उत्तर प्रदेश की भूमि अधिग्रहण की नयी नीति

भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे किसानों पर गोलियां चलवाने तथा दिसंबर 2009 से जुलाई 2011 के बीच 6 बड़े-बड़े भूमि-अधिग्रहणों को इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा अवैध घोषित किये जाने के रिकार्डों से गदगद या आहत उत्तर प्रदेश सरकार एक नयी भूमि अधिग्रहण नीति के साथ मैदान में आयी है, अपनी बदनुमा छबि को सुधाने की जुगत में। 2 जून 2011, को उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश में नयी भूमि अधिग्रहण नीति को लागू कर दिया

2 जून 2011, को उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश में नयी भूमि अधिग्रहण नीति को लागू कर दिया है। हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार का भूमि अधिग्रहण करने के दौरान किसानों से कई बार हिंसक टकराव हुआ है। उ.प्र. सरकार ने बहुत ही हिंसक तथा अमानवीय तरीके से राज्य में चल रहे भूमि अधिग्रहण आंदोलनों को कुचला है। जिसमें बहुत से किसान घायल हुए तथा मारे गये। भट्ठा पारसौल की हिंसक घटनाओं तथा बढते राजनीतिक दबाव के कारण यू.पी. सरकार आनन-फानन में नयी भूमि अधिग्रहण नीति को लागू करके अपनी पीठ थपथपा रही है। इस नयी भूमि अधिग्रहण नीति के बाद, जिसे यू.पी. सरकार (सभी राज्यों में) सर्वश्रेष्ठ बता रही है, के प्रावधानों को देखकर यू.पी. सरकार की भूमिका अब स्पष्ट तथा साफ रूप से जनता के सामने आ गई है। अब सरकार सीधे दलाल के रूप में सामने आ गई है। मगर सवाल यह है कि मुआवजा बढ़ा कर तथा अपनी भूमिका को दलाली तक सीमित रख कर सरकार ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला क्यों झाड़ लिया है? क्या आजीविका का कोई मोल या मुआवजा हो सकता है? इस नीति के अनुसार अब कम्पनी सीधे ही किसानों से जमीन खरीदेगी इससे भविष्य में कम्पनियों के गुंडा राज तथा हिंसक घटनाओं की गिनती और ज्यादा बढ़ेगी।

इस नीति के अनुसार:

सार्वजनिक क्षेत्र में शुरू की जाने वाली परियोजनाएं जैसे, राजमार्ग, नहर, ऊर्जा आदि के लिए भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही, भूमि अधिग्रहण अधिनियम 1894 के प्रावधानों एवं प्रक्रिया को अपनाते हुए की जायेगी। परन्तु भूमि का प्रतिकर उत्तर प्रदेश भूमि अर्जन नियमावली, 1997 के अन्तर्गत आपसी सहमति से किया जायेगा। इन परियोजनाओं के लिए जिन भू-स्वामियों की भूमि अधिग्रहीत की जायेगी उनको शासन की पुनर्वास एवं पुनसर््थापना की नीति 2010 के अन्तर्गत उपलब्ध कराये गये सभी लाभ प्रदान किये जायेंगे।

इस नीति में अधिग्रहीत की गयी भूमि के कुल क्षेत्रफल का 16 प्रतिशत भूमि विकसित करके निःशुल्क दी जायेगी। यह भूमि हस्तान्तरणीय होगी तथा इसका 50 प्रतिशत क्षेत्रफल आवासीय भू-उपयोग तथा 50 प्रतिशत गैर आवासीय भू उपयोगों के लिए होगा। गैर आवासीय उपयोगों में अनुमन्य किये जाने वाले पारस्परिक प्रतिशत की नीति का निर्धारण संबंधित निकाय/उपक्रम/प्राधिकरण द्वारा स्वयं किया जायेगा। भूस्वामी द्वारा प्राप्त की गयी भूमि के नियोजन/ निर्माण कार्य हेतु मानचित्र स्वीकृत नियमानुसार कराया जाना अनिवार्य होगा।

सहमति के आधार पर तय किये गये पैकेज के साथ-साथ भू-स्वामियों के लिए निम्नलिखित लाभ अनुमन्य होंगे-

I वार्षिकी
क) प्रत्येक भू-स्वामी, जिसकी भूमि अधिग्रहीत की जा रही है, को 33 साल के लिए रु. 23,000.00 प्रति एकड़ प्रति वर्ष की दर से वार्षिकी दी जायेगी, जो भूमि प्रतिकर के अतिरिक्त होगी।
ख) इस राशि में प्रतिवर्ष प्रति एकड़ 800.00 रु. की निश्चित दर से वृद्धि की जायेगी, जो प्रत्येक वर्ष जुलाई माह में देय होगी।
ग) यदि कोई भू-स्वामी वार्षिकी नहीं लेना चाहता है तो उसे एकमुश्त रु. 2,76,000.00 प्रति एकड़ की दर से पुनर्वास अनुदान दिया जायेगा।
घ) कंपनी हेतु भूमि अधिग्रहण की स्थिति में पुनर्वास अनुदान की एकमुश्त धनराशि में से 25 प्रतिशत के समतुल्य कम्पनी के शेयर का विकल्प भू-स्वामियोें को उपलब्ध होगा। ये शेयर, भूमि अधिनियम की धारा 6 के विज्ञप्ति प्रकाशन की तिथि अथवा करार की तिथि, जो भी बाद में हो, को शेयर के बाजार मूल्य के आधार पर कम्पनी द्वारा देय होगी। यदि कम्पनी द्वारा भूमि अधिग्रहण के पश्चात इनीशियल पब्लिक ऑफर लाया जाता है, तो कम्पनी द्वारा फेस वैल्यू पर एकमुश्त पुनर्वास अनुदान के 25 प्रतिशत के समतुल्य धनराशि का शेयर का आवंटन विकल्प देने वाले भू-स्वामियों को किया जायेगा।
II परियोजना के क्रियान्वयन से पूर्णतः भूमिहीन हो रहे प्रत्येक परिवार को 40 वर्गमीटर का एक    विकसित आवासीय भू-खंड निःशुल्क दिया जायेगा।
III ऐसे प्रत्येक परियोजना प्रभावित परिवार, जिसकी प्रभावित क्षेत्र में कृषि भूमि हो तथा जिसकी पूरी भूमि अर्जित की गई हो, तो उसको आजीविका की क्षतिपूर्ति के लिए 05 वर्षों की न्यूनतम कृषि मजदूरी के बराबर एकमुश्त धनराशि वित्तीय सहायता के रूप में दी जायेगी।
IV ऐसे प्रत्येक परियोजना प्रभावित परिवार जिसकी पूरी भूमि अर्जित नहीं की गयी है और भूमि अर्जन के परिणामस्वरूप वे सीमान्त कृषक बन गये हैं, को 500 दिन की न्यूनतम कृषि मजदूरी के बराबर एक बार दी जाने वाली सहायता के रूप में वित्तीय सहायता दी जायेगी।
V ऐसे प्रत्येक परिवार को जो भूमि अर्जन के परिणामस्वरूप छोटे कृषक बन गयें हो, को 375 दिनों की न्यूनतम कृषि मजदूरी के बराबर एक बार दी जाने वाली सहायता के रूप में वित्तीय सहायता दी जायेगी।
VI कृषि श्रमिक या गैर-कृषि श्रमिक की श्रेणी से संबंधित प्रत्येक परियोजना प्रभावित परिवार को 625 दिनों की न्यूनतम मजदूरी के बराबर वित्तीय सहायता दी जायेगी।
VII परियोजना प्रभावित प्रत्येक विस्थापित परिवार को 250 दिनों की न्यूनतम मजदूरी के बराबर एक मुश्त धनराशि आजीविका की क्षतिपूर्ति हेतु अतिरिक्त रूप में भुगतान किया जायेगा।

3. सार्वजनिक उपयोग के लिए निजी क्षेत्र में परियोजना हेतू भूमि उपलब्ध कराने अथवा निजी क्षेत्र को बल्क भूमि आवंटन का प्रस्ताव है, वहां के लिए भूमि अधिग्रहण के लिए निम्नलिखित प्रक्रिया निर्धारित की जाती है-
I परियोजना के परीक्षणोंपरान्त शासन द्वारा भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा-4 के अन्तर्गत अधिसूचना परियोजना की सम्पूर्ण भूमि पर निर्गत की जायेगी।
II विकासकर्ता द्वारा भू-स्वामियों के साथ गांव मे बैठकर आपसी समझौते से पैकेज तैयार किया जायेगा जिसमें संबंधित जिलाधिकारी फेसिलिटेटर की भूमिका निभायंेगे तथा भू-अर्जन के बजाय भूमि का हस्तान्तरण भू-स्वामियों से सीधे परियोजना विकासकर्ता को होगा।
प्प्प्. यह पैकेज कम से कम 80 प्रतिशत भू-स्वामियों की सहमति से तय किया जायेगा और इसके अंतर्गत 2 विकल्प उपलब्ध होंगेः-
III परियोजना के विकासकर्ता संस्था द्वारा भूमि अधिग्रहण से प्रभावित प्रत्येक ग्राम में एक किसान भवन का निर्माण अपने खर्चे पर कराया जायेगा।
IV प्रभावित भू-स्वामियों तथा भूमिहीन मजदूरों जो गरीबी रेखा से नीचे हैं, उनके बच्चों को शिक्षा प्रदान करने के लिए परियोजना क्षेत्र में माडल स्कूल का निर्माण परियोजना   विकासकर्ता द्वारा किया जायेगा।
4. अवशेष कृषक जो उपरोक्त पैकेज लेने के लिए सहमत नहीं होते हैं उनकी भूमि, भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 की प्रक्रिया के अन्तर्गत कार्यवाही करते हुए अर्जित की जायेगी।
5. यदि किसी परियोजना से प्रभावित भू-स्वामियों में से 80 प्रतिशत से कम भू-स्वामी सहमति देते हैं तो परियोजना पर पुनर्विचार किया जायेगा।
6. मुआवजे के तौर पर दी जाने वाली विकसित भूमि के रजिस्ट्रेशन पर देय स्टैम्प ड्यूटी तथा रजिस्ट्रेशन शुल्क से उन्हें छूट प्रदान की जायेगी।
7. प्रभावित भू-स्वामी यदि प्रतिकर प्राप्त होने की तिथि से एक वर्ष के अन्दर प्रदेश में नगद प्रतिकर की धनराशि की सीमा तक कृषि भूमि क्रय करते हैं तो भूमि क्रय करने पर उन्हें देय स्टाम्प ड्यूटी व रजिस्ट्रेशन शुल्क से छूट प्रदान की जायेगी।
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