पेंच व्यवर्तन परियोजना: संघर्ष जारी और जरुरी हैं - मेधा पाटकर

छिंडवाड़ा जिले में पेंच नदी पर 41 मीटर का बड़ा बांध केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ जी के चुनाव क्षेत्र में राज्य और केन्द्र शासन मिलकर बिना मंजूरी के बना रहे हैं। इसके खिलाफ संघर्ष सीमा पार पहुंचा है। इस परियोजना के क्षेत्र के 31 गांव डूब क्षेत्र में आ रहे हैं, लगभग 5600 हेक्टेयर भूमि जो कि किसानों की है इसमें से अधिकांश किसानों की भूमिअर्जन का कार्य पूरा नहीं हुआ है। बांध को 1984 में पर्यावरण विभाग था मंत्रालय नहीं था उस समय दी गई एक सादे कागज की मंजूरी थी अब आवेदन पत्र श्री मुदगल पर्यावरण एवं वनविभाग से केन्द्रीय जल आयोग को एवं पर्यावरण निर्धारण कमेटी को अनापत्ति जताने वाला फैसला उपलब्ध है जो कि 21 अप्रैल 1984 को आया था। उक्त एक पन्ने की मंजूरी अब निरस्त मानी गई है। इस महत्वपूर्ण विषय पर बांध निर्माण के लिए कानूनन मंजूरी लेना अत्यंत आवश्यक हो गया है। इस आशय की जानकारी देते हुए नर्मद बचाओ आंदोलन की नेत्री एवं जनआंदोलनों के राष्ट्रीय समनवय की सदस्य सुश्री मेधा पाटकर ने सत्याग्रह स्थल से कहा कि पर्यावरण सुरक्षा कानून 1996 और वन सुरक्षा कानून 1980 से मंजूरी नहीं ली गई। इस आशय की जानकारी स्वयं श्रीमती जयंति नटराजन केन्द्रीय पर्यावरण मंत्री ने हमारे समक्ष दी है। वन भूमि के लिए भी मंजूरी नहीं ली गई यह जानकारी है। 1984 के बाद दिया गया किसानों को मात्र 30 से 40 हजार रुपये का मुआवजा केवल धोखाधड़ी थी और आंदोलन के चलते मुआवजा का पैकेज 1 लाख रुपये प्रति एकड़ का घोषित हुआ पर 90 प्रतिशत से अधिक किसानों ने विस्थापन को स्वीकार नहीं किया।



सुश्री पाटकर ने कहा कि उक्त बांध के निर्माण कार्य का भूमिपूजन और शुभारंभ नारियल फोड़कर उनकी जानकारी के अनुसार कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी छिंडवाड़़ा ने बिना मंजूरी के किया है। इस बांध के नीचे तोतलाडोह बांध है जिससे पेंच नदी पर उक्त बांध बनने से तोतलाडोह बांध के लाभ भी निश्चित रूप से प्रभावित होंगे। बांध के नीचे बहती नदी के परकोलेशन पर घना जंगल और पंेच नेशनल पार्क तथा टाइगर प्रोजेक्ट है यह भी निश्चित रूप से प्रभावित होगा इसलिए यह अतिआवश्यक हो जाता है कि वाईल्ड लाइफ बोर्ड की मंजूरी प्रथम दृष्टि में ली जावें, उसके पश्चात र्प्यावरण म्ंत्रालय की अनुमति ली जा सकती है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि क्षेत्र की अनेकों ग्रामसभाओं ने बांध के निर्माण के विरोध में प्रस्ताव पारित किये हैं जिसमें अधिकतम ग्राम आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। वहां ग्राम सभा की सहमति भूअर्जन की प्रक्रिया के पूर्व लिया जाना आवश्यक था जो कि नहीं ली गई है। जबर्दस्ती काम आगे बढ़ाने तथा किसानों से गांव खाली कराने के लिए 1400 की संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। एडवोकेट आराधना भार्गव की दिनांक 3 नवंबर 2012 को धारा 151 के अंतर्गत गिरफ्तारी की गई है। सभी लोगों को 1998 के झूठे केस में आजीवन कारावास के लिए भोपाल जेल भेजा जा रहा है।

पूरे छिंदवाड़ा जिले में धारा 144 लगने के बाद भी तेंदूपत्ता बोनस के बंटवारे के कार्यक्रम में उपस्थिति दी और कार्यक्रम का सफल संचालन हुआ। साथ ही भाजपा किसान मोर्चा का सम्मेलन भी कल चौरई में हुआ था, साथ ही तामिया में एडवेंचर उपस्थिति में हजारों किसानों के बीच लगवाया गया। आज भी सैकड़ों हजारों लोग बस और ट्रेनों से छिंदवाड़ा से बाहर से आ रहे हैं उन्हें प्रशासन द्वारा रोका नहीं जा रहा है जबकि मेधा पाटकर और उनके दो साथियों को रेलवे स्टेशन छिंदवाड़ा पर 50 पुलिस के जवानों ने घेरकर भी उक्त आदेश की प्रति नहीं दी और न ही गिरफ्तारी की गयी। लेकिन छिंदवाड़ा में किसी निजी मकान से निकलने की मंजूरी न देते हुए प्रशासन द्वारा गिरफ्तारी की जा रही है इस कारण से लेकतंत्र की हत्या के विरोध में हमें अब सत्याग्रह पर बैठना पड़ा है। पुलिस ने हमें नजरबंदी में रखा है दो महिला साथ अखिल भारतीय गोंडवाना पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एडवोकेट सुषमा प्रजापति व देवकी मारावी एवं राजेश तिवारी बरगी बांध विस्थापित संघ, भीमगढ़ बांध विस्थापित प्रतिनिधि जीमल खान, किसान संघर्ष समिति के पेंच बांध एवं अडानी पॉवर परियोजना के विस्थापित प्रतिनिधि साथ में सत्याग्रह में बैठे हैं। सिवनी के जनआंदेालनों के साथ ब्रजकिशोर चौरसिया जय युवक क्रांतिदल व डॉ राजकुमार सनोडिया किसानसंघर्ष समिति को पुलिस निजी मकान से गिरफ्तार कर ले गई है और प्रशासन हमें यहां से गांवों में जाकर किसानों से बाचतीत करने से इंकार कर रहा है जो कि न्यायिक दृष्टि से उचित नहीं है। सुश्री पाटकर ने कहा कि शासन प्रशासन ने डरावना माहौल पैदा कर किसानों को धमकियां देकर भ्रमित करना जारी रखा है। दिनांक 3 नवंबर की राज बाम्हनवाड़ा गांव के 17 किसानों से समझौता करने की झूठी खबर फैलाई गई है वहीं प्रत्यक्ष में कलेक्टर छिंदवाड़ा द्वारा मिठाई खरीदकर बांटने की खबर भी उन्हें प्राप्त हुई है।

सुश्री पाटकर ने कहा कि पेंच बांध का पानी छिंदवाड़ा और सिवनी में सिंचाई के लिए ही उपयोग में लाना था लेकिन प्रत्यक्ष में मध्यप्रेश विद्युत वितरण कंपनी को ताप विद्युत परियोजना 2010 से अडानी पॉवर लिमिटेड को देकर उनके लिए इस पेंच जलाशय का पानी दिया जा रहा है जिसकी मात्रा वर्तमान में यदि कम है तो कल निश्चित रूप से ज्यादा होगी। अडानी पॉवर को 299 हेक्टेयर जमीन इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ म.प्र. विद्युत वितरण कंपनी से दी गई है वहीं एस.के.एस. पॉवर के लिए भी पूर्व में एक बार रद्द हुई अधिसूचना को ग्राम राहीवाड़ा की जमीन के लिए भूअर्जन का राजपत्र दिनांक 2 नवंबर 2012 को प्रकाशित किया गया। प्रत्यक्ष में ताप विद्युत परियोजना को पर्यावरण मंत्रालय से अभी अभी कही गईं सारी की सारी पूर्व शर्तों के साथ मंजूरी दी गई लेकिन आज तक उनकी पूर्णतः की तैयारी तक नहीं है। आज दिनांक तक यह जानकारी है कि इस पूरे परिप्रेक्ष्य में 130 कंपनियों के साथ म.प्र. शासन ने 2 लाख हेक्टेयर जमीन देने के वादे के साथ एमओयूएस किये हैं उसमें महाकौशल क्षेत्र (छिंदवाड़ा) शामिल है कि सबसे अधिक जमीन दान की जा रही है। इसी के तहत छिंदवाड़ा के किसानों की अतिउपजाऊ जमीन पानी कंपनियों की ओर मोड़ने की साजिश के खिलाफ संघर्ष जारी है और जरूरी भी है। इसका समर्थन हिन्द मजदूर किसान पंचायत मध्यप्रदेश के प्रांतीय महासचिव एवं आजादी बचाओ आंदोलन के संयोजक डी.के. प्रजापति एडवोकेट, म.प्र. पेंशनर्स एसोसिएशन के प्रांतीय सचिव श्री टी.एम.आर. नायडू, समता पार्टी के अध्यक्ष दशरथ लाल यादव, म.प्र. समता पार्टी के अध्यक्ष सुरेश शर्मा, अखिल भारतीय गोंडवाना किसान महापंचायत म.प्र. के अध्यक्ष श्रीचंद चौरसिया, आजादी बचाओ आंदोलन छिंदवाड़ा के जे.एल.मिश्रा सहित जनसंगठनों ने किया है। इन जनसंगठनों ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि छिंदवाड़ा जिले में धारा 144 का प्रयोग असंवैधानिक है, क्योंकि आज दिनांक को हिन्दी प्रचारिणी छिंदवाड़ा, पेंशनर्स सदन में बड़ी संख्या में लोग उपस्थित हैं और कार्यक्रमों का संचालन किया जा रहा है।

ऐसी परिस्थिति में धारा 144 का औचित्य क्या सिर्फ मेधा पाटकर और उनके सहयोगी जनसंगठनों और साथियों के लिए आवश्यक है? जनसंगठनों ने प्रशासन की इस कार्यवाही को लोकतंत्र की हत्या की संज्ञा दी है साथ ही इस परिप्रेक्ष्य में की गई गिरफ्तारियों की निंदा की है।

प्रवीण पटेल
यासीन कुरेशी
कुंजविहारी शर्मा
महेश चंद्रवंशी
राकेश वर्मा राजेश तिवारी, रघुवंशपुरा ककई
ककई विलवा , भूला मोहगांव बरगी बांध विस्थापित संघ  

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