दिल्ली - मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर

दिल्ली मुबंई औद्योगिक गलियारा प्रोजेक्ट भारत की सबसे बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में से एक है। यह प्रोजेक्ट भारत और जापान सरकार के संयुक्त प्रयास से बन रहा है। इस कॉरिडोर को बनाने के पीछे सरकार का मुख्य उद्देश्य निवेश और व्यापार को बढ़ाना है। इसके पहले फेस पर तकरीबन 100 अरब डॉलर का खर्च आने का अनुमान लगाया जा रहा है। जिसके लिए लिए सरकार डीएफसी यानी डेडिकेटिड फ्रेट क़रिडोर का भी निर्माण कर रही है यह एक 1483 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर देश की राजधानी दिल्ली को देश की औद्योगिक राजधानी मुंबई से जोड़ेगी। जिसमें मल्टी मॉडल हाई एक्सल लोड डेडिकेटि़ड फ्रेट कॉरिडोर का निर्माण किया जाएगा। यह कॉरिड़ोर देश के छह राज्यों से होकर गुजरेगा जिसकी शुरुआत यूपी के दादरी से होगी जो मुंबई के जवाहर लाल नेहरु पोर्ट पर खत्म होगा।
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सरकार और निजी उद्यमियों को मिलाकर विशेष इकाई दिल्ली मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (डीएमआईसीडीसी) का गठन किया गया है, जो 6 राज्यों में जमीन के अधिग्रहण की कोशिश करेगी। ये 7 विनिर्माण केंद्र उत्तर प्रदेश के दादरी-नोएडा-गाजियाबाद, हरियाणा के मानेसर-बावल, राजस्थान के खुशखेड़ा-भिवाड़ी-नीमराणा, गुजरात के अहमदाबाद-धोलेरा, मध्य प्रदेश के पीथमपुर-धार-महू और महाराष्ट्र के दिघी पोर्ट और शेंद्रा में विकसित किए जाने हैं। कॉरिडोर का 77% हिस्सा गुजरात (38%) और राजस्थान (39%) से होकर गुजरेगा जबकि महाराष्ट्र और हरियाणा से 10%-10%, जबकि उत्तर प्रदेश और दिल्ली का 1.5% -1.5% योगदान इस पूरे प्रोजेक्ट में होगा।

दिल्ली मुंबई इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट के साथ 9 बड़े मेगा इंडस्ट्रियल जोन बनाने की तैयारी चल रही हैं जो 200-250 किलोमीटर के क्षेत्र में फैला होगा। इसके अलावा हाई स्पीड फ्रेट कॉरिडोर, छह एयरपोर्ट, छह लेन एक्सप्रेस वे इस कॉरिडोर से जुड़े होंगे साथ ही सरकार इस प्रोजक्ट के साथ कई इंडस्ट्रीयल हब, फैक्ट्रियां और कारखाने विकसित करने की योजना पर काम करेगी जिससे ज्यादा से ज्यादा निवेश भारत की ओर आकर्षित किया जा सके। इस कॉरिडोर के बीच में 9 जंक्शन बनाए जाएंगे जो देश के दूसरे राज्यों तक सड़क मार्ग से माल ढुलाई का काम करेंगे। आपको बता दें कि इस कॉरिडोर के बनने से पांच सालो में रोजगार दोगुना, औद्योगिक उत्पादन तिगुना और एक्पोर्ट को चार गुना करने का लक्ष्य सरकार ने तय किया है।

इस कॉरिडोर के बनने से देश के बड़े औद्योगिक शहर गाजियाबाद, नोएडा, फरिदाबाद, जयपुर, अहमदाबाद, वड़ोदरा, सूरत, वालसाड, वापी, नासिक, थाने और पुणे जैसे शहर तो सीधे जुड़ ही जाएंगे मुंबई और दिल्ली के बीच की माल ढुलाई भी आसान हो जाएगी।

डीएमआईडीसी के अंतर्गत कॉरिडोर ही नहीं बल्कि 7 नए शहर भी बसाए जायेगे । दिल्ली से लेकर मुंबई तक एक इंडस्ट्रीयल लेन होगी जो डेडिकेटिड फ्रेट कॉरिडोर के जरिए जुड़ी होगी। इसके आसपास 7 नए इंडस्ट्रीयल शहर विकसित किये जायेगें।

1483 किलोमीटर लंबाई वाले दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारे के लिए आवंटित बिजली परियोजनाओं में से 2-2 महाराष्ट्र और गुजरात में तथा 1-1 मध्य प्रदेश और राजस्थान में लगाए जाने हैं। इस संबंध में महाराष्ट्र के 2 और मध्य प्रदेश की एक परियोजना के लिए पर्यावरण विभाग द्वारा पहले चरण के लिए हरी झंडी भी मिल गई है।

इसके पहले फेस पर काम शुरु हो चुका है जिसमें गुजरात के धोलेरा में एक बड़ा इंडस्ट्रियल पार्क, गांधीनगर-अहमदाबाद-धोलेरा स्थानीय मैट्रो रेल लिंक, इंदौर एयरपोर्ट और पीथमपुर को जोड़ने के लिए एक स्पेशल लिंक रोड़, मध्यप्रदेश के उज्जैन में नॉलेज पार्क सिटी, हरियाणा के मानेसर में मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक हब, राजस्थान के भिवाडी में मल्टी लॉजिस्टिक हब आदि शामिल हैं इसके लिए डीएमआईसीडीसी टेंडर जारी कर चुकी है इस 100 अरब डॉलर खर्च होने हैं इसमें 10 अरब डॉलर जापानी कंपनियां खर्च करेंगी जबकि बाकी 90 अरब डॉलर के निवेश का सरकार ने खुलासा नहीं किया है।

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