जन संसद 2012 में मुलताई का घोषणापत्र

मुलताई में 14 वें शहीद किसान स्मृति सम्मेलन एवं 188 वी किसान महापंचायत के अवसर पर 12 जनवरी 2012 को आयोजित जनसंसद के 5 वे अधिवेशन में देश भर से आये हुये जनान्दोलनों और जन-संगठनों के संघर्षशील समाज कर्मी और बुद्धिजीवी देश पर छाये संकट और सरकारों द्वारा उठाए जनविरोधी कदमों पर घोर चिन्ता प्रकट करते है और नीचे लिखी घोषणाऐं करते है -


घोषणा एक: - देश पर इस समय सबसे बडा संकट यह है कि, देश के संसाधनों - मुख्य रूप से जमीन, किसानों के हाथों से छीनी जा रही है और वह बडे-बडे देशी-विदेशी कारपोरेट घरानों के हाथ में जा रही है । सरकार ऐसे कानून बना रही है । जो आम जन से संसाधनों को कारपोरेट घरानों को हस्तांतरित करने में सहायक हो रहे है । प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण, पुर्नवास और पुर्नस्थापन अधिनियम-2011 ऐसा ही कदम है। इसकी प्रस्तावना में सरकार ने घोषित किया है कि, इन्फ्रास्ट्रªक्चर, औद्योगीकरण, शहरीकरण, और अनेक परियोजनाओं के लिये किसानों की जमीन तो लेनी ही है, उन्हे अच्छा मुआवजा दे दिया जायेगा । किसानों से जमीन और उससे जुडे अन्य संसाधन जैसे जल, जंगल, खादान और पहाड को लेने के लिये खेती को घाटे का सौदा बना दिया है । खेती में लागत - खाद बीज कीटनाशक, डीजल आदि कम्पनीयों के हाथ में चले गये है जिनका दाम हर साल बढाया जा रहा है पर उस अनुपात में खेती के उत्पाद का मूल्य नही बढ रहा है और किसान कर्ज में लद गये है । कई लाख किसानों ने आत्महत्या कर ली है । जमीन हडपने की दूसरी साजिश अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर चल रही है। विश्व अर्थव्यवस्था मूलतः सटटेबाजी पर चल रही है । इस तरह से पैदा हुई नकली पूंजी  को असली पंूजी बनाने के लिये पूंजीपति तरह-तरह से जमीन खरीद रहे है क्योकि जमीन ही असली पूंजी है। इसलिये जमीन के दाम बढते गये है, जिससे किसानों के मन में जमीन छोडने का लालच पैदा हो जाए ।

जनसंसद यह घोषणा करती है कि जमीन कब्जाने की यह साजिश नही चलने दी जायेगी । जमीन अधिग्रहण रोकने के लिये देश के लगभग सभी प्रदेशों में चल रहे आन्दोलनों के संघर्षशील साथियों को जनसंसद बधाई देता है । ये आन्दोलनों विशेष आर्थिक क्षेत्र (एस.ई.जेड) पोस्को जैसी परियोजना, गंगा एक्सप्रेस वे, इण्डस्ट्रªीयल कॉरीडार, कोस्टल कॉरीडार, तापबिजली कारखाने, परमाणु बिजली कारखाने और तरह-तरह की खादानों के खिलाफ गांवों के स्त्री-पुरूष बहादुरी के साथ लड रहे है और नन्दीग्राम, सिन्दूर, हरिपुर, रायगढ, चन्द्रपुर, हजारीबाग, जैसे अनेक स्थानों पर आन्दोलन ने भूमि अधिग्रहण को रोका । जनसंसद से जुडे सभी जनआन्दोलन मिलकर पूरी ताकत लगाऐगें कि, ये आन्दोलन सफल हो और भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2011 रदद हो । यदि सरकार जन विरोधी और जन विरोधी कदम उठाना बंद नही करती और दमन का रास्ता अख्तियार करती है। तो जनसंसद देश में सिविल नाफरमानी का आन्दोलन छेडेगी। जनसंसद की यह भी कोशिश होगी कि, संसाधनों पर जन-समुदाय-ग्रामसभा का स्वामित्व और निर्णय करने का अधिकार स्थापित हो।

घोषणा दो: - (खुदरा बाजार के विदेशी पूंजी निवेश) - खेती के बाद देश की बडी आबादी लगभग 25 करोड की आजीविका खुदरा व्यपार से चलती है, अमरीका और यूरोप की कम्पनीयों जैसे वालमार्ट, अमरीका, टैस्को (इंग्लैण्ड) कारफूर(फ्रांस), मेट्रोएजी (जर्मनी) और उनकी सरकारों के दबाब में भारत सरकार ने मल्डीब्रॉंड रिटेल में 51 प्रतिशत तथा सिंगिल ब्रांड रिटेल में 100 प्रतिशत विदेशी निवेश का निर्णय तो लिया फिलहाल संसद और देश भर में विरोध के कारण सरकार ने फैसला टाल दिया लेकिन सरकार इसे लागू करने के लिये कृत संकल्प है । तर्क यह दिया जा रहा है कि किसानों/उत्पादको और उपभोक्ताओं की बीच देशी बिचौलिये लूट करते है । खुदरा व्यपार की बडी कम्पनियों से किसानों और उपभोक्ताओं दोनों को लाभ होगा । पर असलियत यह है कि, इस फैसले से छोटे बिचौलियों के स्थान पर बडे कारपोरेट बिचोलियें बैठ जायेगें, जो कालान्तर में उत्पादकों और उपभोक्ताओं दोनों को लूटेगंे जैसा कि विदेशों का अनुभव है ।

जनसंसद घोषणा करता है कि, किसानों, छोटे-मझोले व्यापारी और उपभोक्ताओं के बीच जागरूकता अभियान चालू किया जायेगा और सारे जनन्दोलन और संगठन व्यापारियों किसानों और युवाओं के संगठनों के साथ मिल कर विदेशी खुदरा कम्पनियों को कारोबार नही करने देंगे । यह भी कोशिश की जायेगी कि किसानों और अन्य उत्पादकों के अपने बाजार बने, स्टोरेज की सुविधा उनके पास हो और वे अपनी प्रोसेसिंग इकाईयां चलायें ।

घोषणा तीन:- (परमाणु उर्जा) मार्च 2011 में जापन के फूकशिमा में परमाणु प्लांट के भीषण हादसे से पूरी दुनिया हिल गयी और परमाणु उर्जा के विरोध में व्यापक आन्दोलन खडे हो गये। जर्मनी, इटली, स्विटजरलैण्ड जैसे अनेक देशों ने परमाणु प्लॉंट बन्द करने का फैसला कर लिया । जापान के 54 रिएक्ट में केवल 11 चल रहे है जिन्हे भी इस साल बन्द कर दिया जायेगा । फ्रांस से जहां 75 प्रतिशत बिजली उर्जा से बनती है यह मुददा अगले वर्ष के राष्ट्रपति चुनाव का प्रमुख मुददा बन गया है। यह दुर्भाग्य की बात है कि, भारत की सरकार परमाणु प्लॉंट लगाने पर अडी हुई है पर कुडानकुलम, (तामिलनाडु) जैतापुर (महाराष्ट्र) फतेहबाद (हरियाणा) मीठी बिरदी (गुजरात) पर बडे, विरोध आन्दोलन चल रहे है । जनसंसद देश को परमाणु मुक्त करने की घोषणा करता है और परमाणु प्लॉंटो के खिलाफ चल रहे आन्दोलनों को राष्ट्रीय सर्मथन देकर मजबूत बनाने के लिये कदम उठाऐगा ।

घोषणा -4 जनसंसद 12 जनवरी 1998 को मुलताई के किसान आंदोलन पर पुलिस गोलीचालन के दोषी अधिकारियों पर हत्या के मुकदमें दर्ज करने मुलताई तहसील कार्यालय को स्मारक घोषित करने, किसानों पर लादे गए फर्जी मुकदमें वापस लेने तथा शहीद परिवारों  एक आश्रित को स्थाई शासकीय नौकरी देने के लिए किसान संघर्ष समिति द्वारा किए जा रहे संघर्ष को समर्थन का ऐलान करती है । पहले कांग्रेस सरकार तथा अब भाजपा सरकार द्वारा उक्त मुददों पर कारवाई ना किए जाने को जनसंसद दोनों पार्टियों का किसान विरोधी रवैया मानती है । भाजपा सरकार द्वारा छिन्दवाडा में अडानी पंेच पावर प्रोजेक्ट को 52 एकड छोटे झाड का जंगल आवंटित करने, बैतूल मुलताई सहित प्रदेश के सभी जिलों में भाजपा कार्यालय हेतु करोडों रूपयों की जमीन आवंटित करने देश में 10 हजार हेक्टेयर जमीन किसानों से लेकर कंपनियों के साथ एम.ओ.यू. साइन करने (आवंटित करने) के कदम का जनसंसद विरोध करती है, प्रदेश में किसानों की जमीन की भू-अर्जन की कारवाई के खिलाफ संघर्ष तेज करने का ऐलान करती है ।

घोषणा - 5 प्रदेश सरकार द्वारा गत 2 वर्षो से खेती को लाभकारी बनाने की नारेबाजी की जा रही है । वस्तुस्थिति यह है कि 6 वर्ष पहले डी.ए.पी. खाद की बोरी 366 रू. की मिलती थी, जिसे अब किसानों को 1000 रू. प्रति बोरी, यूरिया खाद की जो बोरी 120 रू. प्रति बोरी उसे 450 रू. प्रति तथा सुपर फास्फेट खाद 75 रू. प्रति बोरी की जगह 300 रू. प्रति बोरी, 31 रू. प्रति लीटर डीजल अब 45 रू. प्रति लीटर की दर पर बाजार से खरीदने के लिए मजबूर होना पड रहा है। बिजली के स्थाई कनेक्शनों का रेट 30 प्रतिशत बढा दिया गया है। दूसरी तरफ गेहूं का दाम 1250 रू. प्रति क्विटल से घटकर 950 रू. प्रति क्विटल हो गया है। इस तरह किसाना करना करना पहले से अधिक घाटे का सौदा हो गया है। जिसके चलते प्रदेश में आत्महत्या की घटनाओं में तीव्र वृद्धि हुई है । जनसंसद किसानों की आत्महत्या मुक्त भारत के निर्माण हेतु संकल्प बद्ध है जनसंसद किसानों से अपील करती है कि किसानों को आत्महत्या के लिए मजबूर करने वालों सरकारो तथा व्यवस्था को बदलने के लिए संगठित होकर संघर्ष को तेज करे।

जनसंसद प्रदेश में प्राकतिक आपदाओं के चलते विगत वर्ष खराब हुई फसलों का फसल बीमा के मुआवजे का भुगतान ना किए जाने को सरकार की बीमा कम्पनीयों के साथ मिली भगत का परिणाम मानती है । सरकार द्वारा दिया जा रहा अनुदान किसानों को होने वाले नुकसान का 10 प्रतिशत भी नही होता। जनसंसद किसानों की प्रति एकड पैदावार के बाजार दाम से दुगना मुआवजा देने के लिए संघर्ष का एलान करती है ।



















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