दमन, उत्पीड़न के बावजूद जारी है जन प्रतिरोध: पूरे देश में उठी आवाज़

कुडनकुलम आंदोलन के बारे में प्रधानमंत्री के विदेशी धन की संलिप्तता के आरोप दो जर्मन नागरिकों को उनके देश वापस भेजने और 19 मार्च को तमिलनाडु सरकार द्वारा खुलेआम कुडनकुलम परमाणु संयंत्र को हरी झण्डी दिखाने के बाद आंदोलनकारियों के धरना स्थल को 10 हजार से भी ज्यादा पुलिस के लोगों ने घेर रखा है, आस पास स्थित सुनामी प्रभावित गांवों में भी 20 मार्च को पुलिस ने घुसने की कोशिश की है। इलाके में कर्फ्यू जैसे हालात हैं
अतएव लोग नावों के जरिये समुद्री मार्ग से आन्दोलन स्थल तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं। दमन और उत्पीड़न पर आमादा राज्य तथा केन्द्र सरकार आन्दोलन के अगुआकारों को गिरफ्तार करने की जुगत में हैं। परंतु दमन का सामना करते हुए आंदोलनकारी डटे हुए हैं। इस बीच परमाणु ऊर्जा विरोधी संघर्षों, मानवाधिकार संगठनों तथा देश के तमाम जन संघर्षों ने आगे बढ़कर आंदोलनकारियों का पूर्ण समर्थन किया है। केरल, महाराष्ट्र, हरियाणा तथा दिल्ली समेत पूरे देश में लोग इस आंदोलन के समर्थन में सड़कों पर उतर रहे हैं। इस बीच सरकार ने 20 मार्च को स्वीकार किया है कि 189 आंदोलनकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। इलाके में 2000 पुलिस जवानों को लगाया गया है तथा पूरे इलाके में निषेधाज्ञा लागू कर दी गयी है। आंदोलनकारियों का कहना है कि भारी पुलिस बंदोवस्त के बावजूद भी हेलीकॉप्टर द्वारा आंदोलन स्थल पर चक्कर लगाये जा रहे हैं। पुलिस यह अफवाह उड़ा रही है कि आंदोलनकारियों ने 9 बसें तोड़ डाली हैं तथा उन्हें आग के हवाले कर दिया है। आंदोलनकारियों पर राष्ट्रद्रोह के आरोप लगाये जा रहे हैं। संघर्ष समिति सदस्य सिवा सुब्रमनियम एवं राजलिंगम को राष्ट्रद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कर उनके ऊपर धारा 121, 121, और धारा 153 के तहत भी मुकदमा दर्ज किया गया है। इस बीच इस आंदोलन के अगुआ एस.पी. उदयकुमार को गिरफ्तार करने की फिराक में लगे प्रशासन के साथ ही साथ अपराधियों और गुण्डों ने उनकी पत्नी द्वारा संचालित स्कूल में घुसकर तोड़-फोड़ की है। ज्ञातव्य है कि इसके पूर्व भी 31 जनवरी 2012 को गुण्डों और दलालों ने आंदेालनकारियों पर हिंसक हमले किये थे। इन हालात में भी 20 हजार से भी ज्यादा स्थानीय निवासी भूखहड़ताल पर डटे हैं। इस बीच प्रशासन ने आंदोलन स्थल तक जाने के सभी रास्ते जिसमें समुद्री जल मार्ग भी शामिल है, न केवल बंद कर दिये हैं, पुलिस द्वारा नाकेबंदी करा रखी है बल्कि भोजन, पानी, दवा, बिजली की आपूर्ति आदि पर भी रोक लगा दी है। कुडनकुलम एवं इंदिताकराई को भारी पुलिस ने घेर रखा है। रास्तों पर बाधायें खड़ी करके पुलिस ने सारे रास्ते बन्द कर रखे हैं। धारा 144 की घोषणा के साथ ही साथ कर्फ्यू जैसा माहौल बना दिया गया है। कुडनकुलम की तरफ जाने वाले ग्रामवासियों को परेशान किया जा रहा है तथा धमकियां दी जा रही हैं। आतंक के इस माहौल को बनाये रखने के लिए हजारों पुलिस कर्मियों को लगाया गया है। इस जिम्मेदारी की कमान तमिलनाडु के एडिशनल डायरेक्टर जनरल पुलिस (ए.ड़ी.जी.पी.), तीन-तीन डी.आई.जी. और 20 एस.पी. रैंक के अधिकारियों के हाथ में हैं यह सब राज्य द्वारा अपने ही नागरिकों के निर्मम दमन के लिए किया जा रहा है।

केरल साहित्य अकादमी त्रिशूर से एक विरोध रैली को डॉ बिनायक सेन ने 20 मार्च को रवाना किया। त्रिवेंद्रम, त्रिचूर एवं कालीकट में 21 मार्च को आंदोलन के समर्थन में जुलूस निकाले गये, बेंगलोर में केन्डिल मार्च आयोजित किया गया, दिल्ली में इंसाफ की पहल पर प्रेस कांफ्रेंस की गयी एवं 22 मार्च को तमिलनाडु भवन पर विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया।  साथ ही साथ 23 मार्च को संसद भवन के समक्ष आयोजित जन संसद में इस आंदोलन के समर्थन में न केवल प्रस्ताव पारित किया गया बल्कि पूरे देश के जन आंदोलनों से कुडनकुलम संघर्ष को समर्थन देने की अपील भी की गयी।
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