प्रतिरोध की आवाज़ 'इन्साफ' पर सरकार का निरंकुश हमला: चितरंजन सिंह

जल, जंगल ज़मीन की लड़ाइयों और लोकतंत्र तथा धर्मनिरपेक्षता के संघर्ष को वर्षों से मजबूत करने वाले संगठन 'इन्साफ' का बैंक अकाउंट शनिवार को सरकार ने जब्त कर लिया है, जिसे हाल के ए डी बी विरोधी प्रतिरोध पर सरकारी कारवाई के रूप में देखा जा रहा है. पेश है इन्साफ के महासचिव चितरंजन सिंह का वक्तव्य;
इंसाफ के राष्ट्रीय महासचिव चितरंजन सिंह ने उक्त वक्तब्य जारी करते हुए कहा है कि उनके कटवरिया सराय स्थित केन्द्रीय कार्यालय को भारत सरकार के गृहमंत्रलाय के अधिकारी ए.के. सिन्हा, डाइरेक्टर आफ गौरमेंट ऑफ इण्डिया, का एक पत्र आज मिला है जिसमें कहा गया है कि उनकी सूचना के अनुसार इंसाफ की कार्यवाहियां पूर्वाग्रह से ग्रसित और ‘जनता के हितों के खिलाफ’ है इसलिए उनका बैंक एकाउन्ट तत्काल प्रभाव से फ्रीज किया जा रहा है और अगर धनराशि खर्च करना है तो गृहमंत्रालय से अनुमति लेकर खर्च कर सकते हैं।

इंसाफ के महासचिव सिंह ने कहा है कि इंसाफ की स्थापना बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद भूमण्डलीकरण के खिलाफ, सम्प्रदायिकता के खिलाफ और मानवाधिकार के पक्ष में संघर्ष हेतु गठित किया जा रहा है। सिंह ने कहा है कि इसमें जनता के हित की खिलाफत कहां हैं। सिंह ने बताया कि एफसीआरए के नियम में गृह मंत्रालय ने संशोधन कर धरना, जुलूस, प्रदर्शन करने वालों के एफसीआरए रद्द करने की धमकी के खिलाफ इंसाफ ने हाईकोर्ट दिल्ली में चुनौती दी थी जिसे खारिज हो जाने के बाद सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है और सुनवाई हेतु याचिका मंजूर कर ली गयी है।

सिंह ने गृह मंत्रलाय के उक्त कार्रवाई को जनतांत्रिक संगठनों पर खुलेआम निरंकुश हमला बताते हुए तत्काल कार्रवाई को रद्द करते हुए बताया है कि सर्वोच्च न्यायालय में 6 मई को एक याचिका उनकी ओर से दाखिल की जायेगी।

संपर्क:
चितंरजन सिंह
राष्टृ्ीय महासिचव, इंसाफ
कटवरिया सराय, नई दिल्ली-16
09415245770
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