गोरखपुर: किसानों का एलान, जान देगें- जमीन नहीं

भूमि अधिग्रहण का विरोध : पैदल मार्च कर किसानों ने गीडा कार्यालय में जड़ा ताला

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के गीडा क्षेत्र में प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण के विरोध में 18 अक्टूबर 2012 को दर्जनों गांवों के हजारों किसान ‘किसान बचाओ आंदोलन’ के बैनर तले सड़क पर उतरे। किसानों ने नौसढ़ चौराहे से गीडा कार्यालय तक पैदल मार्च किया और गीडा कार्यालय पर ताला जड़कर प्रदर्शन किया। पेश है प्रबल प्रताप शाही कि रिपोर्ट; 
 प्रात: 8 बजे से ही नौसढ़ चौराहे पर गांव-गांव से किसानों का हुजूम इकट्ठा होना शुरू हो गया था। 10.30 बजे तक हजारों की संख्या में जुटे किसानों ने किसान बचाओ पदयात्रा शुरू की। किसान ‘नारा लगाते हुए राजघाट, ट्रांसपोर्ट नगर, प्रेमचंद पार्क, रीड साहब की धर्मशाला, शास्त्री चौक, अंबेडकर चौक होते हुए गीडा कार्यालय पहुंचे। गीडा कार्यालय पर किसानों ने मुख्य द्वार पर तालाबंदी कर सभा शुरू कर दी। इस दौरान तीन घंटे तक एसडीएम सदर व गीडा के अधिकारी, कर्मचारी कार्यालय में कैद रहे।


किसानों ने मांग की, कि किसान हित में विगत दिनों जिलाधिकारी द्वारा रजिस्ट्री विभाग को जारी किये गये आदेश (गीडा क्षेत्र की जमीनों की रजिस्ट्री के पूर्व बांड भराया जाए) को निरस्त किया जाए तथा गीडा क्षेत्र के नोटिफायड एरिया को अधिग्रहण से मुक्त किया जाए। किसानों ने जिला प्रशासन को 15 दिन का समय दिया और मांग पूरी न होने पर आर-पार की लड़ाई छेड़ने की चेतावनी दी। जिला प्रशासन की तरफ से उपजिलाधिकारी सदर ने मौके पर पहुंचकर राज्यपाल व मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन लेते हुए कहा कि मांगें न्योचित हैं। किसानों के साथ इंसाफ होगा।

ज्ञात रहे कि विकास के झूठे सपने दिखाकर गोरखपुर सदर व सहजनवां तहसील के 76 गांवों के लाखों किसानों की पचासों हजार एकड़ सोना उगलने वाली जमीन गीडा द्वारा अधिग्रहित कर ली गयी। विकास के नाम पर बड़ी कंपनियों की स्थापना का हौवा खड़ा कर किसानों की जमीन हड़प कर उन्हें भूमिहीन बना देने वाली सरकार आज तक गीडा में कोई बड़ी कंपनी स्थापित नहीं कर सकी। यहां स्थापित अधिसंख्य अतिलघु व कुटीर उद्योग क्षेत्रीय विकास और नौजवानों को रोजगार देने में विफल साबित हुए। विकास के नाम पर यहां स्कूल, कालेज, आवासीय क्षेत्र और दुकानें विकसित की जा रही हैं, जहां बेरोजगार नौजवान 2000-3000 रुपये महीने पर बारह-बारह घंटे खटने को विवश हैं। गीडा के 21 वर्षो के विकास का यही नंगा सच है कि यहां के हजारों किसान भुखमरी के कगार पर पहुंच गये हैं। कुल 22 सेक्टरों वाली इस योजना में अब तक मात्र 7 सेक्टर ही विकसित हो पाये हैं, जिनमें मात्र दो सेक्टर ही औद्योगिक हैं। इन्हीं उपलब्धियों के दम पर प्रशासन गीडा क्षेत्र के हजारों किसानों के खेत व उनके सपने और उनके भविष्य की एक बार फिर बलि लेने जा रहा है। गीडा क्षेत्र के अधिसंख्य गांवों के ग्राम समाज ने भी प्रस्ताव पारित कर गीडा को भूमि देने से इनकार कर दिया है।

सभा को किसान बचाओ आंदोलन के संयोजक मंडल के सदस्य रामानंद पगड़ी बाबा, प्रबल प्रताप शाही, धनंजय, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि भिलोरा रतीन्द्र रंजन पांडेय, ग्राम प्रधान पेवनपुर ब्रह्मदेव निषाद, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि छपिया काली प्रसाद सिंह, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि एकला राममिलन, ग्राम प्रधान गुरौली बलराम, ग्राम प्रधान हरैया मिथिलेश, पूर्व प्रधान सरया हीरालाल, संतोष मणि त्रिपाठी, श्यामकिशुन, विरेन्द्र यादव, अखिलेश तिवारी, आलोक शुक्ला, हीरालाल गुप्ता, गणोश दत्त पाण्डेय, तुफैल अहमद व रामलाल आदि ने संबोधित किया। 
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