जनता के अधिकारों को बहाल करो, चंद्रवंशी पर लगाए फर्जी मुकदमे वापस लो

आज पूरे भारत में सामाजिक कार्यकर्ताओं पर फर्जी मुकदमे दायर कर उन्हें साजिश के तहत फंसाया जा रहा है।  ताज़ा घटना मध्‍यप्रदेश के किसान संगठन किसान संघर्ष समिति के छिंदवाड़ा ब्‍लॉक अध्‍यक्ष सज्‍जे चंद्रवंशी से जुड़ा है. इस घटनाक्रम के विरोध में इंसाफ के महासचिव चितरंजन सिंह द्वारा जारी  वक्तव्य;

बड़ी परियोजनाओं के नाम पर आम जनता को विस्‍थापित-प्रताडि़त करने वाली बहुराष्‍ट्रीय पूंजी के खिलाफ और जनता के हक में उसके सच्‍चे संघर्षों के लिए काम करने वाले राजनीतिक कार्यकर्ताओं का उत्‍पीड़न थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताज़ा घटना मध्‍यप्रदेश के किसान संगठन किसान संघर्ष समिति के छिंदवाड़ा ब्‍लॉक अध्‍यक्ष सज्‍जे चंद्रवंशी से जुड़ी है जिन्‍हें छिंदवाड़ा के संघर्षरत किसानों ने आगामी मध्‍यप्रदेश विधानसभा चुनावों में समिति की ओर से अपना उम्‍मीदवार घोषित किया था। चुनाव लड़ना तो दूर, वे चुनाव प्रचार भी ना कर पाएं, प्रशासन ने इसका पहले से ही इंतज़ाम करते हुए चंद्रवंशी को पांच जिलों से जिला बदर करने संबंधी आदेश थमा दिया है। चंद्रवंशी पिछले कई दिनों से चुनाव लड़ने और प्रचार करने के अपने अधिकार के समर्थन में काग़ज़ात लेकर छिंदवाड़ा से भोपाल और दिल्‍ली के चक्‍कर लगा चुके हैं।

चंद्रवंशी के ऊपर नौ मुकदमे लगे हुए हैं। ऐसा पहली बार नहीं है जब ज़मीनी स्‍तर पर किसानों के हक़ में लड़ने वाले कार्यकर्ताओं को प्रताडि़त किया जा रहा है। बहुत दिन नहीं बीते जब किसानों के लोकप्रिय नेता डॉ. सुनीलम को भी मुलताई गोलीकांड के बरसों पुराने झूठे मुकदमे में फंसाकर जेल में डाल दिया गया था। चंद्रवंशी के ऊपर लगाए गए मुकदमे भी निराधार और झूठे हैं। सारे विवाद की जड़ में चौसरा का अदानी पावर प्‍लांट है जिसके खिलाफ यहां के किसान लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं और चंद्रवंशी उस आंदोलन का स्‍थानीय स्‍तर पर नेतृत्‍व कर रहे हैं। इसी प्‍लांट के प्रबंधन और एक ठेकेदार की मार्फत चंद्रवंशी पर झूठे मुकदमे दर्ज करवाए गए हैं। दिलचस्‍प यह है कि गिरधारी लाल नाम का यह ठेकेदार, जिसे जान से मारने की कोशिश का एक मुकदमा भी चंद्रवंशी पर लगा है, खुद नरसिंहपुर से जिला बदर है और छिंदवाड़ा में रहकर अदानी के मालिकान की शह पर काम कर रहा है। विडंबना यह है कि मुख्‍य निर्वाचन आयुक्‍त ने दिल्‍ली में चंद्रवंशी से हुई मुलाकात में उन्‍हें मौखिक तौर पर आश्‍वस्‍त भी किया है कि वे जिला बदर रह कर भी चुनाव लड़ सकते हैं, बावजूद इसके न तो उनके ऊपर से झूठे मुकदमे हटाने की कोई कार्यवाही अब तक हुई और न ही इस संबंध में कोई निर्देश स्‍थानीय प्रशासन को भेजा गया है। स्‍पष्‍ट है कि स्‍थानीय प्रशासन, पुलिस और राजनीति सब कुछ अदानी के इस पावर प्‍लांट से ही संचालित हो रहे हैं।

यह स्थिति अकेले मध्‍यप्रदेश या चंद्रवंशी जैसे राजनीतिक कार्यकर्ताओं की नहीं है। इससे पहले डॉ. सुनीलम का मामला काफी चर्चित हुआ था और उसी दौरान झारखंड में आदिवासियों के लिए संघर्ष करने वाली कार्यकर्ता दयामनी बरला को भी झूठे मुकदमे के तहत जेल में डाल दिया गया था। देश में जहां कहीं जल, जंगल और ज़मीन के आंदोलन चल रहे हैं, वहां स्‍थानीय प्रशासन, राजनीतिक ताकतों और पूंजी की साठगांठ के ऐसे ढेरों मामले पड़े हुए हैं। विडंबना देखिए कि एक ओर सरकार भागीदारी वाले स्‍वच्‍छ लोकतंत्र की बात करते हुए दागी नेताओं के खिलाफ अध्‍यादेश पारित करती है, तो दूसरी ओर ज़मीनी कार्यकर्ताओं को नेता बनने से रोकने के लिए पहले ही उन पर झूठे मुकदमे लादकर समाज की नज़रों में दागी बना देती है। इस तरह कुल मिलाकर कोशिश यह की जाती है कि मुख्‍यधारा की संसदीय राजनीति में किसी भी तरह वे लोग न आने पाएं जो जनता के वास्‍तविक हितों की बात करते हैं और जिनसे पूंजी के हितों का टकराव होता हो। इस तरह यह लोकतंत्र पैसे वाले कुछ चुनिंदा ताकतवर लोगों का बंधक बनकर रह जाता है।

संविधान की मूल भावना व अधिकारों के आधार पर वास्‍तविक लोकतंत्र को बहाल करने तथा आभासी ही सही लेकिन चुनावों की गरिमा को बचाए रखने के लिए जरूरी है कि सरकार और पूंजी की इस साठगांठ के खिलाफ आवाज़ उठाई जाए और सज्‍जे चंद्रवंशी जैसे ईमानदार कार्यकर्ता के चुनाव लड़ने व चुनाव प्रचार करने के हक को उन्‍हें लौटाया जाए। हम सभी सरोकारी जन सरकार से यह अपील करते हैं कि सज्‍जे चंद्रवंशी के ऊपर लादे गए फर्जी मुकदमे तत्‍काल हटाए जाएं और जिला बदर का निर्देश वापस लिया जाए। साथ ही उन दोषी अधिकारियों के खिलाफ जांच बैठाकर उन्‍हें दंडित किया जाए जो सरकार से वेतन लेकर एक निजी कंपनी के हित में काम कर रहे हैं।

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