एक बूँद पानी भी अभिजीत ग्रुप के प्लांट को नहीं देंगे: किसानों का ऐलान

बिहार के बाँका जिले में चन्दन नदी पर लक्ष्मीपुर (बौंसी प्रखण्ड) में केवल सिंचाई कार्य के लिए करीब 40 वर्ष पूर्व चन्दन बाँध का निर्माण किया गया था. बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग के पत्रांक 885 दिनांक 23.06.2011 अभिजीत ग्रुप (ताप विद्युत गृह) को दिये जाने का लाभान्वित किसानों द्वारा जवर्दस्त विरोध किया जा रहा हैं। 'चन्दन डैम बचाओ संघर्ष मोर्चो' के बैनर तले आंदोलन जारी है। गुजरी 2 जनवरी 2013 को जन आन्दोलनों का राष्ट्रीय समन्वय (एनएपीएम) द्वारा एक जन सुनवाई का आयोजन किया गया. डा. संदीप पाण्डेय, बिहार के जाने माने पर्यावरण विद एवं जल विशेषज्ञ श्री रणजीव कुमार, जल संसाधन विभाग बिहार के ही सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता ई0 विनय शर्मा, प्रसार भारती; दूरदर्शन के संवाददाता पं0 नन्द कुमार तथा सामाजिक कार्यकर्त्ता श्री महेन्द्र यादव की पाँच सदस्यी जूरी के सामने 48 किसानों ने अपनी बातों को रखते हुए एक स्वर में कहा कि अभिजीत ग्रुप के थर्मल प्लांट को एक बूंद पानी कि भी नहीं दीजाएगी. पेश है एनएपीएम की यह रिपोर्ट;
चन्दन बाँध

1968 में बिहार सरकार ने इस क्षेत्र में पड़नेवाले शर्तिया-सुखाड़ से किसानों को निजात दिलाने के लिए चंदन नदी सिंचाई परियोजना का निर्माण करवाया था। इस परियोजना से बांका, भागलपुर और गोड्डा (झारखंड) जिलों के किसानों को सुखाड़ से राहत मिली। पर, इस सिंचाई परियोजना का पानी अभिजीत ग्रुप द्वारा स्थापित किये जा रहे थर्मल बिजली संयंत्र को दिये जाने पर स्थानीय किसानों में भारी रोष है। किसान चंदन नदी और सिंचाई परियोजना के पानी पर अपना पहला हक मानते हैं। पिछले तीन-चार दशकांे के दौरान मरम्मत आदि के अभाव में इस परियोजना की सिंचन क्षमता में काफी ह्यस हुआ है। इस कारण किसान किसी भी कीमत पर चंदन परियोजना का पानी बिजली संयंत्र को देने का प्रबल विरोध कर रहे हैं।
बिजली संयंत्र को पानी उपलब्ध करवाने के लिए कम्पनी द्वारा जलाशय क्षेत्र में इनटेक वेल के निर्माण एवं स्पीलवे ऊँचा करने जैसे सरीखे कार्य करने के कारण किसान आशंकित हैं कि सिंचाई का सारा पानी कम्पनी ले लेगी, डूब क्षेत्र बढ़ेगा, जलाशय के बाहरी इलाका में कृत्रिम बाढ़ का खतरा उत्पन्न होगा और पूरे नदी घाटी क्षेत्र में भूमिगत जल का संकट गहरायेगा। सच के करीब दिखती किसानों की इन आंशकाओं के कारण विविध पारस्थितिकी वाले इस क्षेत्र में पारस्थितिकी असंतुलन के साथ-साथ इस क्षेत्र की खाद्य सुरक्षा भी खतरे में पड़ जायेगी। इस इलाका में भूमि बंजरीकरण का खतरा भी बढ़ जायेगा।
अभिजीत ग्रुप द्वारा स्थापित किये जा रहे ताप विद्युत गृह को चन्दन डैम का पानी देने से एक ओर जहां बिहार के बाँका एवं भागलपुर तथा झारखण्ड के गोड्डा जिले के लगभग 16000 हेक्टेयर उपजाऊ सिचिंत जमीन के बजंर हो जाने की प्रबल सम्भावना है वहीं दूसरी ओर ताप विद्युत संयंत्र स्थापित करने के लिए कुख्यात बाहुबालियों के सहयोग से गरीब-गुरबा, कमजोर वर्ग के किसानों की जमीन औने-पौने दाम पर कम्पनी जबरदस्ती और जालसाजी कर कब्जा कर लेने की जानकारी होने पर एक जनाक्रोश आम तौर पर उत्पन्न हो रहा है।

इस जनाक्रोश की भावना को समझने, उसके वास्तविक कारण को जानने तथा उसके जनपक्षी समाधान के लिए सुझाव/मांगपत्र बिहार सरकार के समक्ष प्रस्तुत करने के लक्ष्य को ध्यान में रखकर बौसी-लक्ष्मीपुर पथ में स्थित मनियारपुर मैदान में मोर्चा द्वारा दिनांक 02 जनवरी 2013 को एक जन सुनवाई कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह सुनवाई मैगसेसे पुरस्कार विजेता सामाजिक कार्यकत्ता डा. संदीप पाण्डेय, बिहार के जाने माने पर्यावरण विद एवं जल विशेषज्ञ श्री रणजीव कुमार, जल संसाधन विभाग बिहार के ही सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता ई0 विनय शर्मा, प्रसार भारती; दूरदर्शन के संवाददाता पं0 नन्द कुमार तथा सामाजिक कार्यकर्त्ता श्री महेन्द्र यादव की पाँच सदस्यी जूरी द्वारा की गयी।

इस जनसुनवाई के आयोजनकर्त्ताओं द्वारा बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग, भू एवं राजस्व विभाग, वन एवं पर्यावरण विभाग, उद्योग विभाग तथा ऊर्जा विभाग के माननीय मन्त्राीगणों के साथ-साथ अभिजीत ग्रुप के स्थानीय प्रबन्धक को भी अपना-अपना पक्ष रखने के लिए आमन्त्रित किया गया था। जनसुवाई कार्यक्रम को निर्विधन सम्पन्न करने के लिए एवं विधि-व्यवस्था बनाये रखने हेतू जिला प्रशासन बाँका व पुलिस प्रशासन बाँका को भी अग्रिम सूचना दे दी गयी थी।

जनसुवाई की कार्यवाही में साक्षियों द्वारा दिया गया बयान निम्न है:-

साक्षी सं. 1
मो. सोहराब बल्द मरहूम मो. मुस्लिम ग्राम सिगारपुर, थाना- बाँका, मो.-8051869876, वर्तमान सरपंच ने बयान किया कि चन्दन डैम का पानी ताप विद्युत गृह के लिए कपअमतज कर देने से बिहार के बाँका जिले के बाँका, बाराहाट, बौसी, रजौन, धैरेया, पुफल्लीडूमर, अमरपुर, शाहकुण्ड, शम्भूगंज एवं कटोरिया 10 प्रखण्डो, भागलपुर जिले के जगदीशपुर एवं गौराडीह प्रखण्डों तथा झारखण्ड के गोड्डा जिला के गोड्डा प्रखण्ड के किसान बुरी तरह से प्रभावित होंगे। मेरे पास 12 एकड़ जमीन है और मेरा परिवार इसी जमीन पर आश्रित है। बिहार सरकार से मेरी मांग है कि चन्दन डैम का पानी कम्पनी को नहीं बेचे।

साक्षी सं. 2
श्री नवल किशोर चौधरी वल्द स्व. गजाधर प्रसाद चौधरी, ग्राम- भरथू, थाना- अमरपुर, जिला- बाँका, मो0- 9955619180 ने बयान किया कि चन्दन डैम का पानी थर्मल को देने से इनकी खरीफ एवं रब्बी दोनों फसलें खत्म हो जायेगी।

साक्षी सं. 3
श्री नारायण शर्मा ‘सलिल’ वल्द श्री देवनारायण शर्मा, ग्राम- झीखनपुर, थाना- अमरपुर, जिला- बाँका, मो.- 9973398308 ने बयान किया कि फिलहाल वह विशुनपुर पैक्स के अध्यक्ष हैं। चन्दन डैम की स्थापना केवल सिंचाई करने के उद्देश्य से ही हुई थी वर्तमान में वह अपने सिंचाई उद्देश्यों के पूर्ति करने में पूरी तरह सफल नहीं है। अमरपुर प्रखण्ड के गोबिन्दपुर, राजापुर, बड़ियन, खन्जरपुर, लगड़ियाडीह, जानकीपुर, सतगढ़ा, कुसमाहा, लोंगाइन, चिरैया, विश्वासपुर, मनसरवपुर, आदि पंचायतों में तथा भागलपुर के अम्बा प्रखण्ड में केवल खरीफ मौसम में पानी दे पाता है। रब्बी के लिए पानी देने का प्रश्न ही नहीं उठता है। डैम का पानी थर्मल को देने से जिस खेत में पानी आ रहा है उसमें भी पानी नहीं आ पायेगा। डैम का एक बूंद पानी भी थर्मल के पक्ष में देने में मैं नहीं हूँ।

साक्षी सं. 4
श्रीमती आशा देवी कुशवाहा, पति- मृत्युन्जय कापरी, ग्राम- बन्नीकेतन, थाना- अमरपुर, जिला- बाँका, मो.-943143004 ने बयान किया कि वर्तमान में वह अपने पंचायत की मुखिया है एवं खुद 50 बीघे की किसान है। उनके आस-पास के करीब 10 गाँवों का पटवन इसी चन्दन डैम के नहर से होता है। पानी नहीं जाने पर बोरिंग भी फेल हो जाता है। पोखर, कुँआ में भी इसी नहर का पानी जाता है।

साक्षी सं. 5
श्री सकलदेव सिंह, वल्द स्व. बटेशर प्रसाद सिंह, ग्राम- बैजूडीह, पो.- सुल्तानपुर, थाना- अमरपुर, जिला- बाँका, मो.-8521514143 ने बयान किया कि हमलोग किसान हैं। तकनीकी भाषा नहीं जानते हैं। वर्तमान में जिस रूप में पानी बह रहा है तब भी पीने के पानी की किल्लत है बोरिंग फेल है, डैम के बनने के पहले वाले मैनफेस्टो को बरकरार रखा जाय।

साक्षी सं. 6
श्री निरंजन चौधरी, वल्द श्री रामाशीष चौधरी, ग्राम/पो.- गोरगांवा, थाना- अमरपुर, जिला- बांका, मो.- 9955619180 ने बयान किया कि वह भी कमाण्ड एरिया में आते हैं किन्तु आजतक उनके खेतों में पानी कभी गया ही नहीं। वह टेलएण्ड में है। फिर भी पटवन उसूला जाता है। वर्तमान में वह जिला पार्षद् है। उनकी मांग है कि चन्दन डैम का पानी कभी नहीं दिया जाय।

साक्षी सं. 7
श्री शिव प्रसाद मण्डल, वल्द -श्री पीताम्बर प्रसाद मण्डल, ग्राम- फतेहपुर, थाना- अमरपुर, जिला- बांका, मो.-9931220424 ने बयान किया कि डैम पूर्व में बना है सिचाई इसी डैम से होता था और होता है। जेठौर नहर से पटवन होता है। अभिजीत ग्रुप की थर्मल के लिए पानी देना घोर अन्याय है। इससे हम भूखे मर जायेंगे। सरकार हमलोग है। हम चुनते हैं।

साक्षी सं. 8
श्री पोखन दास, वल्द -श्री दरबारी दास ग्राम- कुल्हड़िया, थाना- अमरपुर, जिला-बांका ने बयान किया कि डैम का पानी राजापुर, नारायणपुर, कुंसघना, वादेवपुर होते हुए भागलपुर के पास चम्पा नाला में मिलता है। इससे 22 मौजों का पटवन होता है। चम्पा नाला तक पहुंचते-पहुंचते पानी खत्म हो जाता है। जिससे धान मर जाता है। बोरिंग सूख जाता है। डैम का पानी देने से और भी सुखाड़ होगा जिससे हम महादलित लोग पंजाब आदि जगह जीविका के लिए पलायन करते हैं। जब हमारा ही पेट नहीं भरता तो दूसरे को पानी क्यों देंगे? इन्होंने बताया कि मोबाइल न. याद नहीं है।

साक्षी सं. 9
श्री जीवन कुमार चौधरी, वल्द स्व. उग्रमोहन प्रसाद चौधरी, ग्राम/पो.- पवई, थाना- अमरपुर, जिला- बांका, मो.-8084660049 ने बयान किया कि माननीय सिचाई मन्त्री ने जो कहा है कि स्पीलवे के उपर का पानी दे रहा हूँ तो शायद एकआध बार ही स्पीलवे से पानी बहा है। मेरी पंचायत डैम की अन्तिम पंचायत है। जब कमाण्ड क्षेत्र को खरीफ का पानी नहीं दे पाते हैं तो थर्मल के लिए देना कैसे सही होगा? मेरी मांग है कि डैम का पानी केवल सिंचाई मद में उपयोग हो इसका व्यवसायिक उपयोग नहीं हो।

साक्षी सं. 10
श्री मदन मोहन महतो, वल्द -स्व0 रामलगन महतो, ग्राम- बेलहू, थाना- शाहकुण्ड, जिला- भागलपुर, मो.-9934045531 ने बयान किया कि- लक्ष्मीपुर डैम सिंचाई उद्देश्य से ही बनाया गया। पानी ही किसान का आधार है। इससे ही रक्त बनता है पानी के लिए हम जान न्यौझावर कर देंगे। हमारे यहां अभी पानी खूब जाता है।

साक्षी सं. 11
श्री कन्हाई सिंह, वल्द स्व. जगदीश सिंह, ग्राम पंचायत-जगरिया, प्रखण्ड- शाहकुण्ड, जिला- भागलपुर ने बयान किया कि वह अपने पंचायत के मुखिया है। इस डैम से 19 पंचायतों का पटवन होता है। पानी के लिए हम लड़ाई लड़ेगे।

साक्षी सं. 12
श्री साधे यादव, वल्द- स्व0 छेदी यादव, ग्राम- किशुनपुर, थाना- शाहकुण्ड, जिला-भागलपुर, मो.-9835061169 ने बयान किया कि इस वर्ष पानी कम पड़ा। डैम से पानी कम गया। पांच पंचायतों में 60 प्रतिशत रोपाई नहीं हुआ। बड़ी मुश्किल से 40 प्रतिशत धान ही बच सका।

साक्षी सं. 13
श्री हरिकिशोर यादव, वल्द- स्व. श्री कमलेश्वरी प्रसाद यादव, ग्राम- वारसावाद, थाना- शम्भूगंज, जिला- बांका, मो.-8002842238 ने बयान किया कि डैम के अन्तिम छोर पर दो पंचायतों वारसावाद और कामतपुर की डैम से सिंचाई होती है। डैम का पानी सावन, भादो महीने में अति वृष्टि होने पर ही ओभरफ्रलो करता है। जब डैम में पानी ही नहीं है तो मन्त्री महोदय ने थर्मल के लिए पानी देने के लिए क्यों कहा? मुझे हंसी आती है। डैम का पानी हम नहीं देगें।

साक्षी सं. 14
श्री दुर्गा चौधरी, वल्द-श्री कंगारी चौधरी, ग्राम/पो.- गोखुला, प्रखण्ड - बौंसी, जिला- बांका, मो.-9570585838 ने बयान किया कि मेरे पंचायत के उतरी छोर पर पर नहर एवं बीअर है, इसी से पानी गोड्डा जिले तक जाता है। नहर का रख-रखाव व मरम्मतीकरण नहीं होने से कैरी, ध्रमपुर, शामपुर, श्याम बाजार आदि क्षेत्र 10 वर्षों पानी विहीन से है। 1995 में बाढ़ आयी थी, उसी समय सुखनिया बीअर नष्ट हो गया, 1995 के बाद आज तक मात्र एक दो बार ही स्पीलवे से पानी निकला होगा। कमाण्ड एरिया में सिलटेशन बढ़ने की वजह से भी किसानों को पानी नहीं मिलता है। ‘पानी को अगर बाज के हाथ में दे दिया जायेगा तो कहां कबुतर जाएगा’? बन्धुआ कुर्रा, जहाँ प्लांट बन रहा है वहाँ अभी से चापाकल एवं कुँआ का पानी सूख रहा है। हम अभिजीत ग्रुप को पानी नहीं देंगे।

साक्षी सं. 15
शम्भू प्रसाद यादव, वल्द - स्व0 ईश्वर प्रसाद यादव, ग्राम - खरौनी, पंचायत-असनाहा, बौसी बाँका मो0- 9546166847 ने बयान किया कि वर्ष 1996-97 में हाई लेबेल कैनाल मैनेजमेंट कमेटी का गठन किया गया था, उसका मैं सचिव था। उस समय किसानों की समस्या पर डिविजनल कार्यालय पर नियमित बैठक हुआ करता था। उसमें क्षेत्रीय समस्याओं को रखा जाता था। हमलोग किसानों की समस्याओं पर ध्यान आकृष्ट कराये पर कोई कार्यवृद्वि नहीं हुई। वर्ष 2000 में गये उस समय सीडी मंगाई गई पर उसकी क्वालिटी गड़बड़ है। नरायना व सुखनिया बीअर 1995 में टुटा। तब से पानी नहीं मिल रही है। हमलोग अभिजीत ग्रुप को पानी नहीं देंगे। किसानों के हित में हाई लेवल कैनाल को दुरूस्त किया जाय।

साक्षी सं. 16
श्री भोला प्रसाद यादव, वल्द - शिवनन्दन यादव, ग्राम- कुसमाहा, प्रखण्ड - बौंसी, जिला- बांका; पूर्व विधयक मो. नं. 9006927702 ने बयान किया कि मैं एक किसान हूँ, अब तक कही गई सभी बातों का मैं समर्थन करता हूँ। मैं कुछ अन्य बातों की ओर ध्यान आकृष्ट कराता हूँ। जब योजना आयोग चन्दन डैम के निर्माण की तकनीकी स्वीकृति दी थी, उस समय भारत सरकार ने कहा था कि भारत सरकार की अनुमति के बिना डैम के अभिरचना में कोई छेड़छाड़ नहीं होगा। डैम और डैम का पानी अभिजीत ग्रुप को देना गलत है। गंगा नदी, कुडार नदी एवं चन्दन नदी से पानी लेना था चन्दन डैम से पानी नहीं लेना था। मार्च में आदेश लिया तब से काम चल रहा है। स्पीलवे ऊँचा करने से डैम ध्वस्त हो सकता है। 5-6 वर्षों से डैम के स्पीलवे से पानी नहीं निकला है। तब सरकार का कहना तर्कसंगत नहीं है। जब कैचमेन्ट एरिया में कोई बदलाव नहीं हुआ है तो ज्यादा पानी कहां से आयेगा। 180 मी0 इनटेक वेल खोदने की योजना है। यह टेकनिकली गलत है। बिहार सरकार का कहना गलत है कि डैम बाधित नहीं होगा।

साक्षी सं. 17
श्री अनिरूद्ध यादव, वल्द-श्री जर्नादन यादव, ग्राम- बाबू टौल, बांका पंचायत वार्ड सं.-7, प्रखण्ड व जिला - बांका मो. 9162708278 ने बयान किया कि एकरिया से वार्ड सं. 6 का 3 बीघा पटवन होता है। डैम का निर्माण किसानों को पानी देने के लिए हुआ था। जब किसान को पानी नहीं देते हैं तब व्यवसायी को पानी क्यों देंगे। एक बूंद पानी नहीं देना है, व्यवसायी व्यक्ति को।

साक्षी सं. 18
श्री प्रहलाद लईया, वल्द - स्व0 सौकी लईया, ग्राम - गढी, पंयायत- गोखुला, प्रखण्ड - बौसी, जिला- बांका ने बयान किया कि हमलोग भूमिहीन थे। हम लोगों को बिहार सरकार से एक-एक एकड़ जमीन मिला। पर, अब जबरदस्ती करके पॉवर प्लान्ट ने उस पर कब्जा कर लिया है और कोई मुआवजा नहीं दिया है। इसे सरकारी जमीन समझ कर हड़प लिया है। कागज देखने को भी कोई तैयार नहीं है। हमलोग भूमिहीन हो गये हैं, हम बहुत ही गरीब हैं।

साक्षी सं. 19
मो0 एकराम, वल्द - मरहूम शेख शहादत हुसैन, ग्राम- खड़ियारा, थाना/प्रखण्ड- बाराहाट, जिला- बंाका, मो. नं. 9661436722 ने बयान किया कि मेरे पूरे परिवार की 200 एकड़ जमीन है। जो, चांदन डैम पर ही निर्भर है। इनटेक बेल बनाने के लिए डैम का सारा पानी कम्पनी ने बहा दिया, इस कारण तो आधा धान की फसल पानी के अभाव में मर गया। यह डैम 1967 में किसानों के लिए बनाया गया है। इससे अब, जिस तरह छेड़छाड़ हो रहा है उससे सरकार लाखों लाख किसानों की हत्या कर रहा है। हमलोग कुरबानी देंगे पर बिजनेशमैन को पानी नहीं देंगे। मिट्टी का बांध बना है। डैम के अन्दर ब्लास्ट किया जा रहा है, उसका परिणाम क्या होगा? विजय चौधरी व वीजेन्द्र यादव ए.सी. में बैठ कर फैसला लेते हैं।

साक्षी सं. 20
श्री अड़तूल लईया, वल्द -श्री संग्राम लईया, ग्राम- सरैया, प्रखण्ड- बौसी, जिला-बांका ने बयान किया कि उनके पास मोबाइल नहीं है। जो, जमीन हमलोगों को सरकार ने दिया था उसको प्लांट ने जबरन ले लिया है। हमलोग बेंचे नहीं है। हमलोग 13 परिवार हैं। दूसरे आदमी बेच लिया है।

साक्षी सं. 21
श्रीमती कौशल्या देवी, पत्नी - स्व0 चतुरी प्रसाद यादव, ग्राम- बंधुआ कुर्रा, प्रखंड- बौसी, जिला- बांका ने बयान किया कि हमारे रोपनी के जमीन को मिट्टी से भर दिया है। जबरदस्ती जमीन पर कब्जा कर लिया है। जब मैं जे.सी.बी. मशीन के सामने खड़ी हो गयी तो मुझे मिट्टी से कमर से उपर तक ढक दिया। 5 एकड़ जमीन है। कुछ और लोगों की जमीन भी कम्पनी ने ले लिया है। हमलोगों पर केस भी कर दिया है।

साक्षी सं. 22
श्रीमती मंजू देवी, पत्नी-श्री मोहन यादव व श्रीमती सुनंदी देवी पत्नी रावण यादव, ग्राम- बंधुआ कुर्रा, प्रखण्ड- बौंसी, जिला- बांका ने बयान किया कि हमलोगों की जमीन भी जबरदस्ती लिखवा लिया है। हमलोगों को कम्पनी वालों ने भगा दिया। हमारे कुरथी व अरहर को रोंद डाला।

साक्षी सं. 23
श्रीमती कलावती देवी, पत्नी - श्री छोटी लइया, ग्राम- सरैया, थाना- बौसी, जिला- बांका ने बयान किया कि सरकार ने भू-दान में एक-एक एकड़ जमीन 13 आदमी को दिया था। मैंने अपनी जमीन कम्पनी को नहीं लिखा है जालसाजी करके दुसरा आदमी लिख दिया है। खेत में मिट्टी भी डाल दिया है।

साक्षी सं. 24
श्रीमती सरस्वती देवी, पत्नी - नकुल लईया, ग्राम - सरैया, प्रखण्ड- बौसी, जिला- बांका ने बयान किया कि मैं और कलावती देवी एक साथ हैं और परिवारों के पीड़िता है।

साक्षी सं. 25
श्रीमती निर्मला देवी, श्री किलटा लईया, ग्राम- सरैया, प्रखण्ड- बौसी, जिला- बांका ने बयान दिया कि जबरन कब्जा से पीड़ित 13 परिवारों में एक मैं भी हूँ।

साक्षी सं. 26
श्री श्याम सुन्दर दास, वल्द - तीतू हरिजन, ग्राम- सरैया, पंचायत- फागा, थाना- बौंसी, जिला- बांका, मो. 7549691877 ने बयान किया कि 1955-56 में पिता जी के नाम से सिरिया मौजा में जमीन मिला। गांव के दलाल लोग तिसरी सौतेली मां से जमीन ले लिये। मैं इस जमीन का रसीद कटा रहा हूँ पर, हमलोग लाचार हैं। उसी जमीन पर कम्पनी का ऑफिस बना रहा है। वहां पर ताड़, सीशम व आम का गाछ-वृक्ष था सब कुछ कटवा दिया। लोगों से मारपीट किया, परसों की बात है प्लांट के ऑफिस पर जो ओ.पी. है, वहां के आजाद नामक प्रभारी ने घर में घूसकर समान तहस-नहस किया। टाइटल केस बांका में किया है। अरूण गुप्ता द्वारा तथा डी.एम. को नोटिस किया है। जमीन 9.03 एकड़ है। कम्पनी ने सौतेली मां को कुछ पैसा दिया है।

साक्षी सं. 27
श्री मन्दी सिंह, वल्द- जटू सिंह, ग्राम- मेनका पहाड़ी, पो.- बंध्ुआ कुर्रा, प्रखण्ड- बौंसी, जिला- बांका ने बयान किया कि उनके खेत में कम्पनी ने जबरदस्ती 6 पीलर खड़ा कर दिया है और उल्टे मेरे बेटे पर केस कर दिया है। मैं अपनी जमीन कम्पनी को बेचना नहीं चाहता।

साक्षी सं. 28
श्री रवि कुमार, वल्द - राजकुमार सिंह, ग्राम- सबलपुर बाराहाट, मो.- 9431422473 ने बयान किया कि 1958 से 1962 तक डैम बना। तब घोषणा की गई थी कि जल के साथ बिजली भी मिलेगी। पर अब यहां पर 5 प्रखण्डों के किसानों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। कम्पनी किसानों का खून करने के बाद ही पानी लेगा।

साक्षी सं. 29
श्री राजेन्द्र मण्डल, वल्द- स्व. कौत्सू मण्डल, ग्राम- पलार पंचायत, गोखुला प्रखण्ड, बौंसी जिला- बांका, मो.-9973293969 ने बयान किया कि मेरी जमीन जो चार पुश्तों से मेरी थी, वह जमीन नन्द किशोर चौधरी के वंशज ने दी थी, वह कायमी सिकमी वटाईदारी में थी, उसको कम्पनी को मालिक ने बेच दिया। जमीन पर कब्जा है, जमीन 3 एकड़ 14 डि0 है।

साक्षी सं. 30
श्री ईश्वर चौन, वल्द- स्व. श्याम लाल चौन ;अनु0 जन जातिद्ध ग्राम- हरिपुर, पंचायत- वचनगाम, अंचल - बौंसी, जिला- बांका, मो. 9534250698 ने बयान किया कि मेन कैनाल से 10-15 गांव का पटवन होता रहा है। पर, 1999 की बाढ़ के बाद से सही पटवन आज तक नहीं हुआ। पानी खरीफ में पटवन के लिए पुरा नहीं मिलता तो, रब्बी की सिंचाई की बात तो दूर है। सीजन समाप्त होने के बाद पटवन मिलता है एकाध सिंचाई की इस बदहाली के बावजूद हम अभिजित ग्रुप को पानी नहीं देंगे।

साक्षी सं. 31
श्री अरविन्द पासवान, वल्द - श्री जय नारायण पासवान, ग्राम- माधेपुर, पो.- गोरगामा, पंचायत -अरनाहा, अंचल -बौंसी, जिला- बांका, मो. 7809054141 ने बयान किया कि उनकी पत्नी श्रीमती खेसिया देवी वर्तमान में मुखिया है। हम लोगों के पूर्वज लोग बताते हैं कि वे लोग बैलगाड़ी से निर्माण सामग्री लाकर बहुत शौक से डैम का निर्माण किया था कि सुखाड़ पीड़ितों को दाना मिलेगा। पर अब सुनने में आया है कि सरकार कम्पनी को एग्रीमेंट किया है। प्रखण्ड की 5-6 पंचायतों तक पानी पहुंचता है। सरकार चाहती तो मिल सकता था। 40 से 50 प्रतिशत किसानों को बीज बोने के लिए मुट्ठी भर धन नसीब नहीं हुआ।
चन्दन डैम जीवनदाता है। पर, अब चापाकल से पानी नहीं मिल रहा है। 30 फीट का कँुआ सूख गया है। ट्यूबेल से पानी नहीं आता। डैम का पानी का पानी हम नहीं जाने देंगे। जान देंगे पर पानी नहीं देंगे।

साक्षी सं. 32
श्री बनारस नारायण देव, वल्द -श्री लक्ष्मी नारायण देव, ग्राम- वृन्दावन, पंचायत- कैरी, प्रखण्ड- बौंसी, जिला- बांका ने बयान किया कि उनका जमीन मनियारपुर मौजा में पड़ता है। अगन नारायण देव ने जमीन बेच लिया। 150 परिवार की जमीन बेच दिया। 242 एकड़ 22 डिसमिल जमीन बिका है। लगभग 30 एकड़ जंगल बचा है। वृन्दावन राज से यह जमीन पीढ़ियों पहले मिला था, अभी उनका कब्जा छूट गया है।

साक्षी सं. 33
श्री रावण यादव, वल्द- झारखण्डी यादव, ग्राम- बंध्ुआ कुर्रा, पंचायत - गोकुल, अचंल -बौंसी, जिला- बांका ने बयान किया कि मैं बौंसी जा रहा था तब, कुछ लोगों ने अपने गाड़ी में बैठा लिया। बांका में उतार कर टीपा ले लिया पर पैसा नहीं दिया। नकल नहीं निकाल पा रहे हैं। घर में 2-3 दिन उपास रहा धरना दिये। 3 एकड़ 20 डिसमिल को 13 एकड़ 20 डिसमिल बना दिया। वापस करने को कहा पर नहीं किया। बच्चा इंटर में पढ़ता था जो बाहर भाग गया। साढ़े तीन एकड़ में दो भाईयों का हिस्सा है उसको 13.5 एकड़ लिखा लिया।

साक्षी सं. 34
पुनः बोले कम्पनी द्वारा जनसुनवाई नहीं की गई धेखा है। बाद में अखबार द्वारा जाना कि जनसुवाई हुई है। 5-6 सालों से न देखा न सुना कि पानी स्पेल किया है। एफआर.ए ल. व अन्य तकनीकी भाषा नहीं जानते। जलासय में मछली पालन होता था एक लेबर पदाधिकारी देखते थे उस जल के स्तर को मेंटेन करते थे। हमलोग पानी के लिए संघर्ष करेंगे।

साक्षी सं. 35
श्री फागू हरिजन, वल्द - तेतू हरिजन, गांव-सरैया, पंचायत -फागा, अचंल -बौंसी, जिला- बंाका, मो0-9006925404 ने बयान किया कि 8 एकड़ 55 डिसमिल जमीन उनके बाप को बन्दोवस्ती में मिला था। उसको मेरी माँ से लिखवा लिया। जबरिया गवाह मुझे बनाया, बोला 10 लाख देंगे पर माँ को 80 हजार रुपये दिया है।

साक्षी सं. 36
श्री गंगा राम मराण्डी, वल्द - घेना मरांडी, ग्राम- फरतूताड़ी, पंचायत -चिरकारा, प्रखण्ड- बौंसी, जिला- बांका, मो0-9801303637 ने बयान किया कि 1960 ई0 में जलाशय बनने के समय 240 एकड़ जमीन से विस्थापित किये गये आदिवासी, वे अब तक मुआवजा से वंचित हैं। 80 परिवार जो लहसूनिया गांव से विस्थापित होकर गहरा जोर में रहते हैं। उन्हें न बसौड़ी, न पट्टा, न पर्चा मिला है कोहड़ा टीकड़ा मौजा है। हमें हमारा मुआवजा मिले, पर हमारे पास कोई कागजात नहीं है। प्लांट आया तो चतुराई आयी, जंगल में लड़ खाता, खेसरा अपने नाम कर रहा है।

साक्षी सं. 37
श्री जगीश प्रसाद यादव, वल्द -केदार यादव, बांका नगर पंचायत, बांका, मो0-9473037111 ने बयान किया कि पहले गंगा से पानी आना था बाद में डैम करा लिया। 1973 से डैम पानी देता है। जमीन मरूभूमि हो जायेगी। (स्पीलवे का हाइट बढ़ा रहा है।)
1995 में अतिवृष्टि हुई तब 13 फिट पानी स्पीलवे किया था, बांका व भागलपुर तक बाढ़ आयी थी। यदि डैम का हाईट नहीं बढ़ा तो अतिवृष्टि से बांका बह जायेगा। सिचाई मन्त्री जनता को बेवकूफ बना रहे हैं। डैम के अंदर 100 मी0 इन्टेक वेल बना रहा है डैम पुराना है।
साक्षी सं. 38
श्री अरूण कुमार सिंह, वल्द -स्व. शारदा प्रसाद सिंह, सरैया, अचंल बौंसी, जिला- बांका, मो. 9801808721 ने बयान किया कि इलाज उसी का हो जिसकी बिमारी है या बिमार हो चुका हो! चन्द्रशेखर यादव ने 500 एकड़ जमीन अभिजीत ग्रुप को दिया है। उसे अधिकार दिलाने का प्रयास है, पानी लेना ही है तो स्पीलवे के नीचे एक दूसरा डैम बनाकर उस पानी का उपयोग करें। औरंगाबाद के किसानों को 1 एकड़ जमीन का मुआवजा 17 लाख पंचायती किया है।



साक्षी सं. 39
मो0 अब्दुल हासीम, वल्द -मरहूम अब्दुल हई, मल्लिक टोला, बांका, मो0-9934948597 ने बयान किया कि बिजली का फायदा बड़े व्यवसायी, माफियाओं को तरक्की देगा। अभी कुर्सी वालों को पानी का फायदा होगा, लोग पानी पीने को तरसेगें। गंध प्रदुषण से फेफड़ा सिकुड़ जायेगा। चंद पैसों में विधायक जी बिकियेगा नहीं, प्लांट नहीं बनने की कसम खायें।

साक्षी सं. 40
श्री गोपाल प्रसाद यादव, वल्द - अर्जुन प्रसाद यादव, ग्राम- कुसमाहा, प्रखण्ड- बौंसी, जिला- बांका, मो0-9572450239 ने बयान किया कि पहले पानी हमलोगों को मिलता था। जबसे अभिजीत ग्रुप ने नीव रखा है एक साल पहले डैम सूख गया। हम जान देंगे जमीन नहीं दंेगे।

साक्षी सं. 41
श्री योगेन्द्र, वल्द -महेन्द्र राय, ग्राम- किड़या जद, पंयायत -सांप डहर, अचंल- बौंसी, जिला- बांका, मो0-9199188860 से बयान किया कि डैम बनने में आधा जमीन चला गया है। विस्थापित को जगह नहीं मिला है। यदि डैम ऊँचा हुआ तो सब चला जायेगा। इसमें कटोरिया, बौंसी और सरैयाहार, झारखण्ड का जमीन डूब क्षेत्र में पड़ा है।

साक्षी सं. 42
श्री रामदेव प्रसाद यादव, वल्द - वीरो प्रसाद यादव, ग्राम- माधेपुर, असनाहा पंचायत अचंल बौंसी, जिला- बांका ने बयान किया हम एक बूंद भी पानी नहीं देंगे, चाहे गर्दन रहे या नहीं। वे पूर्व मुखिया भी हैं।

साक्षी सं. 43
मो0 मौली अंसारी, वल्द -मरहूम अब्दुल अंसारी, ग्राम- लबदो, गोखुला, बौंसी, बांका ने बयान किया कि जमीन का खसरा नं. 512 है। हनीफ मिआँ के नाम से बंदोबस्त है। दुसरे तीसरे से लिखा लिया है। जब हम लोग रोके, तो बोला पैसा दे देंगे पर पैसा नहीं मिला और जमीन भी नहीं।

साक्षी सं. 44
श्री मुरारी यादव, वल्द- श्री जगदेव यादव, ग्राम- सीरीया, मौजा- बन्धुआ कुर्रा, बाैंसी, बाँका मो0- 9661041589 ने बयान किया कि वे स्वेच्छा से जमीन 60,000/- रूपये प्रति एकड़ की दर से दिये हैं। सरकारी दर से उन्हें दुगुणा मुआवजा मिले। हमलोगों के फरीक से कुल 60 एकड़ जमीन, पावर ऑफ एटर्नी चन्द्रशेखर यादव के नाम देकर कम्पनी को दिये हैं।

साक्षी सं. 45
श्री शीलदयाल यादव, वल्द- स्व0 वेदी यादव, ग्राम- तिवारीचक पंचायत - बसनाहा, अंचल - बौंसी, बाँका ने बयान किया कि हमलोग डैम में जमीन दिये पटवन के लिए, अभिजीत ग्रुप को पानी देने के लिए नहीं। खेती से बाल-बच्चा गुजर करता है। रोपा हुआ पर, एक पानी की कमी से 50 प्रतिशत फसल नहीं हुआ हम पानी देने के पक्ष में नहीं हैं। इसके लिए खून की धरा बहेगी।

साक्षी सं. 46
उमेश प्रसाद यादव, वल्द- श्री बालदेव प्रसाद यादव, ग्राम- बरमसिया, पोस्ट- श्याम बाजार, अंचल -बौसी, जिला - बाँका, मो0- 7250372909 ने बयान किया कि पावर प्लांट और सरकार के द्वारा अहम मुद्दा पानी का है। जो बिना किसानों की सहमति के कम्पनी को दिया गया है। जबकि किसानों को पहले से ही पानी नहीं मिल रहा था। आज की स्थिति में खरीफ फसल नहीं हुई है। 7 साल से स्पीलवे का पानी उपर नहीं हुआ है। इसमें 7 प्रखंड बांका के भागलपुर के 4 प्रखंड झारखंड के गोड्डा के दो प्रखण्ड प्रभावित होंगे। गोड्डा के पड़ैयाहाट व गोड्डा में नहर बनने के बाद आज तक पानी नहीं मिला है। यह डैम अर्थ डैम है। 1995 में भीषण बाढ़ आयी थी तो 13 फीट पानी स्पील किया था। जब अतिवृष्टि होगी तो डैम से नीचे का क्षेत्र जल प्लवित हो जायेगा। स्पीलवे के ऊँचाई 7 फीट ऊँचा करने से तीन प्रखंड की 1070 एकड़ जमीन डुबेगी इस पर सरकार ने कोई बात नहीं की है।
 भूमि अधिग्रहण के समय कोई प्रशासन के लोग नहीं आये, मनमाना हुआ। कोई रेट तय नहीं हुआ। मुख्यमंत्री जब यात्रा में थे तो किसान उनसे मिले, कुछ नहीं हुआ। डैम का पानी नहीं देने, डैम के अन्दर छेड़छाड़ करने व जमीन अधिग्रहण का विरोध है। खून दे दंेगे, पर पानी नहीं देंगे।

साक्षी सं. 47
श्री अशोक कुमार सिंह, वल्द- नरसिंह प्रसाद सिंह, ग्राम- हरना, पोस्ट- मनियारपुर, अंचल -बौसी, जिला -बाँका, मो0- 9937643818 ने बयान किया कि डैम लाइफ लाइन है। कोई जिन्दगी लेना चाहता है तो, उसे बख्शेगें नहीं, प्लांट को किसी भी हालत में पानी नहीं देंगे।

साक्षी सं. 48
श्री यमुना प्रसाद यादव, वल्द-श्री हरि प्रसाद यादव, ग्राम-सिगरा टोली बाँका ने बयान किया कि हमलोग पानी के लिए साल में मार करते हैं पानी नहीं देंगे। जुरी द्वारा पुछे जाने पर कि क्या सरकार के पर्यावरण विभाग द्वारा आयोजित लोक सुनवाई में आप लोग भाग लिये थे? सब ने एक स्वर में हाथ उठाकर कहा कि नहीं हमें जानकारी नहीं थी।
जुरी द्वारा यह पुछे जाने पर कि क्या कम्पनी अपने निर्माण कार्य में लगनेवाले जल को, कुदार नदी से मानसून में लाकर स्टोर कर उपयोग करती है? सबने कहा ऐसा नहीं होता है। कम्पनी भूमिगत जल का उपयोग कर रही है।

इस जन सुनवाई में कोई माननीय मंत्री नहीं आये और न ही कोई सरकार पक्ष या कम्पनी के प्रतिनिधि ही उपस्थित हुए।

इस जन सुनवाई में उपरोक्त 48 साक्षी के अलावा हजारों की संख्या में प्रभावित क्षेत्र के लोग उपस्थित थे।

निष्कर्ष

इस जन सुनवाई में उपस्थित सभी साक्षियों का बयान सुनने और उपलब्ध कराये गये, दस्तावेजों को देखने-पढ़ने के पश्चात् जुरी-दल निम्न निष्कर्ष पर पहुँचा:-


  1. पिछली शताब्दी के छठे-सातवें दशक के मध्यकाल में बिहार सरकार ने इस क्षेत्र में पड़नेवाले शर्तिया-सुखाड़ से किसानों को निजात दिलाने के लिए चंदन नदी सिंचाई परियोजना का निर्माण करवाया था। इस परियोजना से बांका, भागलपुर और गोड्डा (झारखंड) जिलों के किसानों को सुखाड़ से राहत मिली। पर, इस सिंचाई परियोजना का पानी अभिजीत ग्रुप द्वारा स्थापित किये जा रहे थर्मल बिजली संयंत्र को दिये जाने पर स्थानीय किसानों में भारी रोष है। किसान चंदन नदी और सिंचाई परियोजना के पानी पर अपना पहला हक मानते हैं। पिछले तीन-चार दशकांे के दौरान मरम्मत आदि के अभाव में इस परियोजना की सिंचन क्षमता में काफी ह्यस हुआ है। इस कारण किसान किसी भी कीमत पर चंदन परियोजना का पानी बिजली संयंत्र को देने का प्रबल विरोध कर रहे हैं।
  2. जन सुनवाई के दौरान किसानों के बयानों और उपलब्ध कराये गये दस्तावेजों से यह भी निष्कर्ष निकला है कि कम्पनी बिजली संयंत्र स्थापित करने के लिए किसानों की जमीन तय सरकारी दर से आधी कीमत या औने-पौने कीमत देकर खरीदी है। इसके अलावा कम्पनी किसानों की जमीन हासिल करने के लिए झांसा, दबाब, दहशत, जबरन कब्जा जैसे अपराधिक तौर-तरीका भी धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रही है। कम्पनी दलित परिवारों को सरकार से मिले जमीन पर भी जबरन कब्जा किया है।
  3. बिजली संयंत्र को पानी उपलब्ध करवाने के लिए कम्पनी द्वारा जलाशय क्षेत्र में इनटेक वेल के निर्माण एवं स्पीलवे ऊँचा करने जैसे सरीखे कार्य करने के कारण किसान आशंकित हैं कि सिंचाई का सारा पानी कम्पनी ले लेगी, डूब क्षेत्र बढ़ेगा, जलाशय के बाहरी इलाका में कृत्रिम बाढ़ का खतरा उत्पन्न होगा और पूरे नदी घाटी क्षेत्र में भूमिगत जल का संकट गहरायेगा। सच के करीब दिखती किसानों की इन आंशकाओं के कारण विविध पारस्थितिकी वाले इस क्षेत्र में पारस्थितिकी असंतुलन के साथ-साथ इस क्षेत्र की खाद्य सुरक्षा भी खतरे में पड़ जायेगी। इस इलाका में भूमि बंजरीकरण का खतरा भी बढ़ जायेगा।


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