सड़क चौड़ीकरण किसके हित में: कम्पनी या किसानों के ?


इस समय पूरे देश में राष्ट्रीय राजमार्गों के चौंड़ीकरण का कार्य जोरशोर से चल रहा है। 2 लेन को 4 लेन, 4 लेन के राष्ट्रीय राजमार्ग को 6 लेन का बनाया जा रहा है। साथ ही साथ राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे बसे शहरों और बाजारों के बाहर से बाईपास भी बनाया जा रहा है। बाजारों के बाहर से बनने वाले बाईपास के किनारे की जमीनों का अधिग्रहण करके उसे कारपोरेट घरानों को दिया जायेगा, जो उस जमीन का उपयोग अपने तरीके से करेंगे। इस योजना के कारण लाखों-लाख किसानों की खेत की जमीन अधिग्रहित तो होगी ही, उनको विस्थापित भी होना पड़ेगा। यह सड़कों का चौड़ीकरण कृषि में निजी पूंजी निवेश का पहला चरण है। यह सड़कों का चौड़ीकरण तथा बाजारों के बाहर से बाईपास बनाकर आवागमन को बाधा रहित (नॉन स्टाप-वे) बनाया जा रहा है, जहां कोई रेलवे क्रासिंग, चौराहें और बाजारों की भीड़भाड़ नहीं होगी और माल दृतगति से एक जगह से दूसरी जगह तक जल्दी से पहुंचाया जा सकता है। यह विचारणीय विषय है कि किस वस्तु को जल्द से जल्द बाजार में उतारने के लिए यह बाधा रहित सड़कें बनायी जा रही हैं। हम लोग जानते हैं कि पक्का माल (औद्योगिक माल) लोहा, कपड़ा, दवा, सीमेंट, मशीनरी, कोयला आदि जो जल्दी से खराब नहीं होता और बाजार की कीमतों में जल्दी-जल्दी उतार व चढ़ाव भी नहीं होता, वह अगर एक दो दिन देर से भी पहुंचा तो कोई फर्क नहीं पड़ता; क्योंकि पक्के माल का मूल्य लम्बे समय तक स्थिर रहता है। वहीं कृषि उत्पाद (कच्चा माल) का रेट मण्डियों में हर घन्टे बदलता रहता है, साथ ही साथ कुछ कृषि उत्पाद ऐसे भी होते हैं जिसका उपभोग अगर एक या दो दिन के अंदर न कर लिया जाय तो वह खराब या नष्ट हो जाते हैं जैसे सब्जी, फल, दूध आदि। इस उत्पाद को तुरन्त मण्डियों से बाजार में पहुंचना चाहिए। इन्हीं खाद्य पदार्थों की व्यापार करने वाली कम्पनियों के लिए बाधा रहित तीव्रगामी राष्ट्रीय राजमार्ग बनाये जा रहे हैं। यह खाद्य पदार्थ का व्यापार करने वाली कम्पनियां ही तय करेंगी कि किसान क्या पैदा करेगा। यह कम्पनियां किसानों को धन, तकनीकी सिंचाई की व्यवस्था भी करेंगी। धीरे-धीरे भारत का किसान अपने मन से किसी चीज का उत्पादन नहीं कर सकेगा। धीरे-धीरे वह इन विशालकाय खाद्यान्न व्यापार करने वाली कम्पनियों के ऊपर निर्भर हो जायेगा। सीधी और सरल भाषा में कहा जाय तो किसान इन पूंजीपतियों के गुलाम हो जायेंगे।


उदाहरण के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग 56 जो वाराणसी से सुल्तानपुर होते हुए लखनऊ जाता है, उस राजमार्ग पर सुल्तानपुर जिले में एक बाजार कोइरीपुर है जहां बाईपास प्रस्तावित है उस वार्ड के किनारे दुनिया का सबसे धनी पूंजीपति बिलगेट्स की सब्जी मण्डी बनाने की योजना है। 2011 में बिलगेट्स ने अपने सहयोगियों के साथ कोइरीपुर का 3 दिन का दौरा किया था। वहां उसने सब्जी पैदा करने वाले किसानों से सम्पर्क किया और सब्जी उगाने, बेचने, उससे होने वाली आमदनी आदि के बारे में चर्चा की। उसने वहां के सब्जी उगाने वाले किसानों को जो परम्परागत तरीके से सब्जी पैदा करते हैं, उनको 15 दिन पहले सब्जी की फसल कैसे तैयार की जा सकती है, इस तकनीक की जानकारी दी। साथ ही साथ इसके लिए जिन वस्तुओं की जरूरत पड़ती है उसका वितरण भी किया। कुछ किसानों को बिल गेट्स ने प्रशस्ति पत्र भी दिया।

बिल गेट्स द्वारा जो कोइरीपुर में सब्जी मण्डी का निर्माण किया जायेगा, अगर उस क्षेत्र के किसान सब्जी पैदा न करें तो उसके मण्डी खोलने का औचित्य ही क्या होगा। जब मण्डी बनेगी तब उस क्षेत्र के किसानों को अधिक आमदनी का लालच देकर कम्पनी द्वारा केवल सब्जी की ही खेती कराई जायेगी। साथ ही साथ किसानों के साथ कम्पनी एग्रीमेंट भी करेगी, जिससे किसान सब्जी के अलावा दूसरा कुछ उत्पादन न कर सकें। कुछ ही सालों में क्षेत्र के किसान कम्पनी के अधीन हो जायेंगे और कम्पनी की मर्जी से ही उत्पादन करेंगे।

दूसरी जो बात है बाधारहित (नान स्टाप-वे) राजमार्ग की तो वह बहुत ही कम समय में कोइरीपुर से वाराणसी हवाई अड्डा जो लगभग 100 किमी है वहां अपना माल पहुंचा सकता है। वहीं किसानों से अगर 10 रु. किलो सब्जी खरीदेगा तो शाम को वही ताजी सब्जी दिल्ली और मुम्बई शहरों में 40 से 50 रु. किलो तक बेचेगा। जो लोग यह समझते हों कि इससे किसानों को लाभ मिलेगा, वह भ्रम में हैं। इसका सम्पूर्ण लाभ कम्पनी लेगी। किसान को अपनी लागत निकाल पाना भी मुश्किल होगा। इसको एक उदाहरण द्वारा समझा जा सकता है। गेहूं का मूल्य सरकार ने 12.85 रु. प्रति किलो तय कर रखा है लेकिन किसानों का गेहूं 9.30 से 10 रु. प्रति किलो खरीद कर दिल्ली में 20 रु. प्रति किलो आटा बेच रहे हैं। ठीक दुगने दाम पर। इससे यह समझा जा सकता है कि वास्तव में इस सड़क का असली लाभ कौन लेगा और यह सड़क का चौड़ीकरण किसके लिए हो रहा है। किसान तो दोनों तरफ से गया। सड़क के चौड़ीकरण और बाईपास में उसकी जमीन और घर भी गया। बचे किसान को उसके उत्पाद का उचित मूल्य भी नहीं मिलेगा। सारा लाभ इन बड़े-बड़े उद्योगपतियों के हिस्से में चला जायेगा।

राष्ट्रीय राजमार्गों के चौड़ीकरण और बाईपास में जो कृषि भूमि और आवास किसानों के अधिग्रहित होने हैं इसके खिलाफ किसान एकजुट हो रहे हैं और कहीं-कहीं धरना, प्रदर्शन, रैली भी कर रहे हैं। इस अधिग्रहण के खिलाफ कृषि भूमि बचाओ मोर्चा उ. प्र. किसानों को संगठित कर रहा है।
- अरुण सिंह, कृषि भूमि बचाओ मोर्चा उ. प्र.

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