मानेसर के बाद बावल में बवाल: ज़मीन के मुद्दे पर पुलिस और किसानों में ठनी

गोरखपुर में भी सुलग रहे हैं हालात
हरियाणा के ही फतेहाबाद जिले में प्रस्तावित गोरखपुर परमाणु पावर प्लांट के खिलाफ चल रहा किसानों का आंदोलन आगामी 18 अगस्त को दो साल पूरे कर लेगा. परन्तु प्रशासन किसानों की ज़मीन कब्जाने पर आमादा है. इस सन्दर्भ में 17 जुलाई को प्रोजेक्ट के पर्यावरणीय प्रभावों के आकलन हेतु जनसुनवाई का आयोजन किया गया था, जिसको किसानों के जबरदस्त विरोध के कारण चालीस मिनट में ही समेटना पडा. किसानों का साफ़ कहना था कि जब किसान जमीन देना ही नहीं चाहते तों जनसुनवाई की नौटंकी क्यों हो रही है. ग्रामीणों ने जनसुनवाई के कायदों के सरेआम उल्लंघन को भी मुद्दा बनाया था. परन्तु प्रशासन किसानों की मांगों पर ध्यान देने की बजाय जमीन का अवार्ड घोषित कर देता है और किसानों को जबरदस्ती चेक देने लग जाता है. गोरखपुर गाँव में अगर प्रशासन जबरदस्ती घुसाने की कोशिश करता है तों सिंगुर जैसे हालात निश्चित तौर पर बनेंगे.

हरियाणा के रेवाड़ी जिले के बावल क्षेत्र के गांव आसलवास में 22 जुलाई को भूमि अधिग्रहण के विरोध में 51 गांवों की महापंचायत बुलाई गई थी. जिसमें संघर्ष की भावी रणनीति तय की जानी थी. इसमें देशभर से किसान नेताओं को बुलाया गया. तय समय पर सुबह दस बजे महापंचायत की कार्रवाई शुरू हुई. वक्ताओं ने साफ कहा कि वे जान दे देंगे पर जमीन का एक टुकड़ा तक नहीं देंगे.
संघर्ष समिति ने भी साफ तौर पर चेतावनी दी कि यदि एक बजे तक सरकार की ओर से उनसे बातचीत नहीं की जाती है तो वे कोई भी कठोर कदम उठा सकते हैं. महापंचायत के इस फरमान के बाद भी प्रशासन की ओर से कोई भी अधिकारी बातचीत के लिए नहीं आया, लेकिन पुलिस की ओर से पूरी तैयारी शुरू कर दी गई. आंसू गैस, फायर ब्रिगेड सहित बड़ी तादाद में फोर्स को महापंचायत स्थल पर बुला लिया गया.

एक बजते ही महापंचायत में किसानों ने राष्ट्रीय राजमार्ग जाम करने का निर्णय लिया. हजारों की तादाद में ग्रामीण जैसे ही हाइवे को जाम करने के लिए कूच करने लगे पुलिस ने लाठीचार्ज शुरू कर दिया. देखते ही देखते ग्रामीणों पर आंसू गैस, पानी की बौछार शुरू कर दी गई.


ग्रामीणों और पुलिस के बीच जमकर लाठीचार्ज, पत्थरबाजी हुई. माहौल बिगड़ता देखकर पुलिस ने फायरिंग की. तीन लोगों को गोलियां भी लगीं है. और लगभग 50 किसान घायल हुये है. पुलिस के भागते ही ग्रामीणों ने हाइवे पर कब्जा जमा लिया.

ध्यान रहे की 15 जुलाई को भी भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे किसानों पर पुलिस ने लाठियां भांजनी शुरू कर दी. तब 15 के करीब महिला व पुरुष घायल हो गए. एक महिला की हालत गम्भीर होने पर उसे दिल्ली रैफर कर दिया गया है.

ज्ञात रहे कि हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की ओर से रेवाड़ी जिले के 21 गांवों की लगभग 3700 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है जिसके विरोध में किसान पिछले डेढ़ माह से आंदोलनरत हैं.
भूमि अधिग्रहण संघर्ष समिति के सदस्य गुरदयाल नम्बरदार कहते कि किसान अपनी जमीन बचाने की लड़ाई लड़ रहा है परन्तु सरकार किसानों के आंदोलन को कुचलने के लिये एक ही सप्ताह में दो-दो बार पुलिस से हमला करवाती है. वह आगे कहते है कि जान दे देंगे, जमीन नहीं देंगे.




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