मानवाधिकार संगठनों की डॉ. सुनीलम से मुलाकात

26 अक्टूबर को मध्य प्रदेश की राजधानी  भोपाल की सेंट्रल जेल में किसान नेता डा0 सुनीलम से मिलने चितरंजन सिंह, दीपक भट्ट, संदीप पांडे एवं अनिल चौधरी पहुंचे. उन्होंने भोपाल सेंट्रल जेल में डा0 सुनीलम से मिलने के बाद  एक प्रेसवार्ता को संबोधित किया. पेश  हैं चितरंजन सिंह की यह रिपोर्ट;

26 अक्टूबर को हम डा0 सुनीलम से भोपाल सेंट्रल जेल में जेलर के कमरे में मिले। मुलाकात भोपाल गैस पीड़ित महिला मोर्चा के नेता अब्दुल जब्बार ने जेलर से बात कर निश्चित की थी। लगभग डेढ़ घंटे हम सुनीलम के साथ रहे। सुनीलम सजायाफ्ता कैदी के रूप में जेल में मिले। मोटे काटन के कुर्ते और पायजामा के साथ अपने प्रिय हरे रंग के दुपट्टे को कंधे पर धारण किये हुये थे, जो किसानों का प्रतीक है।

मिलते ही हमने 22 अक्टूबर को इंसाफ कार्यालय में तमाम जनसंगठनों मीटिंग की रिपोर्ट बतायी और आगामी 28 अक्टूबर को होने वाली बड़ी बैठक की जानकारी दी। यह पूछने पर कि बैठक के लिए आपके सुझाव क्या हैं? सुनीलम ने कहा, ‘हम  चाहते हैं कि संघर्ष समिति बने। संघर्ष समिति जनान्दोलनों पर गोली चालन और मृतकों के मारे जाने या घायल होने पर पुलिस-प्रशासन के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज कराने की मुहिम चलाने का उन्होंने आग्रह किया।’ सुनीलम ने बताया कि अब तक हमारी जानकारी में 55 हजार जनान्दोलनों पर आजादी के बाद गोली चलायी गयी है जिसमें सैकड़ों बेगुनाहों की हत्या की गयी है, परंतु एक भी पुलिसकर्मी के खिलाफ आज तक एफ.आई.आर. दर्ज नहीं हुआ, परन्तु मुलतई में जिस जज के सामने मैने यह तथ्य रखा उसने कहा कि इसे सुधार लें- अब तक 84 हजार आन्दोलनों पर गोली चलायी गयी है और एक में भी एफ.आई.आर. दर्ज नहीं हुआ पुलिस प्रशासन के खिलाफ।

मालूम हो कि 12 जनवरी 1998 को फसल नष्ट होने से गुस्साये किसानों के प्रदर्शन पर गोली चलायी गयी जिसमें 24 किसान मारे गए, 150 घायल हुए। किसान-संघर्ष समिति के लाख प्रयास के बावजूद पुलिस पर एफ.आई.आर. दर्ज नहीं किया गया। यह भी तथ्य है कि गोली दोपहर 1 बज कर 10 मिनट पर चलायी गयी और धार 144, 1 बज कर 35 मिनट पर लागू की गयी जिससे साबित होता है कि गोली चालन गैरकानूनी था। किसान मारे गए और सुनीलम ने देशभर के अपने समर्थक, मित्रों का पता-फोन नं. दिया जिनसे इस संघर्ष में मदद ली जा सकती है।

इसके बाद गांधी भवन में हमने प्रेस से बातचीत की, भारी संख्या में प्रिंट व इलैक्ट्रानिक मीडिया वाले आए पर दूसरे दिन एक शब्द किसी अख़बार में नहीं आया। कारण हमने रखा था कि किसान संघर्ष समिति अदानी के पावर प्रोजेक्ट और पेंच परियोजना के खिलाफ आन्दोलन चला रहे थे और केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ के खिलाफ भी अभियान जारी था। अखबार विज्ञापन नीति के चलते खबर नहीं छापते। हम लोगों की प्रेसवार्ता इंसाफ और पीयूसीएल के साथियों ने बुलायी थी उस दिन उ. प्र. के नेता संदीप पांडेय भी प्रेसवार्ता में थे, जो सुनीलम से मिलकर आए थे।
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