मारुति सुजुकी मजदूरों का आंदोलन

जब-जब दमन बढ़ता गया
 तब-तब संघर्ष बढ़ता गया 

एक बार फिर मारुति सुजुकी के संघर्षरत मजदूरों पर पूंजी की रक्षा में लगी हरियाणा पुलिस व प्रशासन ने दमन तेज कर दिया है। दमन की ताजा तरीन घटना को 19 मई को तब अंजाम दिया गया जब मारुति सुजुकी के संघर्षरत मजदूरों, उनके परिवार व गांव वाले, क्रांतिकारी, प्रगतिशील, लोकतांत्रिक संगठनों व ट्रेड यूनियन संगठनों के कार्यकर्ताओं व सदस्यों समेत लगभग 1500 लोग मारुति सुजुकी के मजदूरों व मजदूर संगठनों के नेताओं को रिहा करने की मांग के लिये शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे।

गौरतलब है कि मारुति सुजुकी के मजदूर अपनी जायज मांगों ;147 गिरफ्रतार मजदूरों को रिहा करने पफर्जी मुकदमें वापस लेने व बर्खास्त मजदूरों को काम पर रखने, ठेका प्रथा खत्म करने आदि।द्ध को लेकर श्रम अधिकारी, श्रम मंत्राी, हरियाणा व केंद्र सरकार, मुख्यमंत्राी ;हरियाणाद्ध, प्रधानमंत्राी ;केंद्र सरकारद्ध समेत देश के चुने हुए प्रतिनिधियों को ज्ञापन व अपील देने और हरियाणा व दिल्ली के विभिन्न स्थानों समेत देश के विभिन्न स्थानों पर 8 महिनों से प्रदर्शन करने के बाद भी कोई कार्रवाई ने होने पर 24 मार्च से कैथल मंे एस डी एम ;मिनी सचिवालयद्ध में धरने पर बैठ गये। उसके बाद 28 मार्च से मारुति के चार मजदूर भूख हड़ताल पर बैठ गये। इसी बीच मजदूरों ने व्यापक जन अभियान, जुलूस व प्रदर्शन किये। 6 दिनों की भूख हड़ताल के बाद उद्योग मंत्राी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुडा से मुलाकात कराकर आश्वासन दिया कि वह बर्खास्त मजदूरों को  वापस काम पर लेने के लिए श्रम अधिकारियों तथा मारुति सुजुकी के मैनेजमेंट से वार्ता करायेंगे।

आश्वासन के बाद भी कोई कार्रवाई ने होने पर मारुति सुजुकी वर्कर्स यूनियन ने 8 मई को 150 गांवों की पंचायतों के समर्थन से एक महापंचायत का आयोजन किया। जिसमें मारुति सुजुकी के संघर्षरत मजदूरांे, उनके परिवार व गांव वाले, क्रांतिकारी, प्रगतिशील, लोकतांत्रिक संगठनों, स्वतंत्रा ट्रेड यूनियनों व ट्रेड यूनियन सेंटरों के कार्यकर्ताओं व सदस्यों समेत लगभग 2000 लोगों ने भागीदारी की, जिसमें एस.डी.एम. के माध्यम से उद्योग मंत्राी सुरजेवाला को चेतावनी दी गई कि यदि 18 मई तक मजदूरों की मांगों के संबंध में उचित कार्रवाई नहीं हुई तो 19 मई को कैथल में सुरजेवाला के घर का घेराव का कार्यक्रम किया जायेगा। 

18 मई तक कोई कार्रवाई न होने पर मजदूर 19 मई को घेराव की तैयारी कर रहे थे। कैथल में प्रशासन ने 18 मई को शाम पांच बजे से ही धारा 144 लगा दी। और रात 11.30 बजे श्यामवीर और दीपक ;इंकलाबी मजदूर केंद्रद्ध, अमित ;मजदूर संगठन के कार्यकर्ता और जे एन यू छात्राद्ध, योगेश ;मारुति कमेटी के सदस्यद्ध समेत 100 मजदूरों को पुलिस उठाकर ले गई। पुलिस के इस दमन के बावजूद मारुति सुजुकी वर्कस यूनियन के नेताओं, ग्रामीणों व मजदूर व प्रगतिशील संगठनों ने तय किया कि वह पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार उद्योग मंत्राी रणदीप सिंह सुरजेवाला के घर का घेराव करेंगे। प्रदर्शनकारी उद्योग मंत्राी रणदीप सिंह सुरजेवाला के घर का घेराव करने जा रहे थे, जिन्हें पुलिस द्वारा बाधा खड़ी करके रोक लिया गया। प्रदर्शनकारी उसी स्थान पर बैठ गये। प्रदर्शनकारियों ने तय किया कि जब तक गिरफ्रतार मजदूरों को बिना शर्त रिहा नहीं किया जायेगा तब तक हम यहीं बैठे रहेंगे। इस प्रदर्शन में मजदूरों के परिवार व गांव से बूढ़ी महिलाओं सहित ज्यादातर महिलाओं ने भागीदारी की। लगभग 5 घंटे बैठे रहने के बाद अचानक चेतावनी दिये बगैर पहले से तैनात वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया और सैकड़ों की संख्या में तैनात पुलिस वालों ने जबरदस्त लाठी चार्ज किया। पुलिस वालों ने बूढ़ी महिलाओं समेत किसी को भी नहीं बख्शा। पुलिस वालों ने कई लोगों को गिरा-गिरा कर पीटा। और पूरे प्रदर्शन को तितर-बितर कर दिया। कुछ समय बाद कुछ दूरी पर जब लोग दोबारा इकट्ठा हुए तो पुलिस ने गाड़ियों से आकर उन पर लाठी चार्ज किया। और प्रदर्शनकारियों को मार-मार कर भगा दिया। महिला प्रदर्शनकारियों ने बताया कि पुरुष पुलिस कर्मियों ने महिलाओं के साथ बदसलूकी की और उन्हें गालियां भी दीं। साथ ही उन पर लाठी चार्ज किया। इस पर वहां उपस्थिति महिला पुलिस अधिकारी ने अपने से बड़े अधिकारी को कहा कि जब आपने ही महिलाओं के साथ यह व्यवहार करना था तो हमे क्यों बुलाया गया। इस लाठी चार्ज में सैकड़ों प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं। जिनमें से कई गंभीर रूप से घायल हैं। 

इस लाठी चार्ज में पुलिस प्रशासन ने आंदोलन को नेतृत्व दे रहे मजदूरों और मजदूर संगठनों के नेताओं समेत 11प्रदर्शनकारियों को गिरफ्रतार कर लिया। जिसमें रामनिवास ;कमेटी सदस्यद्ध, दीपक बख्शी ;जनरल सेकरेटरी हिंदुस्तान मोटर्स संग्रामी श्रमिक कर्मचारी यूनियनद्ध, सोमनाथ ;पत्राकार श्रमिक शक्तिद्ध, सुरेश कोठ ;पंचायत नेता कोठ गांवद्ध, नितिश, ;मारुति मजदूरों से कोई संबंध नहीं, बस स्टैंड से उठा लिया गयाद्ध, मंगतू व प्रेमचंद शामिल हैं। उन पर गैर जमानती धारायें 148, 149, 188, 283, 332, 353, 186, 341, 307, ;हत्या का प्रयासद्ध प्च्ब्ए 3 व िच्ध्क्ए ज्च्क्।ए 8 छभ् हाइवे जाम करने और 25 ;54 और 59द्ध हथियार रखने जैसी संगीन धारायें लगाई हैं जैसे कि यह किसी प्रदर्शन में नहीं बल्कि आतंकी घटना को अंजाम देने आये हों। गिरफ्रतार प्रदर्शनकारियों को अदालत में पेश किया गया और इन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अदालत का आदेश हमारे देश की अदालतों की पक्षधरता को तय कर देता है कि वह किस तरह से मजदूर-मेहनतकशों की विरोधी हो चुकी है। 

वैसे तो मारुति सुजुकी ;मानेसर प्लांटद्ध के मजदूरों का संघर्ष जून 2011 से ही अपने संवैधानिक अधिकार टेªेड यूनियन बनाने के अधिकार से शुरु हुआ और कई चरणों के उतार-चढ़ाव से होते हुए मारुति में मजदूरों ने अपनी यूनियन मारुति सुजुकी वर्कर्स यूनियन का रजिस्ट्रेशन प्राप्त कर लिया। 

मारुति का मैनेजमेंट मारुति के मजदूरों के संघर्ष को कुचलने की शुरू से ही चालें चलता रहा है। यूनियन बनाने के बाद मैनेजमेंट मजदूरों की यूनियन को कुचलने की कोशिश करता रहा। 

18 जुलाई को उसको मारुति के मजदूरों का दमन करने का मौका मिल गया। 18 जुलाई की घटना में मानेसर प्लांट में आग लग गई, जिसमें एच. आर. मैनेजर की मृत्यु हो गई। मारुति सुजुकी वर्कर्स यूनियन के मजदूरों को कहना है कि मारुति मैनेजरों ने पफैक्टरी में बाउंसरों को बुलाया और एक योजना के तहत इस दुर्घटना को अंजाम दिया। मारुति सुजुकी वर्कर्स यूनियन की लगातार यह मांग रही है कि इस घटना की सी.बी.आई. जांच कराई जाये परंतु सरकार ने उसकी मांग नहीं मानी। 

18 जुलाई की घटना का मारुति सुजुकी मैनेजमेंट, हरियाणा सरकार व पुलिस प्रशासन ने पूरा इस्तेमाल किया। इस घटना का इल्जाम मजदूरों के ऊपर लगाकर मजदूरों पर दमन तेज कर दिया। मारुति के नेतृत्वकारी मजदूरों की धर पकड़ की गई और 147 मजदूरों के ऊपर संगीन धारायें लगाकर उन्हें जेल में बंद कर दिया। 

इन मजदूरों के साथ अमानवीयता की हदों को भी पार कर यातनायें दी गईं। 10 महीनों से बंद मजदूरों को अभी तक जमानत नहीं दी गई है। कई मजदूरों के परिजनों दादी, मां बेटी के मरने व पत्नियों के प्रसव पर उन्हें जमानत तो क्या पैरोल पर भी नहीं छोड़ा गया। यहां पर मैनेजमेंट, सरकार व पुलिस के साथ-साथ न्यायालय भी मजदूरों के विरु( खड़े हैं। कॉरपोरेट मीडिया की भूमिका तो हम 18 जुलाई की घटाना में ही देख चुके हैं। जब बिना किसी जांच पड़ताल के इन्होंने मजदूरों को हत्यारा घोषित कर दिया था। आज मजदूरों की स्थिति पर संघर्षों पर चुप रह कर वह पूंजीपति वर्ग के पक्ष खड़े होकर अपनी पक्षधरता जाहिर कर रहा है। 

जेल के बाहर भी मजदूरों की स्थिति बहुत बुरी है, उनके ऊपर भी मैनेजमेंट, सरकार व पुलिस का दमन जारी है। 18 जुलाई की घटना के बाद, कंपनी ने लगभग 2500 स्थायी व ठेका मजदूरों को बिना किसी दोष के बर्खास्त कर दिया है। उनको व उनके परिवार वालों को अन्याय के खिलापफ संघर्ष का रास्ता छोड़ने के लिए डराया-धमकाया गया और जेल में डालने की धमकी दी। आगे बढ़कर नेतृत्व करने वाले साथियों को जेल में डाला जा रहा है। ईमान खान जो मारुति सुजुकी वर्कर्स यूनियन की कमेटी के सदस्यों की गिरफ्रतारी के बाद बनी प्रोविजनल कमेटी के सक्रिय सदस्य थे, को बाद में गिरफ्रतार कर लिया, जबकि उनका नाम एपफ.आई.आर., चार्जशीट या एस आई. टी. रिपोर्ट में नहीं था। उन पर भी वही संगीन धारायें लगाई हैं जो 147 मजदूरों पर लगाई गई थीं। इसके अलावा 65 अन्य मजदूरों के नाम पर गैर जमानती वारंट निकाले हुए हैं। यह सब मारुति के मजदूरों को नेतृत्व विहीन करने और संघर्ष को कुचलने के लिए किया गया है।

मारुति मैनेजमेंट, सरकार, पुलिस, न्यायालय कॉरपोरेट मीडिया के अघोषित गठजोड़ द्वारा मजदूरों के न्यायपूर्ण संघर्ष को कुचलने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। देश का पूंजीपति वर्ग मारुति मजदूरों के दमन से देश के मजदूरों और मजदूर संगठनों को यह संदेश दे रहा है कि पूंजी के मुनापफे में आने वाली हर रुकावट को वह कुचल कर समाप्त कर देगें। इसीलिए वह मारुति मजदूरों के मामले में अपने बनाये नियम-कानूनों को मानने को तैयार नहीं है। 

मारुति मजदूरों ने अपनी एकता और जुझारू संघर्ष से देश के मजदूर आंदोलन में एक नई ऊर्जा पैदा की है। 10 महीने के कठोर दमन के बावजूद जेल में बंद व जेल से बाहर मजदूर एकता बनाये हुए हैं और संघर्ष कर रहे हैं। मारुति सुजुकी वर्कर्स यूनियन की कमेटी के सभी मजदूरों की गिरफ्रतारी के बाद वह मारुति सुजुकी वर्कस यूनियन की प्रोविजनल कमेटी बनाकर आंदोलन को नेतृत्व दे रहे हैं। इसके साथ ही देश के क्रांतिकारी, प्रगतिशील, लोकतांत्रिक, ट्रेड यूनियन संगठनों, बु(िजीवियों व आम जन से सहयोग व समर्थन प्राप्त कर संघर्ष को आगे बढ़ा रहे हैं।

मारुति सुजुकी के मजदूरों और देश के क्रांतिकारी, प्रगतिशील ट्रेड यूनियन संगठनों, इंसापफ पसंद व्यक्तियों समेत सभी मजदूर-मेहनतकशों को मारुति के संघर्ष को तेजकर जीत हासिल करनी होगी। मारुति आंदोलन की जीत मजदूरों की एकता व जुझारू संघर्ष की एक मिसाल बनेगी और मजदूर आंदोलन को ऊर्जा प्रदान करेगी। यह पूंजी की बेलगाम लूट पर रोक लगाने की शुरुआत होगी।( साभार : समकालीन तीसरी दुनिया )
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