फैजाबाद हिंसा एकतरफा और प्रयोजित: जाँच दल

उत्तर प्रदेश के फैजाबाद में दुर्गा पूजा के दिन 24 अक्टूबर 2012 को दो समुदायों के बीच हुई हिंसक झड़पों से उपजे तनाव के कारण करीब दो सप्ताह तक कर्फ्यू जारी रहा. इस पुरे घटनाक्रम का जायजा लेने एंव प्रभावित क्षेत्र का दौरा करने एक स्वतंत्र जांच दल ने 3 नवम्बर 2012 को भ्रमण किया. इस जाँच दल में युगल किशोर शरण शास्त्री, खालिक अहमद खान, विनय श्रीवास्तव, शाह आलम, गुफरान सिद्दीकी, एस.एम. नसीम, ओंकार सिंह,एडवोकेट मोहम्मद शोएब,मोहम्मद सुलेमान, जैद फारुकी, राजीव यादव, आफताब आलम और संदीप पाण्डेय थे. पेश है यहाँ पर जाँच दल की रिपोर्ट;


जाँच दल  ने पाया कि-
  1. हिंसा एकतरफा और प्रयोजित प्रतीत होती है।
  2. केन्द्रीय दुर्गा पूजा समिति की संदिग्ध भूमिका। उनके निमंत्रण पत्र पर 3 नं. बिन्दु में लिखा है कि जुलूस में अधिक संख्या में लोग आएं लेकिन महिलाएं व बच्चे न आएं। क्या उन्हें होने वाली हिंसा का अंदाजा था?
  3. हिंसा का कारण बताया जा रहा है किसी नवयुवक द्वारा किसी लड़की को छेड़ना। वह नवयुवक कौन था, कहां है? जुलूस के साथ मौजूद सुरक्षा बल ने क्या उसे नहीं देखा? इस घटना पर कोई प्राथमिकी क्यों नहीं दर्ज हुई?
  4. दुकानें फैजाबाद के केन्द्र में 400 मीटर लम्बाई व 60 मीटर चौड़ाई क्षेत्र में ही जली हैं। पुलिस घटनास्थल पर मौजूद थी। पुलिस ने दंगाइयों को रोकने के लिए कोई कार्यवाही क्यों नहीं की?
  5. कर्फ्यू के दौरान दिन में साकेत स्टेशनरी में आग लगना अत्यंत गम्भीर घटना है। प्रशासन का दावा है कि आग शार्ट सर्किट होने से लगी जबकि बताया जा रहा है कि आग लगने के समय बिजली आ ही नहीं रही थी। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक व जिलाधिकारी की भूमिका की जांच आवश्यक प्रतीत होती है। इनको और अपर पुलिस महानिदेशक (कानून व व्यवस्था) हटाया जाना स्वागतयोग्य है।
ऐसी घटनाओं की पुनरावृात्ति न हो इस हेतु जाँच दल ने सुझाव दिए कि-
  1. आने वाले दिनों में कई हिन्दु-मुस्लिम पर्वों को देखते हुए 6 दिसम्बर तक प्रशासन सजग रहे और किसी भी अप्रिय घटना की आशंका पर प्रभावी हस्तक्षेप करे।
  2. धार्मिक भीड़ के नाम पर संगठित साम्प्रदायिक समूहों से सावधान रहा जाए।
  3. पटाखों व शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
  4. आतिशबाजी का यदि कोई समान बिकना भी है तो वह शहर के बाहर बिके।
  5. दीपावली बाजार घंटाघर के बजाए शहर के बाहर लगवाया जाए।
  6. धर्मनिर्पेक्ष युवाओं की सद्भाव समिति बनाई जाए चूंकि युवा ही हिंसा में आगे रहता है। इसके अलावा विभिन्न धर्म के धर्माचार्यों की भी सद्भाव समिति बने।
  7. दीपावली/मोहर्रम में लोग व्यापार कर सकें इसके लिए जिनकी दुकानें जली हैं उन्हें पूरा मुआवजा पर्व के पहले मिल जाए।





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