के लिए हरियाणा सरकार ने एक कमेटी बनाई थी। इस कमेटी का नाम था स्पेशल इन्वेस्टिगेटिंग टीम (एसआईटी)। हमारे जो 148 साथ आज 18 महीने से जेल में बंद हैं उन सभी की गिरफ्तारी एसआईटी के नेतृत्व मे हुई। हरियाणा पुलिस की महिमा ऐसी कि 18 जुलाई रात 7 बजे से मारूति कंपनी की ड्रेस पहने जो भी मजदूर दिखा, उसे गिरफ्तार कर लिया था। गवाही का खेल तो और निराला हैं जेल में बंद 148 मजदूर साथियों में से 90 मजदूर ऐसे हैं जिनके गवाहों ने इन मजदूरों के नाम के पहले अंग्रेजी अक्षर के अनुसार गवाही की, और 20/25 नाम की जिम्मेदारी गवाहो में आपस में बांट ली है (जैसे कि जिस जिस मजदूर का नाम का पहला अंग्रेजी अक्षर A से M तक है, उसकी जिम्मेदारी एक गवाह ने; तो M से S तक के लिए दूसरे गवाह ने....) यह झूठी गवाहियां, हरियाणा पुलिस द्वारा जेल में बंद हमारे 148 साथियों के खिलाफ न्यायालय में पेश की चालान का हिस्सा है। हमारे वकील द्वारा अदालत में इस सच्चाई को पेश करने के बावजूद इसकी अनदेखी इसका प्रमाण है कि न्यायालय भी मारूति जैसी कंपनी की ताकत से डरता है।

अपनी एकता के दम पर हर ताकत से टकराएंगे!

हम हरियाणा के सी.एम. से शुरू करके देश के पी.एम. तक के पास गए - परिणाम सामने है। फिर भी हम थके नहीं हैं। हमारा संकल्प मजबूत हुआ है और समझदारी आगे बढ़ी है। पूंजीपतियों और सरकार के दमन ने हमें सिखाया कि आज देश में मजदूरों की जबरदस्त एकता की जरूरत है। इस सबक से पिछले एक साल के दौरान गुडगांव-मानेसर-धारूहेडा-बावल-नीमराना औद्योगिक इलाके के तमाम मजदूरों के साथ हमें अपनी एकता को और भी मजबूत बनाया। विभिन्न प्रदेशों में संघर्षरत मजदूर संगठनों से बने गहरे रिश्ते इस कठिन संघर्ष को जारी रखने में हमें ऊर्जा दे रहे हैं।

हम ‘यात्रा’ में क्यों?

हम अपने परिवार सहित जनजारगण यात्रा में इसीलिए जुटे हैं, क्योंकि सरकार को हम यह संकेत देना चाहते हैं कि आज जनता जागृत हो रही है। एकमात्र आम जनता का जागरण ही हरियाणा-केन्द्र सरकार की तानाशाही को चुनौती दे सकता है। यही जागृति पूंजीपतियों के पक्ष में काम करनेवाली सारी ताकतों को जनता के सामने बेनकाब करेगी।

साथियो, हम जानते हैं - आम जनता ही हमें न्याय दिला सकती है। हरियाणा सरकार ने अगर इस यात्रा चलने के दौरान हमारे साथियों की रिहाई के साथ हमें न्याय नहीं दिया तो हमें अपने संघर्ष को और भी मजबूती से आगे बढ़ाना पड़ेगां जेल में बंद अपने 148 साथयों की मुक्ति के लिए निकट भविष्य में हम और भी तीखे संघर्ष की राह पर जाने की तैयारी में हैं। हमारे लिए जेल के बाहर भी जेल जैसा ही हैं न्याय पाने के लिए पिछले सालों में हमने कुछ कुरबानियां दी हैं, आनेवाले दिनों में और भी ज्यादा देंगे।



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