पोस्को के खिलाफ आंदोलनरत किसान गिरफ्तार, जबरन भूमि-अधिग्रहण का सरकारी फरमान जारी

पोस्को भारत छोड़ो ! सरकार और कारपोरेट गठजोड मुर्दाबाद !!
8 जनवरी 2013 से उड़ीसा के गोविन्दपुर में विस्थापन के खिलाफ शुरू हुए प्रतिरोध आंदोलन में पोस्को प्रतिरोध संग्राम समिति के 6 सदस्यों सहित पोस्को स्टील प्लांट का विरोध कर रहे दो हज़ार ग्रामीणों पर पुलिस द्वारा 230 फर्जी मुकदमे दायर कर दिए गए हैं. वहीं सरकार ने पुलिस के बल पर आठ जनवरी से जबरन भूमि-अधिग्रहण के आदेश दे दिए हैं जबकि इसपरियोजना के लिए जारी पर्यावरणीय मंजूरी 30 मार्च 2012 को ही निरस्त हो चुकी है और MoU का नवीनीकरण भी नहीं हुआ है. ऐसे में, 700 एकड़ वन-भूमि का जबरिया अधिग्रहण पूरी तरह गैर-कानूनी है.

पोस्को: बर्बर दमन व छल के बीच जारी है प्रतिरोध

700 एकड़ सरकारी जमीन, जिसमें 500 से ज्यादा पान की बेलों की खेती है तथा एक लाख से ज्यादा काजू के पेड़ हैं जो कि हमारे गांव वालों से संबंधित हैं, राज्य सरकार इसे हथियाने की तैयारी कर रही है। गोविंदपुर गांव से जुड़ी इस 700 एकड़ वन भूमि को अधिग्रहित करने के लिए कंपनी तथा सरकार हमारे लोगों पर ‘फांसो और बांटो’ तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। यद्यपि हम इन कुटिल चालों को हराने के लिए दृढ़निश्चित हैं जो कि हमारी एकजुटता तथा एकता को साबित करता है।

इस परियोजना की विस्तृत जानकारी और आंदोलन के बारे में जानने के लिए यहाँ क्लिक करें.
सरकार की तमाम धमकियों और आंदोलन के दमन की सारी कोशिशों के बावजूद धिनाकिया और उसके आस-पास के गाँवों में लोगों के लड़ने का दम कमज़ोर नहीं पड़ा है. आंदोलनरत लोगों पर फर्जी मुकदमे डालना उड़ीसा सरकार की दमनकारी मशीनरी का एक पसंदीदा हथियार बन गया है. ऐसा लगता है कि इन मुकदमों में फंसा कर राज्य सरकार लोगों को थका देना चाहती है. इस निहायत गैर-लोकतांत्रिक पद्धति का पर्दाफ़ाश कर इसे पराजित किया जाय, इसी मकसद से हम आपसे यह अपील कर रहे हैं.

जैसा कि आप सबको मालूम है, 22 जून 2005 को भारत की सरकार और कोरिया की पोहांग स्टील कंपनी के बीच हुए समझौते के बाद उड़ीसा के जगतसिंहपुर में 12,000,000 टन प्रतिवर्ष उत्पादन की क्षमता वाले स्टील प्लांट का समझौता हुआ जिसका स्थानीय ग्रामीण शुरू से ही तीखा विरोध करते रहे हैं.
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