गुजरात में परमाणु प्लांट के खिलाफ उठी आवाज

गुजरात में मीठी विर्दी से भावनगर तक हज़ारों किसानों ने सोमवार 23 सितम्बर 2013 को मार्च किया और प्रस्तावित परमाणु बिजली परियोजना का विरोध किया। इसी परियोजना के लिए प्रधानमंत्री द्वारा अमेरिकी कंपनी वेस्टिंगहाउस के साथ बिना मुआवजे के प्रावधान के व्यावसायिक समझौता करने संबंधी खुलासे पर हाल ही में मीडिया, बुद्धिजीवियों और विपक्षी पार्टियों द्वारा व्यापक विरोध सामने आया। प्रधानमंत्री इस हफ्ते अमेरिका की यात्रा करने वाले हैं जिसमें वे यह समझौता पूरा करने की कोशिश करेंगे। ऐसे में, मीठी विर्दी के ग्रामीणों का यह प्रदर्शन बहुत मायने रखता है। 

ज्ञात रहे कि सौराष्ट्र के मीठीवीरड़ी गांव के पास लगने वाले छह हजार मेगावाट वाले पावर प्लांट को लेकर किसान व ग्रामीणों का कहना है कि इससे आसपास के एक दर्जन से अधिक गांव उजड़ जाएंगे तथा कृषि योग्य भूमि भी बंजर हो जाएगी। गुजरात सरकार ने इस साल के शुरू में  प्लांट के लिए जमीन संपादन के लिए आदेश जारी किया था।

अमरीका के साथ भारत के परमाणु करार के बाद गुजरात में परमाणु प्लांट के लिए भावनगर के पास मीठीवीरड़ी गांव को चुना गया। जापान के फुकुशिमा में हुई दुर्घटना के बाद से स्थानीय लोगों को डर है कि यहां पावर प्लांट लगने से जहां दक्षिण गुजरात व सौराष्ट्र को जोड़ने वाली कल्पसर योजना अधर में लटक जाएगी वहीं दुर्घटना की स्थिति में भावनगर शहर तक पर इसका असर हो सकता है।

स्थानीय पर्यावरण सुरक्षा समिति के कृष्णकांत भाई बताते हैं कि फिलहाल सरकार 7 गांव खाली करने को कह रही है लेकिन अंतरराष्ट्रीय गाइडलाइन के मुताबिक मीठीवीरडी के आसपास के 15 गांव खाली करने होंगे।  विरोध के बावजूद गुजरात पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने मार्च माह में जनसुनवाई आयोजित की थी ।


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