जहरीला पानी पीने से 15 दिन में 18 बच्चों की मौत जनसंघर्ष मोर्चा करेगा संघर्ष

मिर्जापुर, सोनभद्र, ओबरा, चुर्क आदि स्थानों पर विस्थापन पलायन की समस्या और गंभीर तो होती ही जा रही है, कनहर बांध परियोजना की तलवार भी दर्जनों गांवों पर लटकी है, परंतु पर्यावरण विनाश तथा जलस्रोतों के जहरीले होते जाने की समस्या से भी लोग अपनी जीवन लीला से वंचित होते जा रहे हैं। र्वा 2011 के नवंबर माह के शुरूआती 15 दिनों में 18 बच्चों की मौत की बात समाचार पत्रों में आयी है। जनसत्ता ने इस संदर्भ में तथ्यपरक रिपोर्ट भी तैयार की है।
 
सोनभद्र में रिहंद बांध का जहरीला पानी आसपास के गांव वालों के लिए फिर कहर बन गया है। इस जहरीले पानी को पीकर डेढ़ दर्जन बच्चों की मौत हो चुकी हैं अभी हाल ही में गाड़ियारा गांव के तीन बच्चों को अस्पताल भेजा गया है। बड़ों को भी जोड़ लें तो मरने वालों की संख्या 22 हो चुकी है। खास बात यह है कि यह जिला फार्मूला वन की रेस कराने वाली सरकार के चहेते उद्योगपति जेपी का मुख्य   ठिकाना है जो अरबों रुपए की आवास योजनाओं में पर्यावरण का सब्जबाग भी दिखाता है और उसी के जिले का जहरीला पानी बच्चों की जान ले रहा है तो कोई आवाज नहीं उठ रही।

सोनभद्र जिला मुख्यालय राबर्ट्सगंज से करीब डेढ़ सौ किलोमीटर दूर रिहंद बांध के किनारे के गांवों के लिए यह कोई नई बात नहीं हैं गरीबों की सरकार के अमीर नेताओं ने इस जिले के प्राकृतिक संसाधनों को जिस बेदर्दी से लूटा है वह नजीर बन गई है। रिहंद बांध का पानी जहरीला हो गया है यह बात सरकारी महकमे मसलन स्वास्थ्य विभाग से लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसरों को भी पता है। जिन बच्चों की जान गई है उनमें ज्यादातर पानी से होने वाली बीमारियों के शिकार हुए हैं। पेचिस,डायरिया, पेट दर्द जैसी शिकायतों के बाद इन बच्चों को अस्पताल भेजा जाता है पर लौटकर कम ही आ पाते हैं। पिछले साल भी बच्चे और बड़े रिंहंद के प्रदूषित पानी पीकर मरे थे और सरकारी तंत्र ने रस्म अदायगी के बाद फिर लोगों को जहरीले पानी पर निर्भर रहने के लिए छोड़ दिया। जन संघर्ष मोर्चा जो इस अंचल के प्राकृतिक संसाधनों की लूट के खिलाफ लगातार आवाज उठाता रहा है उसने जिला प्रशासन को आगाह किया है कि जल्द कोई कदम नहीं उठाए गए तो लोग फिर वे सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे।

जन संघर्ष मोर्चा के एक प्रतिनिधिमंडल ने दिनकर कपूर के नेतृत्व में रिहंद बांध के किनारे के गांवों का दौरा कर बीते 15 दिन में मरने वले 22 लोगों की सूची जारी की। इसमें अठारह बच्चे और चार वयस्क शामिल हैं। प्रदूषित पानी पीने से जिन लोगेां की मौत हुई उनके नाम हैं- लल्लू पुत्र नंदलाल बैगा उम्र दो साल, सोनू पुत्र सोमारू खरवार उम्र 11 साल, रूपनाथ पुत्र रामकिशुन पनिका उम्र 11 साल, रूपनाथ पुत्र रामकिशुन पनिका उम्र 11 साल, सोनिया पुत्री रामा गोंड़ उम्र पांच साल, आशीष पुत्र हंसराज गोंड़ उम्र पांच साल, संती पुत्री हंसराज गांेड़ उम्र 32 साल, दश्मतिया पत्नी हंसराज गोंड़ उम्र 32 साल, संतोष पुत्र सोहन गांेड़ उम्र सात साल, मुन्ना पुत्र सोहन गोंड़ उम्र 8 साल, आशीष पुत्र संखलाल गोंड़ उम्र पांच साल, मन्ना पुत्र रामनाथ उम्र तीन साल, दीपांशु पुत्र रामलाल यादव उम्र दो साल, विभा पुत्री महेंद्र यादव उम्र तीन साल, प्रदीप पुत्र शिवमूरत उम्र चार साल, शुभचंद पुत्र अमरजीत उम्र छह साल, संजय पुत्र रामलगन यादव उम्र 11 साल, बाबूनंदन पुत्र बसंतलाल उम्र सात साल, कैलाश पुत्र चुक्खुल उम्र 60 साल, तिलक पुत्र प्रसाद उम्र 62 साल, श्यामलाल पुत्र बेचन उम्र 65 साल, शांतिपति पत्नी सोहन गोंड़ उम्र 32 साल की अब तक मौत हो चुकी है और दो दर्जन से ज्यादा लोग अभी भी बीमार हैं इनमें भी बच्चों की ही संख्या ज्यादा है। -दिनकर कपूर

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