कारपोरेट लूट- पुलिसिया दमन विरोधी लोक संघर्ष यात्रा : गुन्डागर्दी में रिलायंस को पीछे छोड़ा आदित्य बिरला नें

घर ना छोड़ने पर खाई गोली, रिपोर्ट के बावजुद कोई जाँच नहीं। 
गुन्डागर्दी में रिलायंस को पीछे छोड़ा आदित्य बिरला नें।। 

लोक संघर्ष यात्रा के चौथे दिन की रवि शेखर की संक्षेप रिपोर्ट

सिंगरौली के विभिन्न जन संगठनों के सहयोग से और लोकविद्या आश्रम के संयोजकत्व में आदिवासी किसान कामगार एकता के लिए निकली लोकसंघर्ष यात्रा के चैथे दिन बरगवां क्षेत्रा मे लग रहे हिन्डालको के एल्युमिनियम प्लान्ट और कैप्टिव पावर प्लान्ट के उन क्षेत्रों मे पहुची जहां कम्पनी सैकड़ों परिवारों को उजाड़कर जले हुउ कोयले की राख रखने का बांध बना रही है। ओरगड़ी और गिधेर गांव को उजाड़कर ये सारा उपक्रम किया जा रहा है जो मुलतः खेती किसानी करने वाले लोग रहे हैं। जमिन के उर्वरता का आलम यह है कि गांव में किसी को भी अनाज और सब्जियां खरिदने कि जरूरत कभी नही पड़ी। लेकिन अब सभी लोग बाजार पर निर्भर हैं। सब कुछ ख्रिदना है, और आमदनी का जरिया कोई नहीं।

लोगों से बातचीत में आदित्य बिरला समुह द्वारा दुसरी कम्पनीयों की तुलना में जारी क्रुरता की सभी हदें तोड़ देने की अंधी दौड़ के भी कई प्रमाण मिले। केवल मौखिक आश्वासनों से आजि़ज आ चुके भोले भाले किसान जब सभी आश्वासन लिखित तौर पर दिये जाने कि मांग पर अड़ गये तो कम्पनी के अधिकारीयों ने गुन्डों का इस्तमाल किया और लिखित आश्वासन के बजाय गोलियों का सहारा लिया। बृज लाल साकेत पिता राजमन साकेत उन कई उदाहरणो मे एक हैं जिनपर गोलिया चलाई गयीं। उन्होने स्थानिय थाने मे रिपोर्ट भी लिखवाई जिसका कोई फायदा नही निकला। अस्पताल में इलाज हुआ और जान तो बच गई लेकिन छर्रे शरिर में अब तक मौजुद हैं डाक्टर ने छर्रे निकालने से तब तक इन्कार किया है जब तक उसे एफ आई आर की प्रतिलिपि न मिले और थाने ने प्रतिलिपि देने में छः महिने लगा दिये। अब आॅपरेशन में जितने पैसे चाहिये उससे घर का खर्च कई महिनो चल सकता है इसलिए बृज लाल ने छर्रों के साथ ही जिन्दगी कबुल कर ली है। 
आज पाॅचवे दिन की यात्रा मझगवां में बनाये गये विस्थापितों की बस्ती से शुरू होनी है समय और व्यवस्थाओं की कमी के कारण दिन भर की वार्ताओं का पुरा विवरण दिया जाना सम्भव नही है। विस्तृत रिपोर्ट यात्रा के पुरे होने पर हम आप तक पहुॅचायेंगे।  
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