किसान भागुराम को श्रद्धांजलि देने पहुंच रहे हैं, देश भर से जनसंगठनों के प्रतिनिधि

अनेक सामाजिक, राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधि किसान भागुराम को श्रद्धांजलि देने गोरखपुर पहुंच रहे हैं। आज़ादी बचाओ आंदोलन, उत्तराखंड वाहिनी आंदोलन, साझा मंच हिसार, माकपा, किसान सभा आदि।

लोगों ने कहा कि ‘‘गोरखपुर गांव में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा संयंत्र का अपनी जान पर खेल कर विरोध कर रहे किसानों के संघर्ष का वे समर्थन करते हैं। मानव जीवन, प्रकृति और खेती का विनाश करने वाली यह तकनीक महंगी होने के साथ-साथ बेहद ख़तरनाक भी है। परमाणु विकिरण से कैंसर, बांझपन और विकलांग बच्चों का जन्म जैसी भयंकर बीमारियों को कोटा के पास स्थित रावतभाटा संयंत्र के क्षेत्र में देखा जा सकता है। यूरेनियम के कचरे के निस्तारण का कोई तरीका अब तक वैज्ञानिकों के पास नहीं है और यह विकिरण तीन लाख साल से भी ज़्यादा सालों तक बनी रहती है। अमेरिका जैसे देशों ने 1990 के बाद से कोई परमाणु संयंत्र अपने देश में नहीं लगाया है।’’

लोगों का कहना है कि ‘‘गोरखपुर के ग्रामीणों के निरंतर संघर्ष के बावजूद यह प्लांट इसलिए लगाया जा रहा है ताकि खेती और किसानों को खत्म करके कारपोरेट घरानों को बिजली मिल सके। परमाणु ऊर्जा नियंत्रण बोर्ड के मानकों जैसे- पांच किलोमीटर तक प्राकृतिक जंगल होना, 10 किलोमीटर तक केवल 10 हज़ार आबादी होना तथा 30 किलोमीटर तक 1 लाख की जनसंख्या होना आदि का भी इस परियोजना में उल्लंघन हुआ है। परमाणु संयंत्र जिस जगह लगाया जाना प्रस्तावित है उसके 5 किलोमीटर के दायरे में 5 लाख से अधिक आबादी है और काजलहेड़ी गांव के पास ही 400 से अधिक काले हिरण है। इस संयंत्र के लगने के बाद क्षेत्र का पूरा पानी निचोड़ लेने से आस- पास की सारी भूमि बंजर हो जायेगी।’’

फिलहाल गोरखपुर गांव के किसानों के नेतृत्व में बनी किसान संघर्ष समिति आंदोलन में डटी है और उनको आए दिन अनेक गांवों की पंचायतों, राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों व वैज्ञानिकों, वकीलों, नौजवानों का निरंतर सहयोग मिल रहा है। क्षेत्र से लगते अनेक गांवों में ग्राम सभा तथा गांव की पंचायतों में परमाणु संयंत्र के विरूद्ध प्रस्ताव पास करने की योजनाएं बन चुकी हैं। किसान संघर्ष समिति के साथी हंसराज कहते हैं कि ‘‘सरकार व प्रशासन द्वारा असहयोगात्मक व्यवहार से रणनीति में बदलाव करते हुए गांव स्तर पर किसानों की एक कमेटी का निर्माण किया गया है जिसमें महिला एवं पुरूष दोनों रहेंगे तथा इस कमेटी का काम हर समय गांव का पहरा देना है। गांव में किसी प्रकार का सर्वे नहीं होने दिया जायेगा और न ही ज़मीन अधिग्रहण होने दी जायेगी।

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