डॉ. सुनीलम जेल में: फसल कटाई की मोहलत नहीं, धारा 144 और गाँव खाली करने का आदेश

देश के नागरिकों से अपील

मध्य प्रदेश के छिंदवाडा जिले में प्रस्तावित अडानी-पेंच पवार प्लांट परियोजना और पेंच व्यपवर्तन परियोजना के खिलाफ किसान संघर्ष समिति के नेतृत्व में स्थानीय किसान पिछले कई सालों से संघर्षरत है. किसानों की जमीन को जबरन अधिगृहीत किया जा रहा है, डॉ. सुनीलम शुरू से ही इन परियोजनाओं का विरोध कर रहे थे. उनपर जिस मुकदमे में उम्रकैद हुई है, वह पिछले चौदह सालों से चल रहा एक फर्जी मुकदमा था, लेकिन डॉ. सुनीलम के अडानी के विरोध में खड़े होने के बाद मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार ने धारा 120 के तहत षड़यंत्र का केस अलग से जोड़ दिया.

डॉ. सुनीलम को जेल भेजने के बाद जिला प्रशासन ने पुरे छिंदवाडा क्षेत्र में धारा 144 लागू कर दिया है. 4 नवम्बर 2012 से भूमि अधिग्रहण शुरू करने का आदेश देकर लोगों को गाँव खाली करने के लिए धमकाना शुरू कर दिया है. लोग इस जबरदस्ती के खिलाफ इकट्ठा हो रहे हैं. प्रख्यात समाजकर्मी मेधा पाटकर तीन और चार नवंबर को छिंदवाडा के बाम्हनवाड़ा क्षेत्र में किसानों के बीच जाएँगी.

आप सभी साथियों से अनुरोध है कि अडानी-पेंच परियोजना के खिलाफ और साथी डॉ. सुनीलम की रिहाई के लिए इस अभियान में शामिल हों और 3 नवम्बर 2012 को बाम्हनवाड़ा पहुंचे.
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें
मधुरेश (09818905316)
झिंगा वर्मा-बाम्हनवाड़ा (0998188458)
कारपोरेट घरानों द्वारा सरकार और प्रशासन को मनचाहे तरीके से प्रभावित करना सिर्फ रादिया-टेप जैसे बड़े मामलों में ही उद्घाटित नहीं होता और सिर्फ राजनीतिक नेता ही कंपनियों के हाथों नहीं बिकते. ज़मीन पर, समूची व्यवस्था और इसके सभी स्तर के कारिंदों का पूंजी के हाथ बिकना आज एक कडवी सच्चाई बन चुकी है. छिंदवाडा में अडानी-पेंच पावर परियोजना और इसके लिए बनाए जा रहे बाँध के मामले में कंपनी और प्रशासन का यह क्रूर गठजोड सामने आ रहा है. अपनी खादी फसलों की कटाई भर की मोहलत मांग रहे ग्रामीणों को प्रशासनिक बेरहमी का शिकार होना पड़ रहा है. उन्हें सख्त आदेश दे दिया गया है कि वे चार नवंबर तक खेत और गाँव खाली कर दें.

ज्ञात हो कि पेंच नदी पर जो पेंच डायरवर्सन के नाम पर ग्राम माचागोगरा में बांध बनाया जा रहा है इसमें 31 गांव उजड़ रहे है। बांध की प्रोजेक्ट रिर्पोट देखने से ज्ञात होता है कि 31 गांवों के लोगों को ग्राम माचागोरा, बाम्हनवाड़ा, तथा भूतेरा में बसाया जायेगा।

अडानी पेंच पावर प्रोजेक्ट के लिए पानी पेंच परियोजना के अन्तर्गत बन रहे दो बांधों से दिया जाने वाला है, जबकि 31 गांवों की जमीनों का अधिग्रहण जनहित के बहाने किसानों को सिंचाई का पानी देने के उद्देश्य से किया जा रहा है। क्षेत्र के किसान भूमि अधिग्रहण का पुरजोर विरोध कर रहे है।
पेंच व्यपवर्तन के विरोध में बाम्हनवाड़ा ग्राम सभा में 3 दिसम्बर 2010 को प्रस्ताव भी पारित किया जा चुका है परंतु अभी तक इस पर सरकार का ध्यान नहीं गया है। (सलग्ल- 1. ग्राम सभा बाम्हनवाड़ा का प्रस्ताव)। नई परिस्थिति में पेंच परियोजना में अधिग्रहण का विरोध कर रहे किसानों तथा अडानी पेंच पावर प्रोजेक्ट से अपनी जमीन वापस लेने की लड़ाई लड़ रहे किसानों में एकता बन रही है। हालांकि इस बीच अडानी कम्पनी द्वारा बिना पर्यावरण मंजूरी के बाऊण्ड्रीवाल बना ली गई, जमीनों पर कब्जा प्राप्त कर जगह जगह पर गढ्ढे करा लिए गए। जिलाधीश के आश्वासन के बावजूद निर्माण कार्य जारी रहा और पर्यावरण मंत्रालय चुप रहा।

पेंच व्यपवर्तन परियोजना

प्रदेश के छिन्दवाड़ा और सिवनी जिले में पेंच व्यपवर्तन परियोजना हेतु सन् 2003 में 543.20 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति म0प्र0 शासन को प्राप्त हुई थी। योजना आयोग द्वारा योजना वर्ष 2006 में स्वीकृत कर दी गई। जे.बी.आई.सी. से कर्जा प्राप्त करने हेतु भारत सरकार को सन् 2006 में ही प्रस्ताव भेज दिया गया। भारत सरकार ने पुनर्वास और बसावट के कार्यक्रम के लिए 101.35 करोड़ का कार्यक्रम तैयार किया। परियोजना पूर्ण करने हेतु 6 वर्ष का लक्ष्य रखा गया था अर्थात योजना 2012-2013 तक तैयार हो जानी चाहिए थी। अब तक नहर निर्माण का कार्य लगभग 50 प्रतिशत तथा बांध निर्माण का कार्य 5 प्रतिशत ही कराया गया है।

योजना के अनुसार 31 ग्रामों की 7575 परिवार प्रभावित होने वाले हैं तथा 5607.28 हैक्टेयर जमीन डूब में जाने वाली है। परियोजना के दस्तावेजों के अनुसार माचागोरा बांध पेंच नदी पर बनाया जाने वाला हैं। बांध की ऊंचाई 630.2 मीटर प्रस्तावित है। योजना से वार्षिक 96519 हेक्टियर जमीन की सिंचाई प्रस्तावित है।

ग्राम सभा बाम्हनवाड़ा के प्रस्ताव को पढाने के लिए तस्वीर पर क्लिक करें

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