डिमना बांध के विस्थापितों का जल सत्याग्रह


जल जंगल जमीन की लूट, नहीं किसी को इसकी छूट।  
अतीत के विस्थापितों को न्याय चाहिए, डिमना बांध के विस्थापितों को न्याय चाहिए।

टाटा कंपनी द्वारा डिमना बांध से किए गये विस्थापितों के न्याय के लिए जल सत्याग्रह

स्थान - डिमना बांध, हैलीपैड पिकनिक स्थल के समीप                                 
दिनांक - 30 सितम्बर 2013 से प्रारंभ

प्रिय साथी जोहार,

टाटा कंपनी को कालीमाटी से कोरस तक पहुंचने में डिमना बांध के विस्थापितों का क्या योगदान है, किसी को भी पूछा जाय तो स्पष्ट रूप से जवाब आयेगा कि डिमना बांध विस्थापितों ने टाटा कंपनी के विकास के लिए अपने पूर्वजों के गांव को त्याग कर जमीन दिया। बांध से 12 मौजा जलमग्न हैं। विस्थापित परिवार दलमा के तराई पर बसने के लिए मजबूर हुए। आज भी देखा जा सकता है कि विस्थापित लकड़ी, दातून, पत्ता आदि बेचकर किसी तरह दिन गुजार रहे हैं.

टाटा कंपनी की जिम्मेदारी बनती है कि कम से कम कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सबिलिटी के तहत कुछ बुनियादी विकास के लिए काम करे। आज तक कोई ठोस काम नहीं हुआ। ऐसा लगता है कि इन क्षेत्रों के विकास के लिए भविष्य की योजना ही नहीं है। अंग्रेजो के शासन काल से झारखंड की जल, जंगल, जमीन और खनिज के दोहन के बदले आदिवासी-मूलवासी के विकास के लिए व्यापक योजना चाहिए थी।

डिमना बांध विस्थापितों के मांग एवं न्याय के लिए विगत पांच वर्षों से आंदोलन जारी है। रैली, जुलूस, धरना-प्रदर्शन, अनशन आदि कार्यक्रम किये गये हैं। इस दौरान अनुमंडल पदाधिकारी, धालभूम की अध्यक्षता एवं भूमिसुधार उपसमाहर्ता के सहयोग से 18 दौर की त्रिपक्षीय वार्ता हो चुकी है। न चाहते हुए भी टाटा कंपनी को वार्ता में आकर जवाब देने के लिए बाध्य होना पड़ा। वार्ता के माध्यम से समस्याएं पूरी तरह से स्पष्ट हो चुकी हैं और एक निष्कर्ष बना है, केवल निर्णय लेना शेष है। लेकिन दुःख की बात है कि लगभग एक वर्ष बीतने के बावजूद टाटा कंपनी एवं प्रशासन की ओर से अपेक्षित गंभीरता नहीं रही है, जिसकी वजह से मामला टलता रहा है। दूसरी ओर मौजा पुनसा के 3.84 एकड़ और लायलम के 1.99 एकड़ पर धान की फसल डुब में आने से किसानों को क्षति हो रही है। पिछले दिनों रैयतों ने टाटा कंपनी के प्रबंध निदेशक और जुस्को के महाप्रबंधक के नाम से बोड़ाम थाना में आदिवासी रैयतों को प्रताड़ित करने और फसल बर्बाद करने पर सनहा दर्ज की गयी है।
हमारी मांग निम्न है -

1.  टाटा कंपनी अतिक्रमित 102 एकड़ जमीन की क्षतिपूर्ति दी जाये।
2. डिमना बांध में अन-अधिग्रहित मौजा पुनसा के 3.84 एकड़ और लायलम के 1.99 एकड़ जमीन के फसल के नुकसान की क्षतिपूर्ति देे।
3. डिमना बांध के विस्थापितों को बकाया मुआवजा, नौकरी और पुनर्वास की व्यवस्था की जाय।
4. टाटा कंपनी के द्वारा विस्थापित परिवारों को डिमना के पानी के उपयोगिता मूल्य या लाभ का आधा हिस्सा दिया जाए।
5. डिमना बांध में नौकाचालन और मत्स्य पालन का अधिकार विस्थापितों के समूह को दिया जाये।
6. टाटा स्टील के कर्मचारियों की तरह विस्थापित परिवारों को भी नौकरी, चिकित्सा और शिक्षा की सुविधायें दी जायें।
7. डिमना बांध के किनारे अमरी पौधे की झाड़ियो को नियमित रूप से साफ किया जाये।
8. डिमना बांध के किनारे-किनारे लिफ्ट-इरिगेशन द्वारा सिंचाई की व्यवस्था की जाये।
9. कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व के तहत विस्थापित इलाको में ग्राम सभा की सहमति से विकास कार्य किया जाय।

30 सितम्बर और 1 अक्टूबर को डिमना बांध, हैलीपैड पिकनिक स्थल के समीप जल सत्याग्रह होगा। 02 अक्टूबर गांधी जयंती के अवसर पर अगली कार्रवाई तय होगी। आप सभी स्थल पर उपस्थित होकर निर्धारित कार्यक्रम को सफल बनावें।

निवेदक

झाड़खंड मुक्ति वाहिनी                                    विस्थापित गांव की ग्राम समितियां


संपर्क - 9934181240, 9504141047, 7762933562, 9430713591, 9430354341. 

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