भूमि अधिग्रहण के विरोध में महेन्द्रगढ के किसानों का धरना एवं भूख-हड़ताल शुरू


महेन्द्रगढ़ के पास रिवाड़ी रोड पर 28 मई 2012 से निकटवर्ती गांव रिवासा और माजरा खुर्द के किसान अपनी उपजाऊ भूमि बचाने के लिए धरने पर बैठे हैं 10 जून 2012 से किसानों ने भूमि अधिग्रहण के विरोध में भूख हड़ताल शुरू कर दी है। इसी के साथ किसानों ने चेतावनी दी है कि वे किसी भी कीमत पर अपनी उपजाऊ भूमि का अधिग्रहण नहीं होने देंगे।


उल्लेखनीय है कि महेन्द्रगढ़ के समीपवर्ती गांव रिवासा और माजरा खुर्द के किसानों की लगभग 78 एकड़ भूमि में नई अनाज मण्डी और सब्जी मण्डी का निर्माण करने के लिए भूमि अधिग्रहण हेतु धारा चार का नोटिस जारी किया जा चुका है। नोटिस जारी होने के बाद प्रभावित किसानों ने किसान संघर्ष समिति का गठन करके भूमि अधिग्रहण के विरोध में अपना धरना शुरू कर दिया । धरने के ग्यारहवें दिन तक राज्य सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया देखने को नहीं मिली जिसके कारण किसानों ने अपने धरने को भूख हड़ताल में तबदील कर दिया है ।  किसानों ने यह भी कहा कि यदि राज्य सरकार महेन्द्रगढ़ में नई अनाज मण्डी व सब्जी मण्डी बनाना चाहती है तो पालिका की सैकड़ो एकड़ बंजर भूमि खाली पड़ी है जिस पर बिना किसी व्यवधान के दोनों मण्डियों का निर्माण किया जा सकता है। यद्यपि महेन्द्रगढ़ में अनाज मण्डी और सब्जी मण्डी सही जगह पर चल रही है और यहां के लोग भी यही चाहते हैं कि ये दोनों मण्डिया अपने-अपने स्थान पर इसी प्रकार चलती रहें।

धरने पर बैठे किसानों को उनके स्थल पर पहुंचकर हजकां नेता एवं पूर्व सांसद धर्मपाल सिंह मलिक, भाजपा नेता रामबिलास शर्मा, इनेलो विधायक राव बहादुर सिंह, जिला परिषद् प्रमुख सुरेन्द्र कौशिक, राव रमेश पालड़ी, राव अमर सिंह, धोलपोश गौशाला के प्रधान दयाशंकर तिवाड़ी आदि नेता अपना समर्थन देकर सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण करने की कार्रवाई पर विरोध जता चुके हैं।

उल्लेखनीय है कि यह प्रदेश का दूसरा आंदोलन है जो गोरखपुर परमाणु पॉवर प्लांट विरोधी किसानों की तरह किसी भी कीमत पर अपनी उपजाऊ भूमि का अधिग्रहण का विरोध कर रहा है

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