ओम्कारेश्वर बांध विरोधी आंदोलन निर्णायक दौर में

गुजरी 25  फरवरी को ओम्कारेश्वर बांध प्रभावितों ने ओम्कारेश्वर शहर में विशाल रैली निकली. रैली में शामिल लगभग 5000 प्रभावितों ने संकल्प लिया की वो सत्य, अहिंसा, त्याग और बलिदान के संघर्ष के द्वारा अपने अधिकार लेके रहेंगे. प्रभावितों ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि कल होने वाली मंत्रियों की बैठक में प्रभावितों के पुनर्वास के बारे में ठोस निर्णय नहीं लिए गए तो विस्थापित राजधानी भोपाल में और नर्मदा घटी में कड़े संघर्ष पर उतरेगें. 

उल्लेखनीय है कि ओम्कारेश्वर बांध में हुए 17 दिन के जल सत्याग्रह के बाद गत 10 सितम्बर, 2012 को राज्य सरकार ने ओम्कारेश्वर बांध प्रभावितों के पुनर्वास के सम्बन्ध में घोषणा की थी कि प्रभावितों को जमीनके बदले जमीन दी जाएगी. इसके साथ ही आपकी मंत्रियों की एक समिति का गठन कर पुनर्वास की सभी समस्याओं का निवारण करने का भी निर्णय लिया गया था. समीति की पहली बैठक 13 सितम्बर, 2012 को दूसरी बैठक 27 सितम्बर, 2012 ओम्कारेश्वर में हुई इन बैठकों में विस्थापितों द्वारा पुनर्वास के सम्बन्ध में अपनी शिकायतें विस्तृत रूप से बताई गयीं. विस्थापितों द्वारा समीति के समक्ष पुनर्वास से सम्बंधित 7000 से अधिक शिकायतें दर्ज की गयी हैं. यह आज 5 माह बाद भी विस्थापितों के पुनर्वास के विषय में कोई ठोस करवाई नहीं हुई और कल 26 फरवरी को समिति पुनः बैठक कर रही है.

ओम्कारेश्वर में निकली विशाल रैली और लिया संकल्प:

आज लगभग 5000 महिला पुरुषों ने ओम्कारेश्वर में रैली निकालकर पुरे शहर को उनके अधिकारों के नारों से गूंजा दिया. रैली निकालकर प्रभावित नागर घाट पर पहुंचे और वहां नर्मदाजी के जल में खड़े होकर संकल्प लिया कि चाहे उन्हें बलिदान ही क्यों न देना पड़े वो अपने अधिकार लेकर रहेंगे. नागर हगात पर ही एक आम सभा का भी आयोजन किया गया और सभा के बाद अनुविभागीय अधिकारी को मंत्रियों की समिति के नाम ज्ञापन दिया गया.
सभा को संबोधित करते हुए नर्मदा आन्दोलन की वरिष्ठ कार्यकर्ता सुश्री चित्तरूपा पालित ने कहा कि गत जल सत्याग्रह की जीत सत्य और संकल्प की जीत थी. अब यदि सरकार हमें हमारे अधिकार नहीं देती है तो आगे और कड़े संकल्प के साथ संघर्ष करना होगा. जरूरत हुई तो हम प्रदेश की सभी जेल भर देंगे पर हम अपने अधिकार लेके रहेंगे.
आन्दोलन के प्रमुख कार्यकर्ता श्री आलोक अग्रवाल ने कहा कि प्रभावित सिर्फ अपने वाजिब अधिकार मांग रहा है. सरकार इन अधिकारों को न देकर प्रभावितों को सिर्फ परास्त करना चाहती है. पर पिछले सालों में हमने अपने संघर्ष अनेक जीते हासिल की है और आगे भी विस्थापितों की ही जीत होगी. यदि सरकार अधिकार नहीं देती है तो इस बरसात में पूरी नर्मदा घाटी में जल सत्याग्रह होगा.

सभा को कलाबाई, सरपंच ग्राम घोगलगाव, सकुबाई, ग्राम कामनखेडा, नर्मदाबाई, ग्राम एखंड आदि ने संबोधित करते हुए मांग की कि उनके सभी पुनर्वास के अधिकार तत्काल दिए जाये. उन्होंने मांग की कि 
माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार या तो प्रभावितों को सिंचित एवं उपजाऊ निजी जमीन खरीदकर दी जाये या जमीन खरीदने हेतु वर्तमान बाजार दर पर पुनर्वास निति की कण्डिका 5.4 के अनुसार अनुदान दिया जाये एवं एक उच्च स्तरीय समिति का गठन कर यह सुनिश्चित किया जाय कि विस्थापित उक्त राशि से पात्रतानुसार उपयुक्त जमीन खरीद ले.
भूमिहीन प्रभावितों को जीविका चलाने न्यूनतम 2.5 लाख रूपये का अनुदान दिया जाये.
 ओम्कारेश्वर परियोजना की डूब में आ रहे देवास जिले के 5 गाँव धाराजी, कोथमीर, नरसिंगपुर, नयापुरा एवं गुवाड़ी की जमीनों का अधिग्रहण किया जाये और प्रभावित होने वाले सभी आदिवासी परिवारों का पुनर्वास किया जाये.
प्रभावितों द्वारा राज्य सरकार द्वारा बनाई गई मंत्रियों की समिति के समक्ष प्रस्तुत पुनर्वास से सम्बंधित जमा 7000 आवेदनों का निराकरण प्रभावितों की सुनवाई कर किया जाये.
इंदिरा सागर परियोजना प्रभावितों के सभी पुनर्वास के अधिकार दिए जाये.

सभा को ओम्कारेश्वर के श्री प्रदीप, महेश्वर बांध प्रभावित श्री राधेश्याम पाटीदार, श्री भगवान बिरले, श्री अंतरसिंह आदि ने भी संबोधित किया.

सभा के अंत में अनुविभागीय अदिकारी श्री चौधरी को पुनर्वास सम्बन्धी मागों का ज्ञापन सौंपा गया एवं चेतावनी दी गयी कि यदि कल की बैठक में इन मांगों को स्वीकार नहीं किया गया तो विस्थापित शीघ्र ही संघर्ष पर उतरेंगे.
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