यह आत्महत्या नहीं, हत्या है : जाँच दल

राजस्थान के झुंझनू जिले में अवैध खनन का विरोध कर रहे वतंत्रता सैनानी ताड़केश्वर शर्मा के पौत्र प्रदीप शर्मा की संदिग्ध मौत को पुलिस ने आत्महत्या करार दिया. लेकिन स्वतंत्र जाँच दल को मिले साक्ष्य उनकी हत्या किये जाने की और इशारा करते हैं. वहीं इस् हत्या के दोषियों की गिरफ़्तारी की मांग् को लेकर पचेरी कलां गांव में जारी अनिश्चितकालीन धरने में प्रदीप शर्मा के चाचा की इस् दौरान मौत हो गई है. पेश है जाँच दल की रिपोर्ट
  1. पिछले महीने 4 मार्च, 2013 को झुंन्झुनूं जिले की तहसील बुहाना के पचेरी कलां गांव में दोपहर बाद करीब 3 बजे प्रदीप शर्मा का शव मिला। शव की बरामदगी उस खनन लीज क्षेत्र के पास एक गंदे पानी के बड़े गडढे से हुई।  खनन लीज से फैलने वाले प्रदूषण से गांव को बचाने के लिए प्रदीप शर्मा लम्बे समय से संघर्ष कर रहे थे।
  2. सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप शर्मा स्वतंत्रता सैनानी ताड़केश्वर शर्मा के पौत्र थे। नवलगढ निवासी स्वतंत्रता सैनानी सांवलराम भारतीय ने ताड़केश्वर शर्मा के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि वे प्रजामण्डल के उपनेता थे। 1937 में उन्होंने जेल में अनशन किया जिसके बाद अंग्रेज सरकार को जेलों में कई सुधार करने पड़े। 1939 में दो साल की कड़ी सजा भुगती। इसके बाद 1942 के आन्दोलन में भी उन्हें तीन महीने की जेल की सजा हुई। सरकार ने उनकी 100 बीघा जमीन भी जब्त कर ली। अंग्रजों से आजादी के बाद भी ताडकेश्वर शर्मा शोषण के खिलाफ आन्दोलनों में भागीदारी करते रहे। प्रदीप शर्मा के पिता लेखाराम शर्मा भी कई जनान्दोलनों में सक्रिय रहे हैं। परिवार के इन संस्कारों और बलिदान का प्रदीप शर्मा पर पूरा प्रभाव था। इसी के रहते प्रदीप शर्मा क्षेत्र के तमाम सामाजिक सरोकारों से जुड़े थे और पचेरी कला में खनन से फैलने वाले प्रदूषण से गांव  को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे।
  3. परिजनों ने जांच दल को बताया कि वे 3 मार्च की करीब रात साढे सात बजे के बाद से घर से लापता थे। वे रोज की तरह उस दिन अपने छोटे भाई के यहां से खाना लेकर कमरे पर गये थे।  कुछ लोग बुलाने आये थे। उसके बाद से परिवारजन उन्हें तलाश रहे थे।
  4. प्रदीप शर्मा का शव मिलते ही उसी शाम को एक निजी टी.वी. चैनल द्वारा एक ब्रेकिंग न्यूज दी गई- एक युवक ( प्रदीप शर्मा) गांव के पास तालाब में नहाने गया जिसमें डूबकर उसकी मौत हो गई।
  5. शव मिलने के अगले दिन यानी 5 मार्च, 2013 को स्थानीय समाचार पत्रों के जरिये पुलिस ने इसे आत्महत्या की घटना ठहराया और एक सुसाइड नोट की बरामदगी की बात की।  
  6. जांच दल ने उस तालाब का मौका मुआयना किया। जांच दल को हैरानी हुई कि यह कोई नहाने का तालाब नहीं बल्कि गांव के गंदे पानी का बड़ा गडढा है। तालाब की गहराई मात्र एक या डेढ फीट से अधिक नहीं हैं। इतने से पानी में डूबकर मरना या आत्महत्या करना मुमकिन नहीं। पास ही एक पुराना कुआं भी है यदि आत्महत्या ही करनी होती तो इतने कम गहरे गडढे के बारे में क्यों सोचा जाता?
  7. 24 मार्च, 2013 को जांच दल पचेरी कला में  सी॰बी॰आई॰ जैसी उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहे ग्रामीणों के धरना स्थल पर पहुंचा। धरना स्थल पर उपस्थित पूर्व डीजीपी  जे. पी. मिश्रा ने जांच दल को बताया कि पुलिस जिसे सुसाइड नोट बता रही है वह दो साल पहले लिखी एक चिटठी है जिसमें प्रदीप शर्मा ने भविष्य में खनन माफियाओं द्वारा उनकी हत्या किये जाने की बात कही हैं। यह चिटठी उनको पुलिस अधिकारियों ने सुसाइड नोट कहकर दिखाई थी। अपने पुलिस कैरियर के अनुभव के आधार पर जे. पी. मिश्रा इस चिटठी को सुसाइड नोट मानने से साफ इंकार करते हैं।
  8. प्रदीप शर्मा के छोटे भाई अनूप  ने जांच दल को बताया कि परिजनों की अनुपस्थिति में पुलिस ने घर का ताला तोड़कर घर से इस चिटठी को हासिल किया। यह चिठ्ठी प्रदीप ने इसलिए लिखकर रखी थी क्योंकि उसको संदेह था कि खनन माफिया उसकी हत्या कर सकते हैं। इस संबंध में प्रदीप शर्मा के पुत्र राकेष शर्मा ने पुलिस उपाधीक्षक, खेतड़ी के कार्यालय में शिकायत दर्ज की।  वे अपने पिता की हत्या की खबर सुनकर 4 मार्च की रात साढे 10 बजे दिल्ली से गांव लौटे तो उन्हें अपने घर के ताले टूटे मिले। पूछताछ करने पर गांववालों ने बताया कि एस॰ एच॰ ओ॰ अनिल कुमार मूंड  ने घर का ताला तोड़कर बिना मेरी अनुमति के घर का सामान चैक किया। साथ ही पुलिस पर हत्या के साक्ष्य मिटाने का आरोप लगाते हुए कानूनी कार्यवाही की मांग की।      
  9. भीमप्रज्ञा के संवाददाता हरेश पंवार ने बताया कि जब पुलिस घर की छानबीन करने आई थी तब वे वहाँ मौजूद थे लेकिन पुलिस चौकी इंचार्ज ने उन्हें घर से बाहर ही रोक दिया। इसके बाद उनकी खबर पर कई क्षेत्रीय संवाददाता वहां पहुंचे परन्तु पुलिस ने उन्हें भी अन्दर जने मना कर दिया। बाहर आने पर परिजनों व पत्रकार साथियों द्वारा सर्च वारंट व बरामद सामान की जानकारी चाही तो पुलिस चौकी इंचार्ज ने कुछ भी मना करने से इंकार कर दिया।
  10. जांच दल को ग्रामीणों ने बताया कि  परिजनों ने पुलिस के उच्च अधिकारियों से प्रदीप शर्मा के गुम मोबाइल की जानकारी मांगी और साथ ही कॉल डिटेल चाही। तब शव मिलने के पांच दिन बाद पुलिस चौकी इंचार्ज  ने गद्दे की तलाशी करवायी जिसमें मोबाइल बरामद हुआ। मोबाइल चालू हालत था। जांच दल को सन्देह है कि मोबाइल की बरामदगी पहले ही हो चुकी थी।  पुलिस के अनुसार मोबाइल ढूढनेवला कथित तैराक नारनौल वासी बजरंग है जो अपनी ससुराल सिंघाना में रह रहा था। परन्तु उस दिन के बाद उसे दोबारा किसी ने नहीं देखा। 
  11. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर कहीं भी चोट के निषान नहीं दिखाए गए हैं।  किसी विषैले पदार्थ को खाने की भी तथ्य नहीं हैं। जबकि परिवारीजन द्वारा उपलब्ध कराये गये शव के फोटोग्राफ में चोटों के निशान स्पष्ट देखें। आंख भी क्षतिग्रस्त थी। दाहिने हाथ पर चोट का निषान,पेट पर खून लगा है। जयपुर से प्रकाषित समाचार पत्र महानगर टाइम्स में 12 मार्च, 2013 को प्रकाषित एक खबर में संदेह व्यक्त किया कि मेडीकल बोर्ड में शामिल सभी सदस्य उसी जाति है जिस जाति से खनन संचालक हैं।
  12. खान एवं भू विज्ञान विभाग, सीकर द्वारा जारी पचेरी कला में खनन पटटों की सूची से जांच दल को पता लगा कि गांव में कुल पांच खनन पटटे हैं। पचेरी कला के खसरा नम्बर 1272  के गैर मुमकिन पहाड़ में प्रत्येक लीज एक हेक्टेयर की है। एम॰एल॰न॰ 356/06 व 357/06 के पटटे  सुदेश अहलावत निवासी मनोहरपुरा, 358/06 व 359/06 श्रीमती कृष्णा अहतावत निवासी मोहनपुरा तथा 1021/09 रघुवीर सिंह निवासी मुरादपुर के नाम दर्ज हैं। परन्तु इन लीज पर अनिल व प्रदीप नाम के व्यक्तियों के निर्देशन में खनन होता है।
  13. सभी पांचों लीजों में से केवल 357 व 358 को ही डी जी एम एस अजमेर से ब्लास्टिंग अनुमति प्राप्त हैं। परन्तु सभी लीजधारक अन्धाधुंध ब्लास्टिंग करते रहे हैं। 20 दिसम्बर 2010 को ग्राम सभा ने ब्लास्टिंग के खिलाफ षिकायत भी दर्ज की। दयाराम शर्मा पुत्र श्री नागेष्वर ने लीज संख्या 1072 के संचालकों द्वारा बिना अनुमति के ब्लास्टिंग किये जाने की लोकायुक्त कार्यालय में षिकायत करते हुए इस लीज प्रस्ताव को निरस्त करने की मांग की थी। प्रदीप शर्मा, दयाराम शर्मा, सुरेष कुमार बोहरा, सुरेश कुमार योगी, रोषन लाल कुमावत, प्रेम कुमार टेलर, सत्यदेव सिंह व रोहितष्व प्रजापत ने अवैध खनन के इस मामले के खिलाफ हाई कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया।  जिसमें षिकायतकर्ता ग्रामवासियों को जीत हासिल हुई । 24 मई 2011 को उच्च न्यायालय की ओर से स्थगन आदेश हुए और हाई कोर्ट के अवकाष प्राप्त जज  के॰ एस॰ चौधरी के द्वारा मामले की जांच के आदेष भी हुए। स्थानीय प्रशासन की मिली भगत के रहते जांच के समय खनन को पहले से ही बंद रखा गया इसके बावजूद भी हाइकोर्ट के आदेश पर गठित जांच टीम को खनन कार्य में कई कानूनी खामियां नजर आईं।   
  14. 21 जनवरी 2011 को ब्लास्टिंग के कारण आंगन में काम कर रही एक वृद्ध महिला सावित्री के चेहरे पर पत्थर आकर गिरा। इस पर ग्रामीणों ने लीजधारकों के खिलाफ विरोध प्रदर्षन किया। नायब तहसीलदार अनिता धरवाल ने मौका मुआयना भी किया और लीजधारकों के खिलाफ मामला दर्ज करवाने का आष्वासन दिया लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई।
  15. जांच दल ने यह पाया कि सभी लीजधारक प्रदेश की राजनीति में ऊँचा ओहदा रखने वालों के सीधे तौर पर रिष्तेदार हैं या फिर उनके समर्थक हैं। जांच दल ने बुहाना में ऐसे पोस्टर लगे देखे जिनमें इन राजनेताओं के समर्थन में लीजधारकों के प्रबंधकों  के नाम अंकित थे। लीजधारक क्षेत्रीय नेताओं के चंदे की व्यवस्था करते रहे हैं। इनमें से एक लीजधारक जिले के समस्त लीजधारकों का नेता है।
  16. जांच दल को ग्रामीणों ने बताया कि लीजधारकों की शह पर प्रदीप शर्मा व अन्य साथियों को एस.सी - एस.टी के फर्जी केस में फसाने का प्रयास भी किया गया। लीज पर मजदूरी कर रहे धानक जाति के मजदूर सुभाष निवासी माधवगढ़ थाना सतनाली ने लीजधारक सुदेष अहलावत के कहने पर पुलिस में एस.सी -एस.टी के अन्तर्गत मामला दर्ज कराया। 5 जून 2011 को दर्ज इस मामले में 17500 रूपये की लूट की बात भी कही परन्तु बाद में यह केस झूठा साबित हुआ।
  17. 11 मई, 2012 को गांव में तीन गाडियों में सवार होकर हथियारबंद लोग आये थे जिन्होंने ग्रामीणों को अवैध खनन के खिलाफ षिकायत वापस लेने के लिए डराया-धमकाया और पिस्टल हवा में लहराये थे। जिस पर ग्रामीण ने प्रषासन के समक्ष षिकायत की थी। 
  18. लीजधारकों ने फोन पर यह जानकारी दी कि प्रदीप शर्मा आदतन शराबी और असमाजिक व्यक्ति था। इस तथ्य के बारे में जब जाँच दल ने ग्रामीणों से पूछताछ की तो सभी का यह कहना था कि इस परिवार में मांस-मदिरा को सेवन करना भी पाप समझते हैं। शराब पीना तो दूर किसी शराबी के पास बैठना भी पसन्द नहीं करते।
  19. जाँच दल को यह जानकारी हुई कि सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटेकर इस घटना से काफी आहत हुई और स्वयं इस गांव में अपने साथियों के साथ आईं थीं। प्रदीप की हत्या के बाद भी जारी अवैध खनन को ग्रामीणों के साथ मिलकर बन्द कराया था साथ ही मुख्य सचिव राजस्थान सरकार से इस मामले में उसी समय सीधे फोन पर शिकायत भी की।
  20. पी.यू.सी.एल. की राष्ट्रीय सचिव कविता श्रीवास्तव, सेवानिवृत्त अतरिक्त पुलिस अधीक्षक नटवर लाल, सेवानिवृत्त डी.जी.पी, जे पी मिश्रा व अनेक प्रतिष्ठित कानूनविद इस घटना को हत्या मानते हैं।
  21. इस घटना के विरोध में तथा हत्यारों को सजा दिलाने व अवैध खनन को तत्काल बन्द करने की मांग को लेकर तहसील बुहाना व सिंघाना को नागरिकों ने स्वेच्छा से बन्द रख सरकार के समक्ष विरोध प्रदर्षन किया। गांव पचेरों कला के ग्रामीण यहाँ तक कि महिलाऐं घटना के दिन से आज तक शान्ति पूर्ण धरना दे रही हैं। लोजपा के सुभाष खांदवा, अखिल भारतीय किसान महासभा के कार्यकर्ताओं द्वारा विरोध प्रदर्षन जारी है।
जांच दल के निष्कर्षः-
  1. जांच दल के सभी सदस्यों का मानना है कि प्रदीप शर्मा की हत्या हुई है।
  2. प्रदीप शर्मा व अन्य ग्रामीणों द्वारा अवैध खनन के खिलाफ संबंधित अधिकारियों से शिकायत करना, हाइकोर्ट से स्टे लाने जैसी तमाम कार्यवाहियां लीजधारकों व उनके प्रबंधकों को शक के दायरे में लाता है कि वे प्रदीप शर्मा की हत्या में शामिल हो। 
  3. क्षेत्रीय पुलिस द्वारा इस घटना को आत्महत्या घोषित करने का प्रयास, बिना अनुमति घर में ताला तोड़कर घुसना, हत्या के पांच दिनों बाद प्रदीप शर्मा के फोन की चालू हालत में पुलिस द्वारा बरामदगी उनकी हत्यारों से मिली भगत होने के संदेह को और पक्का करता है। हत्या के साक्ष्य मिटाने की कोशिष पुलिस कर्मियों के हत्यारों व उनके राजनैतिक संरक्षकों के दबाव में होने का प्रमाण है।
  4. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर चोट के निशान न होने का तथ्य मेडीकल टीम के हत्यारों के दबाव में होना दर्षाता है।
  5. बुहाना में लगे पोस्टरों से लीजधारकों के राजनैतिक पहुंच के लोगों से संबंध- रिष्तेदारी तय हैं। जिनके दबाव के रहते ही क्षेत्रीय पुलिस हत्यारों को बचाने का प्रयास कर रही है।
  6. डीजीएम एस अजमेर, हाईकोर्ट के आदेश पर गठित जांच टीम ने मांना कि पचेरी कलां की इन लीजों पर ब्लास्टिंग की अनुमति नहीं जा सकती।
  7. लीजधारकों की शह पर प्रदीप शर्मा को झूठे केस में फंसाने, गुंडों द्वारा गांव में आकर डराने-धमकाने की घटनाओं से जांच दल को उनके हत्या में शामिल होने का संदेह हैं।
जांच दल के सुझाव व मांगें : -
  1. क्षेत्रीय पुलिस एवं जांच एजेन्सियां राजनैतिक दबाब में हैं अतः सरकार इस घटना की सी॰बी॰आई॰ जैसी उच्च स्तरीय जांच एजेन्सी द्वारा जांच करायी जाये।
  2. इस घटना को हत्या का केस मानते हुए जांच की जाए। इस जांच में वर्णित तथ्य एवं साक्ष्य के आधार पर जांच दल समझते है कि इन तथ्यों को अनुसंधान में शामिल किया जाय।
  3. जैसा कि यह प्रकरण प्रदीप शर्मा से दुष्मनी का नहीं बल्कि अवैध खनन के खिलाफ संघर्षरत अन्य ग्रामीणों के जीवन की रक्षा से जुड़ा है। साथ ही लीजधारक व उनके प्रबंधक इस केस की पैरवी करने वालों को डरा-धमका सकते हैं या जान-माल को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसी तथ्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें तत्काल गिरफ्तार करते हुए उनके नाम जांच में शामिल किये जाये।
  4. लीजधारकों से संबंध या रिष्तेदारी रखने वाले राजनेताओं के नाम का खुलासा करने के लिए अनुसंधान किया जाय। संदेह के आधार पर क्षेत्रीय राजनेताओं के मोबाइल फोन की डिटेल का अनुसंधान किया जाना चाहिए।
  5. पचेरी कला में संचालित खनन अवैध एवं जनविरोधी है। इसीलिए इससे संबंधित सभी लीज प्रस्ताव तत्काल निरस्त किये जाये। 
जाँच दल में शामिल थे शशिकान्त, राजस्थान जन अधिकार मंच जयपुर, बजरंग लाल एडवोकेट, झुंन्झुनूं, वीरेन्द्र क्रांतिकारी, भारतीय गरीब जनान्दोलन, अलवर, ओमप्रकाश झारोडा, अ. भा. किसान महासभा, बुहाना और श्रीराम दूत, शेखावाटी किसान मंच, नवलगढ .


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