दयामनी बारला की रिहाई के लिए दिल्ली में दस्तक: छात्र-युवाओं ने झारखंड भवन पर किया प्रदर्शन

झारखंड ट्राइबल स्टुडेंट्स असोसिएशन (जे.टी.एस.ए.), ऑल इंडिया स्टुडेंट्स असोसिएशन (आइसा) तथा डेमोक्रेटिक स्टुडेंट्स युनियन (डी.एस.यू.) के कार्यकत्ता और जनवादी विचारों वाले छात्र-युवा 12 नवम्बर को दिल्ली के वसंत विहार-स्थित झारखंड भवन के सामने आदिवासी कार्यकर्त्ता दयामनी बारला की अविलम्ब रिहाई के लिए जमकर विरोध प्रदर्शन किया. छात्रों ने झारखंड भवन के सामने समाजकर्मियों को प्रताडित करने और आदिवासी भूमि पर जबरन कब्जा करने के खिलाफ नारे लगाए और झारखंड के अतिरिक्त स्थानिक आयुक्त (Assistant Resident Commissioner) ने भवन के मुख्या द्वार पर आकार प्रदर्शनारत युवाओं से ज्ञापन लिया, जिसे उनकी उपस्थिति में पढकर सबके सामने सुनाया गया.
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जे.टी.एस.ए. के साथी गणेश ने जोर देकर कहा की नगड़ी में चल रहे विस्थापन विरोधी आंदोलन में शामिल होने के कारण दयामनी बारला को षड्यंत्रपूर्वक जेल में रखा गया है और एक के बाद एक कई फर्जी मामलों में फंसाया जा रहा है. नगड़ी में विकास के नामपर आदिवासियों को बेदखल करके बनाए जा रहे शिक्षण संस्थानों में राष्ट्रीय क़ानून विश्वविद्यालय भी शामिल है, जिसके बोर्ड में झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश खुद शामिल हैं. ऐसे में, पुलिस के साये तले नगड़ी को खाली कराने संबंधी उनके आदेश के मायने समझे जा सकते हैं. पूरा का पूरा सत्तावर्ग आज गरीबों-आदिवासियों को बेदखल करने पर एकमत है.

जे.ए.यू. छात्रसंघ के सह-सचिव पीयूष और आइसा की नेता सुचेता डे और अनुभूति बारा ने भी सभा को सम्बोधित किया. उन्होंने देश भर में नगड़ी की तर्ज पर किसानों, आदिवासियों और गरीबों को कारपोरेट के हितों में विस्थापित और पीड़ित करने पर क्षोभ जताया और साझा आंदोलन तेज करने पर बल दिया. पेश है झारखंड भवन पर हुए आज के इस विरोध प्रदर्शन की कुछ तस्वीरें:
































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