बिहार: बांका में तेज होता भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन

बिहार में इस समय हालात ठिक नहीं है। लाठी के बल पर किसानों की जमीन हथिया ली जा रही है। दबंग प्राकृतिक संसाधन जल, जंगल और जमीन हथियाने की मुहिम में जूट गये हैं। ऐसा ही वाकिया बांका जिले में देखने को मिला है.  पेश है बिहार से  आलोक कुमार की रिपोर्ट;
इस समय  बिहार के बांका जिले के चांदन प्रखंड में रहने वाले गरीब किसान नारा बुलंद कर रहे हैं कि जान दे देंगे पर जमीन नहीं देंगे। झारखंड से खदेड़े जाने के बाद अभिजीत ग्रुप जास इंफरास्टैक्चर एण्ड सुपर थर्मल पॉवर प्रा0लिमिटेड ने बिहार में  शरण ले लिया है। बांका जिले में कंपनी पावर प्लांट लगाने जा रही है जिसके विरोध में किसान एकजूट हो रहे है.
बिहार के बांका जिले में 1968 में बने चाँदन डैम से विस्थापितों का ठीक से पुनर्वास और मुआवजा भी नहीं मिला है। फिर डैम के स्पेलवे को ऊंचाकर हजारों एकड़ जमीन और दर्जनों गांवों को डूबोने की साजिश की जा रही है। डैम से कमाण्ड क्षेत्रों को अबतक पानी नहीं मिल पाया है। दूसरी तरफ निजी कम्पनी पानी लेने के लिये उतावली हो रहा है.अगर ऐसा होता है तो इस क्षेत्र के लोगों को डैम का पानी मिलना मुश्किल हो जाएगा। पानी के अभाव में कृषक पैदावार नहीं कर पाएगे और आत्महत्या करने को मजबूर हो जाएगें। बांका जिले की जनसंख्या 22 लाख है। इसमें 5 लाख अनुसूचित जाति, अनसूचित जनजाति, पिछड़ी जाति और अल्पसंख्यकों की है जो लघु कृषक हैं।
जानकारी के अनुसार 2007 में बिहार सरकार और अभिजीत ग्रुप जास इंफरास्टैक्चर एण्ड सुपर थर्मल पॉवर प्रा0लिमिटेड के साथ समझौता किया गया कि बिजली प्लांट लगाने के लिए बियाडा में जमीन दी जाएगी। मगर बाद में सरकार मुकर गयी और कम्पनी ने स्वयं ही जमीन की खरीद फरोख्त कने में लग गई । अब  कम्पनी  की नजर चांदन डैम के पानी पर है.
राष्ट्रीय जनता दल के सांसद जगदानंद सिंह कहते है कि सरकार और कम्पनी के बीच में एमऔयू के तहत 12 लाख बिघा जमीन खरीदनी थी। मगर कम्पनी ने साल 2009 में बौंसी थाना में सैकड़ों हेक्टेयर जमीन कोड़ी के भाव में जर्बदस्ती किसानों से फर्जी केवाला करा लिया। जिला प्रशासन कम्पनी का वफादारी कर रहा है। धीरे-धीरे 2011 से बिहार के मुख्य नदी चान्दन पर बना, लक्ष्मीपुर डैम को भी अपने कब्जे में कर लिया है। 1968 में बने डैम से विस्थापितों का ठीक से पुनर्वास और मुआवजा भी नहीं मिला है। फिर डैम के स्पेलवे को ऊंचाकर हजारों एकड़ जमीन और दर्जनों गांवों को डूबोने की साजिश की जा रही है। डैम से कमाण्ड क्षेत्रों को अबतक पानी नहीं मिल पाता है। दूसरी तरफ निजी कम्पनी पानी लेने के लिये उतावला हो रहा है।


अगर ऐसा होता है तो इस क्षेत्र के लोगों को डैम का पानी मिलना मुश्किल हो जाएगा। पानी के अभाव में कृषक पैदावार नहीं कर पाएगे और आत्महत्या करने को मजबूर हो जाएगें। 

हरियाली और प्राकृतिक सम्पदा वाला क्षेत्र है बांका। सर्वविदित है कि बिहार राज्य में नदी-नालों का भरमार है। प्राकृतिक प्रदत जंगल भी है। परन्तु हाल के दिनों में विकास के नाम पर विनाश करने के लिए निजी कम्पनी आतुर है। अगर यह कम्पनी अपने मकसद पर कामयाब हो जाता है तो यहां के गांव को अंधेरे के गर्क में पहुंचा दिया जाएगा। 

कम्पनी स्थानीय प्रशासन,प्रतिनिधि और दलालों से मिलकर नंगा नृत्य करने पर अमादा है। पहले धोखा देकर जमीन खरीदा फिर पुरानी सड़क को काटकर प्लांट में मिला लिया। वहीं जब कम्पनी के लोगों ने जेसीबी मषीन से खेत को मिट्टी से भरने का प्रयास करने लगे। तब उस समय खेत में कार्यरत कुछ साहसिक महिलाओं ने अपनी खेत में मिट्टी डालने का विरोध करने लगी। तब जेसीबी मशीन के चालक और उनके साथ अन्य लोगों ने विरोध करने वाले महिलाओं को अपमानित करने लगे। उन लोगों ने इस दुस्साहस पर उतारू हो गये और जेसीबी मशीन  से ही महिलाओं के ऊपर मिट्टी डालने लगे। उन लोगों के द्वारा ताबड़तौड़ विरोध करने पर ही जेसीबी मशीन चलाने वाले भाग खड़े हुए और उल्टे महिलाओं के ऊपर झूठे मुकदमे लांध दिये। इस सिलसिले में तीन लोगों को जेल भेजा गया। अन्य दो पर केस चल रहा है। 

कम्पनी के प्रबंधन में बांका जिले से अवकाश प्राप्त आरक्षी अधीक्षक को सुरक्षा प्रबंधक नियुक्त किया हैं जो 6 माह पहले अवकाश ग्रहण किये थे। इनके अलावे वर्तमान अनुमंडलाधिकारी और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के रिष्तेदारों को भी कम्पनी वालों ने बहाल कर लिया है। इससे भी कम्पनी वाले संतुष्ट नहीं हुए तो मनोज यादव,विधान पार्शद तथा संजय-मनोज के पिताजी अवकाश प्राप्त,राजस्व कर्मचारी चन्द्रषेखर यादव भी भोले-भाले गरीब किसानों और गा्रमीणों को फूसला बहलाकर 40 हजार रू0 एकड़ के दर से अपने नाम से पावरनामा लिखवा लिया। फिर उसने कम्पनी वालों से ऊंचे दाम पर चन्द्रषेखर यादव ने केवाला कर दिया है। 

इस बीच कम्पनी वालों ने दूसरे आदमी की जमीन को तीसरे से जल्दीबाजी में पावरनामा लिखवा दिया है। कम्पनी के लोग बांका जिले के भू निबंधक से सांठगांठ कर लिया है। कम्पनी का सी0ई0ओ0 तथा बांका के भू निबंधक के बीच रिशतेदारी है। कम्पनी को कोर्टफीस माफ कर दिया गया है। 3 के बदले 13 एकड़ जमीन फर्जी पावरनामा करा लिया गया है। अबतक एक हजार एकड़ जमीन कम्पनी के नाम हो गया है।

इस कारनामें से क्षेत्र के किसान मजबूर होकर आंदोलन शुरू कर दिये हैं। मजे की बात है कि राजद के सांसद जगदानंद सिंह और जदूय के विधायक गिरधारी यादव किसानों के आंदेालन में जुड़ गये हैं। अभी तो अंहिसात्मक आंदोलन चल रहा है। अगर सरकार के द्वारा वाजिब कार्रवाई नहीं की गयी तो हिंसात्मक आंदोलन का भी रूप ले सकता है

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