लुहरी परियोजना के विरोध में जनसभा


लुहरी जल विद्युत परियोजना की दोहरी सुरंगें लाएंगी प्रदेश  में विनाश 
सतलुज बचाओ जन संघर्ष समिति, मंडी ज़िला के अनुसार लगभग 10,000 सुरंग प्रभावित परिवारों को परियोजना प्रभावित परिवारों की सूची से बाहर रखा गया है सतलुज बचाओ जन संघर्ष समिति, मंडी ज़िला, (हि.प्र) ने एक बार फिर लुहरी जल विद्युत परियेाजना के सुरंग प्रारूप के प्रति अस्वीकृति जाहिर की। 

24 नवंबर 2011 को 11 बजे लुहरी परियोजना की सुरंग प्रभावित क्षेत्र की 10 पंचायतों से लगभग 150-200 लोग कोटलू में इकट्ठा हुए और उन्होंने उनके गांवों व परिवारों के नाम परियोजना प्रभावित परिवारों की सूची में शामिल न किए जाने के विषय में पुरजोर विरोध व्यक्त किया।

उनकी प्रमुख चिंता का कारण यह है कि विश्व में किसी भी बांध पर बनाई गई सुरंगों में से सबसे लंबी प्रस्तावित सुरंग लुहरी परियोजना में बनाई जा रही है, जो कि 38 किमी लंबी है। इससे पहले बनी रामपुर और नाथपा झाकड़ी परियोजनाओं, जो इस इलाके से लगते हुए क्षेत्रांे में बनी हैं, के अनुभवों से स्पष्ट हो चुका है कि ऐसी परियोजनाओं के लिए बनाई जा रही सुरंगें स्थानीय लोगों के लिए अभिशाप हैं - इससे उनके भूमिगत पानी के स्रोत, सुरंग निर्माण के दौरान ब्लास्टिंग के कारण घरों में दरारें आना, पीने और सिंचाई के पानी के स्रोतों का सूख जाना, खनन और मलबे के कारण उड़ने वाली धूल से खेती और फलों के उत्पादन में भारी गिरावट और इन पहाड़ों की जड़ें हमेशा के लिए ढीली होने जैसे गंभीर परिणाम होते हैं।

लुहरी परियोजना के लिए प्रस्तावित 38 किमी लंबी दोहरी सुरंगों के कारण लगभग 80 गांवों में कम से कम 10,000 की जनसंख्या विस्थापित हो जाएगी, लेकिन इनका नाम एसजेवीएनएल द्वारा प्रकाशित परियोजना प्रभावित परिवारों की सूची में शामिल नहीं है। इसे संघर्ष समिति ने परियेाजना प्रभावों को कम करके दिखाने की एसजेवीएनएल की एक चाल बताया, क्योंकि यदि इसके असल प्रभावित परिवारों की सूची को सार्वजनिक रूप से व्यक्त कर दिया गया, तो इस परियेाजना को कभी भी विधिसम्मत स्वीकृति नहीं मिल सकती ।

संघर्ष समिति के सचिव नेक राम शर्मा ने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, भारत सरकार से पुनः आग्रह किया कि वे लुहरी परियोजना के इस दोहरी सुरंग वाले प्रारूप को बिल्कुल स्वीकृति न दें। उनकी यह मांग मंडी ज़िले के चुआस्सी बगड़ा क्षेत्र, खन्योल बगड़ा और स्यांज बगड़ा क्षेत्र के लोगों द्वारा अनुमोदित की गई।

ज़िला परिषद सदस्य, श्री श्याम सिंह चौहान ने ध्यान दिलाया कि ईआईए रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से लिखा है कि यह क्षेत्र भौगोलिक दृष्टि से कमज़ोर है। और यही कारण बता कर दोहरी सुरंगों का प्रस्ताव रखा गया है। फिर स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार इस सुरंग क्षेत्र के ऊपर बसे लोगों पर होने वाले प्रभावों पर कोई ध्यान क्यों नहीं दे रहे और क्यों इस परियोजना का समर्थन कर रहे हैं?

यह सभी मुद्दे परियेाजना के लिए आयोजित जन सुनवाई में अगस्त 2011 में भी उठाए गए थे। यहां तक कि संघर्ष समिति ने एक जन हित याचिका हाई कोर्ट को भेजी थी जिसमें इस जन सुनवाई की वैधता पर सवाल उठाया गया था, उसे हाई कोर्ट ने वाद के रूप में दाखिल कर लिया है। इस याचिका में यही मुख्य मुद्दा उठाया गया है कि ईआईए रिपोर्ट में सुरंग प्रभावित क्षेत्र के मुद्दों को शामिल नहीं किया गया है।

इस आम बैठक में भाग लेने वाले व अन्य वक्ता थे - सुंरद लाल (प्रधान, स्यांज बगड़ा), रूप लाल शर्मा (प्रधान, नांज), रति राम (प्रधान, गवालपुर), बीनू राम (प्रधान, सराहन), चंद्र मुनि (उप प्रधान, सराहन), कौल राम (प्रधान, युवक मंडल तैब्बन), मान दत (उप प्रधान, युवक मंडल तैब्बन), रमेश (उप प्रधान, खादरा), शौट पंचायत, परलोग, बिंदला, चौड़ी धार पंचायतों से आए विभिन्न लोग। इन सभी लेागों ने मिलकर नारा बुलंद किया- ‘‘मिट्टी, पानी ,पत्थर, पेड़, मत करो तुम इनसे खेल’’
-नेकराम शर्मा
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