बन्दूक की नोक पर विकास नहीं होगा....

छिंदवाड़ा में पुलिसिया  दमन और गिरफ़्तारियों के बल पर किसान आन्दोलन को दबाने, और किसानों को उजाड़ने का विरोध तेज हुआ
मेधा पाटकर, आराधना भार्गव और अन्य 23 गिरफ्तार अन्दोलनकारियों को तत्काल रिहा करों! 
4 नवम्बर की रात को मेधा पाटकर सहित 23 अन्य की छिंदवाडा में हुई गिरफ्तारी से स्पष्ट हुआ है कि “ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट” के सुन्हेरे सपनों के पीछे बन्दूक के नोक पर आम जन का विस्थापन और गैर् कानूनी कॉर्पोरेट लूट का विरोध करने वाले किसानों और सामाजिक कार्यकर्ता को जेल  में डालने का शिलशिला अब तेज होगा. मध्य प्रदेश जन संघर्ष मोर्चा ने इस पुलिसिया दमन का विरोध करते हुये विज्ञप्ति जारी की है, जिसे यहाँ पर प्रकाशित किया जा रहा है

पेंच व्यपवर्तन परियोजना से 31 गाँव और 56000 से ज्यादा किसान परिवारों को अनियमित रूप से और बिना पुनर्वास उजाड़े जाने, इस परियोजना का पर्यावरण मंत्रालय से अनुमति न होना , अदानी पॉवर परियोजना के लिए विस्थापन के विरोध में 2004 से शांतिपूर्ण आन्दोलन चल रहा है . आन्दोलन के नेत्रित्व कर डा.सुनीलम के गिरफ्तारी के बाद परियोजना प्रभावित क्षेत्र में भरी पुलिस बल (1800 से ज्यादा का फोर्स) पहुंचे गया जिस ने 4 नवम्बर से जबरदस्ती किसानों को खदेड़ने कि गोशन कि. इस खबर पर सुश्री मेधा पाटकर , बरगी बाँध विस्थापित सं, नर्मदा बचाओ आन्दोलन के कार्यकर्ता छिंदवाडा पहुंचे . 3 नवम्बर की रात को ही आन्दोलन में सक्रिय वकील, सुश्री आराधना भार्गव को गिरफ्तार किया गया. मेधा पाटकर और अन्य को प्रभावित क्षेत्र पहुँचने से पुलिस द्वारा रोका गया और उन्हें छिंदवाडा में ही गिरफ्तार किया गया और रात को जैल भेजा गया. मेधा बेहन ने कल रात से ही जेल में भूक हरताल चालू कर दिया था.


जन संघर्ष मोर्चा से जुड़े जन संगठन म.प्र शासन द्वारा इस तरह पुलिस के बल पर, सब कानून-नियम को ताक पर रख, कॉर्पोरेट मुनाफे के लिए प्रदेश के किसान और आमजन का बलि चडाने का पूर जोर निंदा करता है. पेंच परियोजना में न सिर्फ विस्थापित होने वाले किसानों का पनार्वास कोई ठिकाना है, बल्कि इस परियोजना का पर्यवानीय अनुमति तक नहीं होने के कारण, गैर कानूनी भी है.


जन संघर्ष मोर्चा मांग करता है कि कॉर्पोरेट घरानो के मुनाफे के किसानों और आमजन कि बलि, प्रदेश के प्राकृतिक संसाधनों का लूट, पुलिस के बल पर करवाना बंद करें. छिंदवाड़ा के परियोजनाएं में जबरन विस्थापन तत्काल रोक ,पारदर्शी प्रक्रिया से कानूनी प्रावधानों के अनुरूप समीक्षा करें, गिरफ्तार व्यक्तिओं को तत्काल रिहा करें , तथा पुलिस बल को तत्काल पेंच प्रभावित क्षेत्र से हटाया जाये.

अलोक अग्रवाल (नर्मदा बचाओ आन्दोलन)

जब्बार भाई (भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन)

अनुराग मोदी (श्रमिक आदिवासी संगठन)

माधुरी (जागृत आदिवासी दलित संगठन)

रिन्चिन (म.प्र. महिला मंच)
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