जल, जगल, जमीन, खनिज की लूट के विरोध में झारखण्ड में जनअभियान तेज

पूरी दुनिया में प्राकृतिक संसाधनों की लूट मची हुई है। नदी - झरना, खेत-खान, जंगल-पहाड़, सागर-आकाश, हवा-रोशनी सभी पर पूंजीपति कब्जा करतें जा रहे है। किसानों, मजदूरों तथा अन्य सभी मेंहनतकाशों के भोजन, वस्त्र, आवास, शिक्षा, स्वास्थ, पहचान, रोजगार, आत्मसम्मान पर अभूपूर्व हमला हो रहा है। जो अंचल जितना ज्यादा संसाधनों से भरा - पूरा है, वहां उतना ही बड़ा हमला है। जों समाज, जों जमात जितना ज्यादा आत्मनिर्भर है, वहां उतना ही ज्यादा तेंज हमला है। पूंजी और सत्ता की अमिट प्यास के लिए जिन्दगियों की बलि चढ़ायी जा रही है। 

झारखण्ड जनअभियान यात्रा
जल, जगल, जमीन, खनिज की लूट के विरोध में 10 मार्च से 16 मार्च तक जनअभियान यात्रा

17 मार्च, 2013 को एकदिवसीय कन्वेशन
कामिल बुल्के सभागार - सत्यभारती
(पुरूलिया रोड ) रांची, झारखण्ड
संपर्क: कुमार चंद मार्डी- 09934165214
हमारें अपनें भरें- पूरें, हरें- भरें झारखंड में भी काफी तीखा हमला हो रहा है। हम सब इस हमलें के शिकार है। किन्तु मेहनतकश मन तों कभी हार नही मानता। हिम्मत की आखिरी सांस तक जुझता है। विनाश और मौत के बीच भी जिन्दगी धड़कती ही जाती है। यही जिजीविया संघर्ष के रूप् में झारखंड में गूज रही है। जगल- जगह लड़ाइयों है। कही लोंग जंगल बचाने के लिए लड़ रहें हैं। कही लोग जबरन घुस रहें कारखानों को रोक रहे है, अपनें खेत बचा रहें है। कही लोग हुए विस्थापन की वाजिब भरपाई मांग रहें हैं।

अपनी जमीन पर खड़े परियोजनाओं पर अपना दावा ठोक रहें है। कहीं लोग अपने गांव - समाज की जमीन में मौजूद खनिज पर अपना अधिकार जता रहें है। वें सरकार को चुनौति देतें हुए, उसका ही गणित उसे समझा रहें है- ‘अपनी रॉयल्टी हम से लो, हमारे खान हमारे हाथ करों, पूंजीपतियों को खनन से बाहर करों’। लोग सीएनटी एक्ट, एसपीटी एक्ट जैसे सहीं कानूनों में छेड़छाड़ के खिलाफ गुस्सा जाहिर कर रहें है। गांव के हाथ से गैरमजरूआ जमीन छीननें की नौकरशाही की साजिशों कों पूरी ताकत से रोक रहे है।
 
ग्राम सभा की स्वायत्तता, गांव समाज की निर्णयकता की अलख जगा रहें है। तमाम एमओयू को रद्द करने की मांग कर रहें है। यें सारी लड़ाइयां पूरें न्यायबोंध और अन्याय पर भी यें पुख्ता प्रश्न खड़े कर रही है। लोग झांरखड को हासिल विशेंष सवैधानिक- वैधानिक प्रावधनों को पूरा का पूरा बहाल करने की मांग कर रहें है। ऐसी ही और भी अनेक लड़ाइयां है। किन्तु सरकार बदलना-सुधरना नही चाहती, जनाकांक्षा कों समझना-मानना नही चाहती। अपने लूटपरस्त- अमीरपरस्त इरादों को हर हाल में पूरा करना चाहती है। वक्त गवाह है कि चुनावी राजनीति की कमोंबेशी सारी मौजूदा ताकतें शासन में आने पर पूंजीपतियों की दलाली और जनता से दूश्मनी की राह ही चलती है। इस हालात में हमें संघर्षों को ज्यादा एकजुंट, ज्यादा मजबूत करनें की जरूरत है। हमें मौजूदा विकास नीति के मुकाबलें वैकल्पिक जनपक्षीय नवनिर्माण की चेतना फैलानी है।

अपने संघर्षों की स्थानीयता और स्वायत्तता रखते हुए भी अन्य संघर्षों से अतंरंग एकजुटता कों समझतें हुए, बढातें हुए एक वैकल्पिक व्यापक राजनैतिक समझ और ताकत बनानी है। तभी आगें चलकर मौजूदा जनविरोधी राजनीति को बेदखल किया जा सकेगा। तभी सचें अर्थ में झारखंड का नवनिर्माण संभव होगा। विशेष अभियान के तहत लड़ाई के अलग-अलग इलाकों से, अपनें खास मुद्दों और नारों पर, अपनी तय तारीख से यात्राओं की शुरूआत हो रही है। सचेंत जननेताओं, कर्मठ कार्यकत्ताओं, सच्चें संघर्षशीलों के जत्थें जनचेतना जगातें अपनी - अपनी राहों पर आगें बढ़ते जायंगें। 

17 मार्च, 2013 को सभी बिरसा स्मारक पर जुटेगें और उसके बाद अपनी भावी संघर्ष यात्रा का खाका मिल- जुलकर गढ़ेगें। पूजीं पर श्रम की, शासन पर जन की, विकास पर जीवन की निर्णयकता स्थापित करना ही हम सबका अभीष्ट है। अपनी सामूहिकता से हमें स्वतंत्रता, समता... आदि सकारात्मक मूल्यों कों सशक्त बनातें जाना है। संघर्षों के इस अभियान कों, संघर्षशीलों की इस यात्रा कों समर्थन- सहयोग दे। 17 मार्च, 2013 के कन्वेशन में आप आमंत्रित हैं, अवश्य आयें। 
-विस्थापन विरोंधी नवनिमार्ण मोंर्चां झारखखंड
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