कछुआ सेंचुरी विरोधी संघर्ष

पुलिस व किसानों में छापामार संघर्ष: लाठी चार्ज, हवाई फायरिंग के जवाब में पथरावपूर्वी उ.प्र. में गंगा एक्सप्रेस वे विरोधी आंदोलन, इलाहाबाद जिले के मेजा तथा करछना के किसानों के संघर्षों के साथ ही साथ वाराणसी जनपद में चंदौली क्षेत्र के डुमरी गांव एवं उसके आसपास कछुआ-सेंचुरीबनाने के लिए गंगा तट की भूमि के अधिग्रहण के सरकारी प्रयासों के विरोध में किसान, संत महात्मा तथा समाजसेवी व राजनीतिक दल संघर्ष के रास्ते पर उतर आये हैं।


इस संघर्ष ने दिसंबर 2011 के पहले हफ्ते में एक आकार लेना शुरू कर दिया था। वास्तव में डुमरी गांव की जिस जमीन को कछुआ-सेंचुरी बनाने हेतु अधिग्रहीत करने की योजना है उस जमीन पर तीन लोगों का दावा है- (1) वन विभाग (2) कबीर मठ/सद्गुरू आश्रम (3) वे स्थानीय किसान जो इस जमीन पर खेतीबारी करते हैं। अतएव कबीर मठ के साधु संत और स्थानीय किसान मिलजुल कर संघर्ष चला रहे हैं।

डुमरी गांव के इस मामले पर स्थानीय किसानों तथा मठ के साधु संत अपना अनशन शुरू करके 10 दिसंबर को आत्मदाह की घोषणा कर चुके थे। शांतिपूर्ण चल रहा अनशन उस वक्त हिंसक मोड़ पर पहुंच गया जब 7 दिसंबर को सिटी मजिस्ट्रेट ने बिना अनुमति के अनशन करनेके आरोप में अनशनकारियों को खदेड़ने के लिए हल्का बल प्रयोग किया। इसके असफल रहने पर पी.ए.सी. एवं अतिरिक्त सुरक्षा बलों को बुलाकर अनशनकारियों पर लाठीचार्ज कराया गया। अनशन- कारियों और उनके समर्थकों ने लाठी चार्ज करते तथा हवाई फायरिंग करते पुलिस बल पर पथराव किया। इस मारपीट, लाठीचार्ज, हवाई फायरिंग की घटना में पुलिस एवं पी.ए.सी. के जवानों समेत 18 लोग जख्मी हो गये। हालात की गंभीरता को देखते हुए डी.एम. तथा आई.जी. ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला। आंदोलन जारी रहने का निर्णय यथावत है।

7 दिसंबर को लाठीचार्ज करने से पूर्व पुलिस को महिलाओं की मोर्चेबंदी का भी सामना करना पड़ा। महिलाओं को चकमा देकर ही पुलिस वाले अनशनकारियों तक पहुंच पाये थे। 

इस आंदोलन के समर्थन में निषादराज सेवा समिति, किसान संघर्ष समिति के लोग भी सक्रिय हैं। डोमरी पड़ाव, सेमरा, कटेसर आदि गांवों में जनजागरण यात्रा निकालकर तथा डी.एफ.ओ. का पुतला फूंककर आंदोलन को गति देने का प्रयास किया गया है। -सुरेन्द्र, वाराणसी
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