कूडनकुलम: रिएक्टर चालू होने से पहले ही आशंका के घेरे में, सरकार अड़ी

तमिलनाडु के कूडनकुलम में रूस से आयातित परमाणु बिजलीघर की सुरक्षा प्लांट के शुरु होने से पहले ही आशंकाओं के घेरे में आ गयी है. अणु-ऊर्जा नियमन बोर्ड ने रिएक्टर की सुरक्षा जांच दुहराने के आदेश दिये हैं. यद्यपि रिएक्टर के सन्चालन के लिए जिम्मेवार कम्पनी परमाणु शक्ति कारपोरेशन के अधिकारी और परमाणु ऊर्जा विभाग से जुडे वैज्ञानिक यह दावा कर रहे हैं कि ऐसा कूडनकुलम बिजलीघर की सुरक्षा पूर्णतया सुनिश्चित करने के लिए किया गया है, कूडनकुलम में इस रिएक्टर परियोजना के खिलाफ़ आन्दोलनरत समूह पीपुल्स मूवमेंट अगेंस्ट न्यूक्लियर एनर्जी (पीमाने) ने आरोप लगाया है कि इस परियोजना की सुरक्षा सम्बंधी आशंकाएँ सही साबित हो रही हैं. 11 मार्च को फ़ुकुशिमा दुर्घटना की दूसरी बरसी के मौके पर परमाणु निरस्त्रीकरण और शांति गठबन्धन (सीएनडीपी) द्वारा दिल्ली में आयोजित कन्वेन्शन में विडियो-कान्फ़्रेंसिंग के जरिये बोलते हुए कूडनकुलम आन्दोलन के नेता एस. पी. उदयकुमार ने कहा कि उन्हें स्थानीय स्रोतों से रिएक्टर के अन्दर लीक होने, पिछ्ले तीन महीनों में चार कामगारों के मरने और प्लांट में गम्भीर तकनीकी गड़बड़ियाँ होने की पुख्ता खबर मिली है. 

ध्यान रहे कि इस रिएक्टर परियोजना के खिलाफ़ पिछले पचीस साल से स्थानीय लोग, जिनमें ज़्यादातर मछुआरे और् किसान हैं, आन्दोलन कर् रहे हैं. इस आन्दोलन में फ़ुकुशिमा दुर्घटना के बाद तेजी आई है. रिएक्टर की सुरक्षा और् इसके पर्यावरणीय प्रभावों के अलावा इस परियोजना से निकटवर्त्ती गाँवों के लोगों की जीविका के संकट ने लोगों को आन्दोलन के लिए उद्वेलित किया. अनेक स्वतन्त्र वैज्ञानिकों और पर्यावरण विशेषज्ञों ने भी इस परियोजना के खतरों से लोगों को आगाह किया है. इस आन्दोलन में एक तरफ़ जहाँ हज़ारों कॆ संख्या में आम मछुआरों, महिलाओं और बच्चों ने भाग लिया है, वहीं दूसरी ओर सरकार ने इस जनांदोलन को कुचलने के लिए निर्मम दमन का सहारा लिया है. गत सितम्बर में रिएक्टर में ईंधन भरे जाने की घोषणा के बाद हुए आन्दोलन में दर्जनों महिलाओं सहित सैकड़ों लोग गिरफ़्तार हुए, आँसू गैस और डंडे बरसाए गए और दो लोगों कॆ मौत हो गई वहीं लगभग दस हज़ार लोगों पर देशद्रोह और भारतीय राज्य के खिलाफ़ युद्ध छेड़ने के मुकदमे दायर किए गए हैं.


ताजा घटनाक्रम में कूडनकुलम में सरकार ने दो और रिएक्टरों के लिए मंजूरी दे दी है, जबकि मौजूदा दौर के दो रिएक्टर जो उत्पादन शुरु करने के लिए लगभग तैयार हैं, उन्हीं के सन्दर्भ में पर्यावरणीय मंजूरी ना होने और खतरों की लापरवाही जैसे तथ्य सामने आए हैं.



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