कटनी: बर्बर दमन व छल के बीच जारी है प्रतिरोध

मध्य प्रदेश के कटनी जिले में भूमि अधिग्रहण के विरोध में धरना दे रहे किसानों पर बर्बर पुलिसिया दमन रूकने का नाम नहीं ले रहा है. आंदोलनरत किसानों पर पुलिस ने 15 अक्टूबर की देर रात लाठीचार्ज कर  खदेडने की कोशिश की. वहीं बुजबुजा व डोकरिया गांव में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है। दूसरी तरफ  वेलस्पन एनर्जी लिमिटेड 20 ऐसे किसानों के शपथ पत्र के आधार जमीन लेने का दावा कर रही है, जो जिंदा ही नहीं है.
मप्र में किसानों पर हुआ था एके-47 का इस्तेमाल!

भोपाल(साभार:पर्दाफाश)| पुलिस आधुनिक हथियार एके 47 का इस्तेमाल अमूमन आतंकवादियों व देश विरोधी ताकतों के खिलाफ करती है, लेकिन मध्य प्रदेश में पुलिस आंदोलनरत किसानों पर इस हथियार का इस्तेमाल कर रही है। राज्य मानवाधिकार आयोग की जांच रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है।

जांच रिपोर्ट रायसेन जिले के बरेली में किसानों पर हुई गोलीबारी को लेकर सामने आई है। ज्ञात हो कि बरेली में विगत सात मई को किसानों के प्रदर्शन के दौरान गोलीबारी की घटना में एक किसान हरि सिंह की मौत हो गई थी और कई घायल हो गए थे। बरेली में किसान बारदाना के अभाव पर रोष प्रकट कर रहे थे। विवाद बढ़ने व आगजनी होने पर पुलिस ने गोलीबारी की थी। किसानों पर गोली चलाने का मामला सामने आने पर राज्य मानवाधिकार ने इसकी जांच कराई जिसकी रिपोर्ट पिछले दिनों सामने आई है।

इस रिपोर्ट में प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल तो उठाए ही गए हैं, साथ ही कहा गया है कि पुलिस ने एके-47 और 9एमएम की पिस्तौल का भी इस्तेमाल किया गया है। इतना ही नहीं, पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया। जांच रिपोर्ट के आधार पर मानवाधिकार आयोग ने रायसेन के कलेक्टर मोहनलाल मीणा, पुलिस अधीक्षक आई.पी. कुलश्रेष्ठ और बरेली के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) अनिल तिवारी, अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) एस.आर. सरयाम, तहसीलदार एस.एल. सोलंकी और थाना प्रभारी एस.पी. बोहित को प्रथम दृष्टया मानवाधिकारों के हनन का दोषी पाया गया है।

आयोग ने इन अफसरों को 21 दिसम्बर को आयोग की दो सदस्यीय खंडपीठ के समक्ष उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। किसानों पर एके-47 का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आने पर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कहा कि राज्य सरकार खुद को किसान हितैषी होने का दावा करती है, मगर वह किसानों के साथ किस तरह का बर्ताव कर रही है, यह बात मानवाधिकार आयोग की जांच में सामने आया है। नेता प्रतिपक्ष ने संवाददाताओं से कहा है कि बरेली में किसानों पर एके-47 राइफल से गोली चलाई जाती है, कटनी में उद्योग के लिए किसानें की जमीन अधिग्रहीत की जा रही है, किसान आत्महत्या कर रहे हैं, विरोध करने पर लाठी-डंडे बरसाए जाते हैं और उन्हें जेल भेज दिया जाता है। इन हालात में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को अपने पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है।

करीब 50 किसान खेत में चिता बनाकर उस पर बैठकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि जमीन ही उनके जीने खाने का जरिया है और अगर जबरन इनसे जमीन छीनी गई तो ये अपनी जान दे देंगे।

इस अधिग्रहण से 230 किसान परिवार प्रभावित हो रहे हैं। इनमें से अधिकांश किसान जमीन देने को तैयार नहीं है। किसान अपने तरीके से चिता सत्याग्रह कर जमीन अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं। इन दोनों गांव के कई किसान शपथ पत्र देकर आत्महत्या करने की पहले ही चेतावनी दे चुके हैं।

15 अक्टूबर को उसकी लाश के साथ प्रदर्शन कर रहे किसानों पर पुलिस ने जमकर लाठियां भांजी और सुनिया बाई की लाश कब्जे में लेकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया। इसके साथ ही पुलिस ने लगभग 50 आंदोलनकारियों को हिरासत में लिया।  इन में से 11 किसानों को 15 अक्टूबर की देर रात जबलपुर केंद्रीय कारागार में भेज दिया गया है। वहीं बुजबुजा व डोकरिया गांव में भारी पुलिस बल को तैनात किया गया है।

गांववालों का आरोप है कि एसडीएम और थानेदार ने सुनिया और उसके पति को धमकी दी थी कि जमीन खाली कर दो नहीं तो बुलडोजर चलवा देंगे।

ज्ञात रहे की वेलस्पन एनर्जी लिमिटेड नाम की निजी कंपनी कटनी में 10 हजार करोड़ रुपये की लागत से 1800 मेगावॉट का पावर प्लांट लगा रही है। इसके लिए कंपनी को 1300 एकड़ जमीन की जरूरत है। कंपनी को अब तक 800 एकड़ जमीन मिल चुकी है। जिसमें से 264 एकड़ जमीन सरकार ने दी है और 539 एकड़ किसानों से ली गई है। अभी कंपनी को 500 एकड़ और जमीन की जरूरत है।

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