खनन माफिया: न्याय के लिए 53 दिन से अनिश्चितकालीन धरना

राजस्थान के झुंझनू जिले में अवैध खनन का विरोध कर रहे स्वतंत्रता सैनानी ताड़केश्वर शर्मा के पौत्र प्रदीप शर्मा की संदिग्ध मौत को पुलिस ने आत्महत्या करार दिये जाने के विरोध में 19 मार्च 2013 से अनिश्चित कालीन धरना आज 53वें दिन भी जारी है लेकिन प्रशासन ने आज तक खान माफियाओं के विरोध में कोई कार्यवाही नहीं की है. इस हत्या के दोषियों की गिरफ़्तारी, प्रदीप शर्मा हत्याकाण्ड की सीबीआई से जांच कराई जावें, पचेरीकलां पहाड़ों के सभी खनन पट्टे निरस्त कियें जायें। हत्या के साक्ष्य मिटाने वाले पुलिस अधिकारियों को दण्डित किया जायें  की मांग् को लेकर पचेरी कलां गांव में अनिश्चितकालीन धरन जारी है.  पेश है जगदिश प्रशाद शर्मा की रिपोर्ट

ज्ञात रहे कि सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप शर्मा स्वतंत्रता सैनानी ताड़केश्वर शर्मा के पौत्र थे। स्वतंत्रता सैनानी ताड़केश्वर शर्मा प्रजामण्डल के उपनेता थे। 1937 में उन्होंने जेल में अनशन किया जिसके बाद अंग्रेज सरकार को जेलों में कई सुधार करने पड़े। 1939 में दो साल की कड़ी सजा भुगती। इसके बाद 1942 के आन्दोलन में भी उन्हें तीन महीने की जेल की सजा हुई। सरकार ने उनकी 100 बीघा जमीन भी जब्त कर ली। अंग्रजों से आजादी के बाद भी ताडकेश्वर शर्मा शोषण के खिलाफ आन्दोलनों में भागीदारी करते रहे। प्रदीप शर्मा के पिता लेखाराम शर्मा भी कई जनान्दोलनों में सक्रिय रहे हैं। परिवार के इन संस्कारों और बलिदान का प्रदीप शर्मा पर पूरा प्रभाव था। इसी के रहते प्रदीप शर्मा क्षेत्र के तमाम सामाजिक सरोकारों से जुड़े थे और पचेरी कला में खनन से फैलने वाले प्रदूषण से गांव  को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। पिछले महीने 4 मार्च, 2013 को झुंन्झुनूं जिले की तहसील बुहाना के पचेरी कलां गांव में दोपहर बाद करीब 3 बजे प्रदीप शर्मा का शव मिला। शव की बरामदगी उस खनन लीज क्षेत्र के पास एक गंदे पानी के बड़े गडढे से हुई। 

उधर क्रमिक अनसन के 7वें दिन श्री विष्णूदत शर्मा, मंमता शर्मा श्री राधेश्याम शर्मा एवं श्रमिती माड़ी देवी भूखहड़ताल पर रहे ।

7 मई 2013 को विष्णूदत्त शर्मा की भूख हड़ताल की वजह से तबियत बिगडगई उहें राजकीय चिकित्सालय पचेरी कलां में भर्ती करवाया गया है.

धरना स्थल पर सुभाष खारवा मनोज पुहानिंयॉं, राजेन्द्र मेंघवाल मोई, दीनदयाल सैनी-सिघाणा, बनवारीलाल सैनी सिंघाणा, अमीलाल बोहरा, सुरेश मोंगी बुद्वराम नांमडि, ममता देवी, गीतादेवी,  गंगा देवी, बबलीदेवीर्, इंमरती देवी रोशनी, मुस्कान, तैयब, रेखा रूकसानी आनन्दी देवी सहित सैकड़ो धरना स्थल पर उपस्थित रहे।
                                                                              


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