बर्बर पुलिसिया दमन के विरोध में उड़ीसा भवन पर दस्तक: छात्र-युवाओं ने किया प्रदर्शन

बर्बर पुलिसिया दमन के विरोध में उड़ीसा भवन पर प्रदर्शन दिल्ली के उड़ीसा भवन पर आज सामाजिक संगठनों, कार्यकर्त्ताओं और छात्र-नौजवानों ने जगतसिंहपुर में पोस्को कम्पनी का विरोध कर रहे ग्रामीणों पर चल रहे बर्बर पुलिसिया दमन और किसानों की जबरन भूमि कब्जाने की सरकारी नीति के विरोध में प्रदर्शन किया. उड़ीसा भवन के सामने ग्रामीणों को प्रताडित करने और आदिवासी भूमि पर जबरन कब्जा करने के खिलाफ नारे लगाए और उड़ीसा के अतिरिक्त स्थानिक आयुक्त (Assistant Resident Commissioner) ने भवन के मुख्या द्वार पर आकार प्रदर्शनारत युवाओं से ज्ञापन लिया, जिसे उनकी उपस्थिति में पढकर सबके सामने सुनाया गया. 

इस विरोध प्रदर्शन में संदीप ने कहा कि उड़ीसा पुलिस द्वारा 2 मार्च, शाम 6.30 बजे पास्को के किरायें के गुण्डों ने पटाना गांव में पास्को विरोधी कार्यकर्ताओं पर बम फेंके जिससें तीन कार्यकर्ताओं की मौत हो गई तथा अन्य कई कार्यर्ता गभीर रूप से घायल हो गयें, इनमें से एक कटक मेडिकल कॉंलेज मे अपना जीवन बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है। पास्को प्रंबधन तथा स्थानीय ठेकेदारों द्वारा रचा गया यह षडयंत्र , जिसें ओडिशा सरकार का आर्शीवाद भी प्राप्त था। इस का उद्देश्य पास्को प्रतिरोध संग्राम समिति के अध्यक्ष अभय साहू की हत्या करना तथा पास्को विरोधी संघर्ष को घिनौने असंवैघानिक तरीकों द्वारा अपराधिक तत्वों की मदद से इस आंदोलन का हिसंात्मक दमन करना तथा पास्को प्रतिरोध संग्राम समिति के उन कार्यकर्ताओं को धमका कर रास्तें से हटाना था जो पास्को विरोधी आंदोलन को मजबूत करने में लगें है। यहा ध्यान दिया जाना चाहिए कि कुछ साल पहले पास्को प्रंबधन के किरायें के गुण्डों ने पास्को विरोधी कार्यकर्ता श्री दुला मंडल पर जानलेवा हमला किया था, जिसमे वह मारे गयें थे। यह कारपोरेट सेक्टर के अपराधिक पतन के संकेत है कि कैसे जन विरोधी राज्य कारोबारियों के समर्थन मे उनका लालच पूरा करने के लिए किसी भी हद तक झुक सकता है। 

इसके बाद 7 मार्च  दोपहर को जब पोस्को प्रतिरोध संग्राम समिति के कार्यकर्ता जिला प्रशासन शासन को ज्ञापन देने जा रहे थे तो उन पर पुलिस की दस बटालियनों द्वारा बर्बर लाठी चार्ज किया गया जिसमें पचास से ज़्यादा लोगों के घायल होने की खबर है. इनमें दस से ज़्यादा गंभीर रूप से घायल है.

5 मार्च को पुलिस के 12 हथियाबंद दस्तों ने जिलाधीश तथा एस. पी. के नेतृत्व में गोविदपुर गांव में जबरदस्ती प्रवेश किया तथा पान बेलाओं के 25 खेतों को उजाड़ दिया जो कि स्थानीय लोगों की आजीविका का मुख्य साधन है। 
आसित दास, सुभाष गताड़े, ओमप्रकाश, सूरज, रश्मि आदि वक्तओं ने बर्बर पुलिसिया दमन का विरोध करते हुए मांग कि, की दोषी अधिकारियों के विरोध में कठोर कार्यवाही हो, गिरफ्तार किसानों को तत्काल रिहा किया जाय. साथ ही, किसानों की जबरन कब्जा कि जा रही ज़मीन पर रोक लगाई जाये.यहां यह भी उल्लेखनीय है कि उड़ीसा के गोविन्दपुर में विस्थापन के खिलाफ शुरू हुए प्रतिरोध आंदोलन में पोस्को प्रतिरोध संग्राम समिति के 6 सदस्यों सहित पोस्को स्टील प्लांट का विरोध कर रहे दो हज़ार ग्रामीणों पर पुलिस द्वारा 230 फर्जी मुकदमे दायर कर दिए गए हैं. वहीं सरकार ने पुलिस के बल पर आठ जनवरी से जबरन भूमि-अधिग्रहण के आदेश दे दिए हैं जबकि इस परियोजना के लिए जारी पर्यावरणीय मंजूरी 30 मार्च 2012 को ही निरस्त हो चुकी है और MoU का नवीनीकरण भी नहीं हुआ है. ऐसे में, 700 एकड़ वन-भूमि का जबरिया अधिग्रहण पूरी तरह गैर-कानूनी है.

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