हरिपुर नाला लघु जल विद्युत् परियोजना में हुई अनियमितताओं की जॉच होगी


हरिपुर नाला लघु जल विद्युत् परियोजना 1.5 मेगावॉट पर हिमाचल हाई कोर्ट की राजीव शर्मा की खण्ड पीठ  ने सात मार्च  2012 के अपने फैसले  में इस परियोजना की    स्वीकृतियों व अनापत्ति  प्रमाण पत्रों की फिर से जाँच के आदेश दिए हैं। इंटर कांटिनेंटल प्राईवेट लिमिटिड -हैदराबाद द्वारा बनाई जा रही इस परियोजना का स्थानीय तीन ग्राम पंचायतें हलान -1, सोएल  और कर्जां  पिछले कई वर्षों से विरोध कर रही हैं। लम्बे आन्दोलन के बाद इस मसले को जन-जागरण संस्था  हाई कोर्ट ले गई, जिस पर यह फैसला  आया है।


ग्राम  पंचायत  हलान -1 और सोएल ने 4 अप्रैल 2010 को  ग्राम सभा में सर्वसम्मति से  इस परियोजना को रद्द करने  का प्रस्ताव पारित किया तथा 12 मार्च 2010 को कम्पनी को काम रोकने  का आदेश पंचायत ने दिया। इसी तरह  का  विरोध प्रस्ताव ग्राम पंचायत कर्जा में भी पारित किया जा चुका था।

12 मार्च 2010 को जिलाधीश कुल्लू के कार्यालय के बाहर तीन पंचायतों  के 2000 हजार किसानों ने परियोजना के विरोध  में प्रदर्शन किया तथा इसे तुरंत प्रभाव से बंद करने की मांग की गई। मुख्य मंत्री हिमाचल सरकार को मांग पत्र भेजा  गया। लोगों के भारी विरोध के कारण परियोजना का काम रोक दिया गया तथा सरकार ने जाँच के आदेश दिए। एस डी एम कुल्लू  की अध्यक्षता में जाँच कमेटी का गठन किया गया। इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कम्पनी के  हक में फैसला  दिया । रिपोर्ट में पंचायत व लोगों द्वारा पेश किए गए सभी साक्ष्यों को शामिल नहीं किया गया। इस झूठी रिपोर्ट ने अधिकारियों की कम्पनी से मिलीभगत जगजाहिर कर दी। लोगों ने रिपोर्ट का भारी विरोध किया।

इस रिपोर्ट के बाद 28 जुलाई 2010 को कम्पनी ने फिर से काम शुरू कर दिया और 31 हरे पेड़ काट दिए। 7 अगस्त 2010  को मनाली में जलसा किया गया जिस में  जिलाधीश से काम रोकने की मांग की गई। उस समय तक  कंपनी के नाम पर भूमि की लीज नहीं थी तथा बिना वन हस्तांतरण की पूरी प्रक्रिया  के ही वन भूमि से हरे पेड़ काट दिए गए थे। लोगों के  विरोध ने कम्पनी को तब से मौके पर आज तक  काम नहीं करने दिया है जिस कारण स्थानीय लोगों पर पुलिस द्वारा  कई  झूठे  केस बनाए गए हैं। 

2010 के अंत में मामला कोर्ट में गया। हाई कोर्ट शिमला ने इस केस में अपने 7-3-2012 के फैसले में  जन-जागरण  संस्था  को आदेश दिया कि जिलाधीश कुल्लू को परियोजना की स्वीकृति में हुई धांधलियों को उजागर करते हुए आवेदन करे। जिलाधीश को आदेश किए गये कि एस डी  एम तथा सभी संम्बध विभागों की कमेटी का दोबारा  गठन करे जो मौके पर जाकर जन-जागरण संस्था की आपत्तियों को सुने। आदेश में यह भी कहा गया है कि जिलाधीश कुल्लू की अनुशंसा में व अनापत्ति प्रमाण पत्र  जारी करने में अगर जरूरी प्रावधानों की अवहेलना हुई है तो उन सभी दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।  जिलाधीश ने 25 मई 2012 को यह सुनवाई नगर-कुल्लू में रखी थी।
इस परियोजना के विरुद्ध  निम्न आपतियां हैं -
हरिपुर नाले में परियोजना की डी पी आर के मुताबिक 800 LPS (लीटर प्रति सेकंड )  पानी  उपलब्ध है।
  1.  इस में लोगों की स्थानीय वर्तमान जरूरत के लिए 250 LPS  पानी  दर्शाया  गया है जिस में  से  200स्च्ै  सरकारी मत्स्य फार्म के लिए व इस के अतिरिक्त दो घराट तथा दो पेय जल योजनायें शामिल  की गईं हैं। जब  कि पानी कि वर्तमान जरूरत 200 LPS सरकारी  मत्स्य फार्म-ींजबीमतलए 30117 LPS तीन कूल्ह (नहर) दो चालू व एक प्रस्तावित, 150 LPS खुशाल के  मत्स्य  फार्म, 90 LPS मोहन  लाल के  मत्स्य फार्म, 120 LPS /15 मबवसवहपबंस सिवूए 4.1  LPS दो  पेय जल योजना जो कुल मिला  कर  865.22  LPS बनता हैं। इस  नाले में पानी कम  है और स्थानीय वर्तमान जरूरत कुल उपलब्ध पानी से ज्यादा हैं। ऐसे में अनापत्ति प्रमाण पत्र क्यों और किसने दिए, इस की पूरी जाँच हो।
  2. मत्स्य विभाग ने पहले 2007 में इन्कार किया और 2010 में अनापत्ति प्रमाण पत्र क्यों दिया? ऐसे में  विभाग की नीयत पर शक होता है।
  3. तीनों ग्राम सभाओं ने इस परियोजना को अनापत्ति प्रमाण पत्र देने से इन्कार किया है। ऐसे में पंचायत के प्रधान ने बिना पंचायत प्रस्ताव के अनापत्ति प्रमाण पत्र कैसे  दिया ? पहली  एस डी एम की कमेटी  ने एक प्रधान के व्यक्तिगत प्रमाण पत्र को कैसे पंचायत का अनापत्ति प्रमाण पत्र मान लिया और पंचायत व ग्राम सभा के प्रस्ताव को कैसे नजरंदाज किया? इस तरह उक्त कमेटी की कार्यवाही शक के दायरे में आ रही है जिस की जाँच होनी चाहिए।
  4. सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग जिसे पानी की उपलब्धता की पूरी  जानकारी होती है ने कैसे  अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया? जब कि उन्हें सब सिंचाई योजनाओं, घराट, मत्स्य फार्म व पेयजल योजनाओं की जानकारी पहले से है। अगर ये विभाग अधिकारी दोषी हैं तो इन के खिलाफ कानूनी कार्यवाही होनी चाहिए।
  5. वन हस्तांतरण प्रक्रिया अभी अधूरी है क्यों की लीज अभी तक  कम्पनी के नाम से  नहीं हुई है, ऐसे में हरे  पेड़ क्यों काटे गए? किन अधिकारिओं ने इस की मंजूरी दी है? उन के विरुद्ध कार्यवाही होनी चाहिए। A See Order:&  Principle secretary revenue had issued a notification in this regard on dated 5&11&2005A This notification clarifies that execution of lease and permission for diversion of forest land from MoEF may have even been sought but status stands encroachment till the lease amount is not being deposited in government account.
  6. कम्पनी के नाम अभी भी सभी तरह की  भूमि की लीज मंजूर नही हुई है। इस आशय का शिकायत  पत्र ग्राम पंचायत हलान -I सोएल  और  कर्जां  ने जिलाधीश को 31 मई 2010 को दिया था जिस मे कहा गया था कि खसरा No A 383; 375; 240/1;241/1; 236/1; 237/1; 287/1/1; 288/1; 368/1/1/; 371/1;371/2/; 375/1; 375/2; 381/1; 383/1; 383/…; 385/1 ij M/S Continental Intra &Tech  Private Ltd ने नाजायज  कब्जा  किया है। कम्पनी ने चेनल व बांध का प्लेटफार्म सरकारी भूमि पर बनाया है इस की भी लिखित शिकायत की गई थी। HP land Reform and Tenancy Act 1972 की धारा  118 के तहत मिली  छूट की  जाँच होनी चाहिए।
  7.  25 मई 2012 को एस डी एम की कमेटी जन -जागरण  संस्था से मिली जिस में हमने निष्पक्ष  जाँच  की मांग की  तथा पिछली  कमेटी की रिपोर्ट में लिए गए गलत फैसलों को  भी जाँच में शामिल किया जाए । उन सभी अधिकारियों व जन प्रतिनिधियों पर कानूनी कार्यवाही हो जो इस में दोषी पाए जाएं।
  8. यह परियोजना कानून  की अवहेलना करती  रही  है तथा स्थानीय जनता  इस का विरोध कर रही है इसलिए  परियोजना को निरस्त किया जाए व इस कम्पनी के खिलाफ  वन, राजस्व व पंचायत कानून को तोड़ने पर  मुकदमा भी चले।  - लालचंद कटोच, कुल्ल
Share on Google Plus

संघर्ष संवाद के बारे में

एक दूसरे के संघर्षों से सीखना और संवाद कायम करना आज के दौर में जनांदोलनों को एक सफल मुकाम तक पहुंचाने के लिए जरूरी है। आप अपने या अपने इलाके में चल रहे जनसंघर्षों की रिपोर्ट संघर्ष संवाद से sangharshsamvad@gmail.com पर साझा करें। के आंदोलन के बारे में जानकारियाँ मिलती रहें।