पूर्वी उत्तर प्रदेश में गंगा एक्सप्रेस-वे के ख़िलाफ़ बढ़ता जनाक्रोश


केवल उत्तर प्रदेश में ही गंगा एक्सप्रेस-वे के पहले चरण के कारण घट जाएगा हजारों एकड़ कृषि योग्य उपजाऊ भूमि का रकबा तथा प्रतिवर्ष 50 लाख कुंतल अनाज का उत्पादन

गंगा एक्सप्रेस-वे परियोजना के ख़िलाफ़ कृषि भूमि बचाओ मोर्चा के तत्वावधान में पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसानों ने जनवरी, फरवरी माह में विभिन्न गतिविधियां कीं। मोर्चा के बैनर तले नोएडा से बलिया तक गंगा एक्सप्रेस-वे के ख़िलाफ़ जिलाधिकारी से लेकर मण्डलायुक्त व उपजिलाधिकारी के यहां धरना-प्रदर्शन व मांग-पत्र दिया गया। इस संदर्भ में वाराणसी जनपद के पूर्वी उ. प्र. में किसानों का एक फरवरी को विशाल सम्मेलन किया गया। सम्मेलन में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी सी.पी.आई.(एम), फारवर्ड ब्लाक व कृषि भूमि बचाओ मोर्चा ने बढ़-चढ़ कर भागीदारी ली। मोर्चा की तरफ से रामरूप दादा अमरनाथ यादव, प्रेमनाथ गुप्ता, रामाश्रय प्रसाद, शिवा जी सिंह, जयशंकर सिंह आदि के नेतृत्व में गाजीपुर के किसानों ने भागीदारी की। सम्मेलन में गंगा एक्सप्रेस-वे का विरोध करते हुए सरकार को चेतावनी दी गयी कि यदि किसानों की उपजाऊ मिट्टी छिन गयी तो ऐसी सरकार को किसान मिट्टी में मिला देंगे। बलिया से नोएडा तक जो सड़क सेज प्रस्तावित है वह अनावश्यक तथा औचित्यहीन है। इस योजना के लिए ली जाने वाली भूमि सर्वाधिक उपजाऊ है। इसके कारण किसान बेरोजगार होंगे और विकासकर्ता जे.पी. एसोसिएट मालामाल हो जायेगा। इसके साथ ही खाद्यान्न के उत्पादन पर भी असर पड़ेगा। सम्मेलन में इलाहाबाद, मिर्जापुर, भदोही, वाराणसी, गाजीपुर, बलिया, जौनपुर, आजमगढ़, चन्दौली सभी अन्य जनपदों से भागीदारी की गयी।

गाजीपुर जनपद आंदोलन का केन्द्र बना

गंगा एक्सप्रेस-वे के ख़िलाफ़ पूर्वी उ. प्र. के किसानों ने कृषि भूमि बचाओ मोर्चा के बैनर तले पूर्वांचल के जिला मुख्यालय व तहसील मुख्यालयों पर जिलाधिकारी व उपजिलाधिकारी के यहां गंगा एक्सप्रेस-वे को रद्द करने के लिए मांग-पत्र दिया। इस संदर्भ में मुहम्मदाबाद तहसील के उपजिलाधिकारी श्री सूर्यनारायण यादव के यहां कृषि भूमि बचाओ मोर्चा के नेता व गांव बचाओ आंदोलन संयोजक प्रेमनाथ गुप्ता के नेतृत्व में हाई-वे को रद्द करने के लिए तीन सूत्रीय मांग-पत्र दिया गया।

जिला मुख्यालय सरजू पाण्डेय पार्क में कृषि भूमि बचाओ मोर्चा के नेतृत्व में पूर्वी उ. प्र. के किसानों का एक दिवसीय धरना 18/02/2010 को किया गया। गंगा एक्सप्रेस-वे योजना के खिलाफ राज्यपाल को एक ज्ञापन जिलाधिकारी के द्वारा किसानों की तरफ से इस परियोजना को रद्द करने के लिए मांग पत्र दिया गया। सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष राघवेन्द्र ने कहा कि यह परियोजना पूंजीपतियों का स्वार्थ पूरा करने के लिए लागू की जा रही है ताकि किसानों की जमीन को लेकर किसानों को बलि का बकरा बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि लोकसभा में जब भूमि अधिग्रहीत कानून बना तो उसी समय जन-प्रतिनिधियों को विरोध करना चाहिए था लेकिन उस समय सारे जन-प्रतिनिधि चुप्पी साधे हुए थे। इसका हश्र हुआ कि गंगा एक्सप्रेस-वे व सेज जैसे काले कानून पारित हो गये जो किसानों की कमर तोड़ कर कहर बरपा रहे हैं। धरना को सम्बोधित करते हुए अमर नाथ यादव ने कहा कि इस परियोजना को हम किसी भी कीमत पर नहीं बनने देंगे। इसके लिए जो भी कुर्बानी देनी पड़े दी जायेगी। धरना को संबोधित करते हुए सीपीएम के वाराणसी जिला के सचिव डा. हीरालाल यादव ने कहा कि हमारी पार्टी इस आंदोलन में अगली कतार में आपको मिलेगी। धरना को संबोधित करते हुए भाकपा के गाजीपुर के जिला सचिव अमेरिका यादव ने कहा कि हम पश्चिम बंगाल में नन्दीग्राम या सिंगुर के मसले पर भी हम वाम मोर्चा के सरकार में है लेकिन इस सवाल पर हमारी पार्टी किसानों के साथ रही है। हम भूमि अधिग्रहण के खिलाफ हैं। जहां कहीं भी विरोध होगा हम उनके साथ रहेंगे। धरना को संबोधित करते हुए कांग्रेस पार्टी के जिला महासचिव रामअतवार शर्मा ने भी इस आंदोलन के साथ अपनी पार्टी को सम्बद्ध किया। धरना को संबोधित करते हुए रामाश्रय यादव ने कहा कि अगर सरकार को विकास ही करना है तो गंगा एक्सप्रेस-वे को रद्द कर कृषि आधारित लघु  उद्योगों, कल-कारखानों आदि में सब्सिडी देकर खाद-बिजली-पानी देने की समुचित व्यवस्था करनी चाहिए। प्रतापगढ़ से आये हुए किसान नेता अरूण कुमार ने कहा कि प्रदेश सरकार सहित अन्य प्रान्तों की भी सरकारें किसानों की जमीन को हथियाने का काम कर रही हैं। धरना को शिवाजी ने संबोधित करते हुए कहा कि हम किसान विरोधी सरकार को उखाड़ फेंकेगे। धरना को संबोधित करते हुए जयशंकर ंिसंह ने कहा कि जो भी सरकारें किसानों के साथ खिलवाड़ करेंगी उनको हम उखाड़ फेंकेगे और ऐसा विगत में सरकारों के साथ हुआ भी है। प्रेमनाथ गुप्ता ने कहा कि गाजीपुर आंदोलनों की धरती रही है। आजादी आंदोलन में 1857 से लेकर 1942 व स्वामी सहजानन्द सरस्वती का किसान आंदोलन पूरे उत्तर भारत में फैला हुआ था। उन्होंने कहा था अगर भगवान है तो वह किसान के रूप में ही है। उन्होंने कहा कि चौरीचौरा से लेकर छिछोर काण्ड शेरपुर का शहीद काण्ड, मुहम्मदाबाद की तहसील लूट काण्ड व नन्दगंज में ट्रेन डकैती आदि इतिहास है। अगर इस परियोजना को अविलम्ब बंद नहीं किया गया तो करो या मरो की तर्ज पर पूर्वी उ. प्र. के किसान व्यापक आंदोलन खड़ा करेंगे। धरना को संबोधित करते हुए समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष रामधारी यादव ने कहा कि धरती पुत्र मुलायम ंिसंह किसानों के पुत्र हैं। किसान पर जहां कहीं भी जुल्म ज्यादती होगी उनके नेतृत्व में पूरे प्रदेश में समाजवादी पार्टी इस आंदोलन के साथ है। धरना को संबोधित करते हुए एस.यू.सी.आई. के फुन्नू सिंह यादव ने कहा कि पश्चिम बंगाल में हमारी पार्टी ने भूमि बचाओ मोर्चा के बैनर तले समान विचारधारा वाली पार्टियों के साथ मिलकर ऐसा आंदोलन किया कि टाटा को गुजरात भागना पड़ा। वहां पर वाम मोर्चा की सरकार है लेकिन जिस तरह से आंदेालनकारियों के साथ वहां की सरकार पेश आयी वह निंदा की पात्र है। प. बंगाल की तर्ज पर ही हम उ. प्र. में भी इस परियोजना के खिलाफ एक व्यापक आंदोलन खड़ा करेंगे। इसमें जे.पी. समूह को भागना पड़ेगा और अंत में हमारी जीत होगी। इसके लिए किसानों को अभी से लामबंद होकर बड़े आंदेालन के लिए तैयार होना पड़ेगा। धरना को संबोधित करते हुए कृषि भूमि मोर्चा के जिलाध्यक्ष रामरूप दादा ने कहा कि यह सम्मेलन गैर-राजनैतिक था लेकिन जिस प्रकार राजनैतिक पार्टियों के प्रतिनिधियों ने इस आंदोलन में शिरकत करके समर्थन देने का वादा किया इस पर हम इनका आभार व्यक्त करते हैं और निकट भविष्य में इन मुद्दों को लेकर जहां कहीं भी आशा की किरण दिखायी देगी वहां हम बातचीत करने के लिए तैयार हैं। धरना को संबोधित करने वालों में श्यामसुन्दर यादव, हरिनारायण राय, अनिरूद्ध राय, जवाहिर सिंह यादव, रामाशंकर, फुन्नू सिंह, विरेन्द्र दास, राजेश राय, दलसिंगार पटेल, सुरेन्द्र राय, जगरनाथ राय, नगीना कुशवाहा, लालजी यादव, सूरजराम बागी के साथ गाजीपुर बलिया वाराणसी, चन्दौली, भदोही, प्रतापगढ़, आजमगढ़, जौनपुर के कृषि भूमि बचाओ मोर्चा के किसानों ने भागीदारी की।

सरकारी दमन और कम्पनी की साजिष जारी है

गंगा एक्सप्रेस-वे योजना के खिलाफ बढ़ते संघर्ष से बौखलाई सरकार तथा डेवलेपर जे.पी. एसोशिएट्स ने मिलकर लगातार कार्यकर्ताओं तथा नेताओं पर दमन की साजिश जारी रखी है। कृषि भूमि बचाओ मोर्चा के साथी इसका मुंह तोड़ जवाब देने को उद्यत हैं।
मोर्चा के प्रतिबद्ध नेता साथी अमरनाथ यादव के साथ मोर्चा के श्री रामाश्रय यादव, लाल जी एवं श्याम सुंदर समेत मोर्चा के 9 साथियों के खिलाफ सरकारी कामकाज में व्यवधान उत्पन्न करने का मुकदमा गाजीपुर जनपद के करण्डा थाने में जे.पी. एसोशिएट कंपनी के एक कर्मचारी, जो कि अवकाश प्राप्त लेखपाल हैं, की तरफ से रिपोर्ट दर्ज करायी गयी।

हुआ यह था कि नारी पंचदेवरा गांव, थाना- करण्डा, जनपद गाजीपुर जहां गंगा एक्सप्रेस-वे हेतु जमीन अधिग्रहीत की जानी है, में उक्त लेखपाल जमीन की नाप-जोख के सिलसिले में गया था। गांव वालों ने उसे ऐसा करने से मना किया तथा ग्राम पंचायत से अनुमति लेने हेतु कहकर गांव से बाहर खदेड़ दिया।

उक्त अवकाश प्राप्त लेखपाल ने थाने में जाकर रिपोर्ट दर्ज करायी। 4 मार्च की रात में 1 बजे मोर्चा के नेता श्री अमरनाथ यादव को गिरफ्तार करके जनपद आजमगढ़ की सीमा पर अवस्थित खानपुर थाने ले जाया गया तथा सुबह गाजीपुर जेल भेज दिया गया। अन्य नेताओं की गिरफ्तारी के लिए वारण्ट जारी कर दिया गया।
11 मार्च, 2010 को श्री अमरनाथ यादव की न्यायालय से जमानत करायी गयी तथा इस घटना के विरोध एवं गंगा एक्सप्रेस-वे योजना के विरोध तथा कृषि भूमि बचाने के लिए सैदपुर तहसील के समक्ष धरना देने समेत आंदोलन तेज करने हेतु मोर्चा ने विरोध सभायें करने का निर्णय लिया है।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के सिविल इंजीनियरिंग विभाग में गंगा नदी पर शोध के लिए 1985 में गठित गंगा प्रयोगशाला के संस्थापक प्रोफेसर यू के चौधरी और उनकी टीम के अनुसार एक्सप्रेस वे के पहले चरण में प्रदेश की 40 हजार एकड़ खेती योग्य भूमि समाप्त हो जाएगी। एक दशक बाद एक लाख एकड़ उपजाऊ भूमि गैर कृषि कार्यो में इस्तेमाल होगी जिसके कारण अनुमानित पचास लाख किंवटन अनाज का उत्पादन घट जाएगा। प्रोफेसर चौधरी गंगा नदी का विस्तृत एवं सूक्ष्म अध्ययन कर रहे हैं। उनका मानना है कि इस परियोजना के चलते न सिर्फ गंगा का प्रदूषण बढ़ेगा बल्कि गंगा बेसिन की जलवायु भी प्रभावित होगी। प्रोफेसर चौधरी की रपट के बाद गंगा एक्सप्रेस-वे परियोजना के भयावह परिणामों को भांपते हुए भारतीय जनता पार्टी के विधायक दल के नेता ओम प्रकाश सिंह ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, जनेश्वर मिश्र, अजीत सिंह, अमर सिंह, राजबब्बर समेत कई अन्य सांसदों को पत्र भेजकर इस परियोजना को रोकने की गुजारिश की है।

प्रोफेसर यू के चौधरी के निष्कर्ष इस परियोजना को लेकर माहौल गरमा सकते हैं। चौधरी की रपट के कुछ बिंदु इस प्रकार है-
  • गंगा एक्सप्रेस वे चूंकि ड्रेनेज पथ को काटेगा इसलिए वाटर शेड की दिशा बदल जायेगी; भूमिगत जल में बढ़ोतरी होगी जो विशाल वाटर शेड के मृदाक्षरण का कारण होगा; वाटर शेड का कटाव एक्सप्रेस वे के एक तरफ पानी के दबाव को बढ़ाएगा तथा दूसरी तरफ भूमिगत जल के रिसाव क्रिया में तीव्रता लाएगा, जिसकी वजह से एक्सप्रेस वे से भयावह कटाव होगा; गंगा एक्सप्रेस वे चूंकि माइक्रो वाटर शेड को एक हजार किलोमीटर में काटेगी इसलिए एक्सप्रेस वे का एक किनारा राजमार्ग के अगल-बगल की विशाल उपजाऊ जमीन पर जल भराव होगा।
  • एक्सप्रेस वे पर चलने वाली गाड़ियों से लगातार कार्बन डाइआक्साइड, कार्बन मीनो आक्साइड आदि गैसें नदी से निस्तारित होने वाली वाष्पीकरण की रफ्तार को बढ़ाकर जल प्रवाह कम कर देंगी जिससे जल में आक्सीजन की मात्रा घट जएगी। इसके अलावा एक्सप्रेस वे और गंगा के बीच की उपजाऊ भूमि गंगा द्वारा बालू जमाव व मृदाक्षरण से प्रभावित होते गंगा का बेसिन न रह कर बाढ़ क्षेत्र में तब्दील हो जाएगा। इसके चलते हजारों एकड़ का गंगा का उपजाऊ बेसिन क्षेत्र नष्ट हो जएगा।
  • उपजाऊ जमीन का गैरकृषि क्षेत्र में चले जाना चिंता का सबसे बड़ा सवाल है।  उत्तर प्रदेश  में कृषि भूमि का रकबा लगातार कम हो रहा है। वर्ष 1984 में प्रदेश में कृषि भूमि का रकबा 184 लाख हेक्टेयर था जो 2006 आते-आते 168 लाख हेक्टेयर रह गया। हालांकि खाद्यान्न उत्पादन फिलहाल चार लाख मीट्रिक टन पर स्थिर है। लेकिन जहां 2024-25 तक प्रदेश की आबादी करीब 25 करोड़ तक पहुंच जाएगी वहीं खाद्यान्न का उत्पादन और घट जाएगा। उस समय 600 मीट्रिक टन खाद्यान्न की जरूरत होगी। ऐसे में खेती का रकबा घटना घातक होगा।

भूमि अधिग्रहण, पुलिस दमन तथा किसानों की जमीन का उ. प्र. सरकार द्वारा किये जा रहे व्यापार के खिलाफ किसान उतरे सड़कों पर

उत्तर प्रदेश राज्य के इलाहाबाद जनपद की यमुनापार की तहसील करछना के देहली, भगेसर, भोलीपुर, मेडरा, कचरी, देवरी, देवरीकला, देहवाकला और भिटार आदि गांवों पर शनिवार (17/7/10) की आधीरात के बाद किसानों के घरों पर पुलिस ने धावा बोला। गाली गलौज किया, घरों के दरवाजे तोड़ डाले तथा किसानों को गिरफ्तार किया। इस घटना से बौखलाये किसानों ने सुबह (रविवार 18/7/10) से आंदोलन शुरू कर दिया तथा मिर्जापुर इलाहाबाद राजमार्ग को जाम कर दिया।

किसान अपनी तीन फसली जमीन (18 हजार एकड़) जिसमें न केवल तीन फसलें पैदा होती हैं बल्कि सब्जियों की खेती करके लगभग 15 हजार की आबादी अपना जीवन-यापन करती है।

इस 18 हजार एकड़ जमीन को उ. प्र. पावर कारपोरेशन द्वारा बिजली उत्पादन संयंत्र बनाने हेतु उ. प्र. सरकार ने 3 लाख प्रति बीघा की दर से अधिग्रहीत किया था परंतु उ. प्र. सरकार अब इसी जमीन को जे. पी. ग्रुप को 12 लाख रुपये प्रति बीघे की दर से बेचने जा रही है। किसान इस सरकारी तिजारत से भड़के हैं तथा अपनी अधिग्रहीत भूमि की वापसी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

स्थानीय किसान-मजदूर संगठन के नेता सुरेश चंद ने किसान नेताओं की गिरफ्तारी तथा पुलिस दमन की निंदा करते हुए ऐलान किया है कि किसानों का यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक कि भूमि-अधिग्रहण रद्द नहीं हो जाता।

भूमि कब्ज़ाने अर्थात भूमि-अधिग्रहण के खिलाफ बढ़ते संघर्ष:
उ. प्र. सरकार को पीछे ढकेला किसानों ने

उत्तर प्रदेश में जहां पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसानों ने गंगा-एक्सप्रेस वे और पार्सल लैण्ड के नाम पर प्रस्तावित कृषि योग्य भूमि के अधिग्रहण के खिलाफ कमर कस रखी है तथा दमन-उत्पीड़न का सामना करते हुए संघर्षरत हैं वहीं राज्य के कई स्थानों पर भूमि-अधिग्रहण के मामले में सरकार को मुंह की खानी पड़ी है।

इस बीच यमुना एक्सप्रेस हाई-वे के लिए हाथरस, मथुरा, आगरा और अलीगढ़ जिलों के लगभग 900 गांवों की 9 लाख हेक्टेयर ज़मीन के अधिग्रहण को भी किसानों के भारी विरोध-प्रतिरोध के नाते रोकने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार तथा यमुना एक्सप्रेस हाई-वे अथारिटी को मजबूर होना पड़ा है।

चन्दौली जिले में रेलवे विभाग ने रेल कॉरीडोर बनाने का फैसला लिया था। इसके लिए धान का कटोराकहे जाने वाले इस क्षेत्र की उपजाऊ कृषि भूमि (लगभग दस हज़ार हेक्टेयर) का अधिग्रहण करने की योजना बनायी गयी थी। परंतु कृषि भूमि के प्रस्तावित अधिग्रहण का जबर्दस्त विरोध हुआ और अन्ततः राज्य सरकार, जिसने भूमि-अधिग्रहण करके रेलवे को देने का वादा किया था, को पीछे हटना पड़ा। अब रेलवे कॉरीडोर बनाने का फैसला रद्द कर दिया गया है। चन्दौली के किसानों ने रेल मंत्री ममता बनर्जी से जब यह पूछा कि वे नंदीग्राम और सिंगूर में तो किसानों की ज़मीन के अधिग्रहण का विरोध कर रही थीं तो वे यहां पर किसानों की जमीन का अधिग्रहण क्यों कर रही हैं? तब उन्हें बगलें झांकनी पड़ी थी और उनका दोहरा चरित्र उजागर हुआ था।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दादरी के किसानों के आंदोलन का यह परिणाम हुआ कि लाठी, डण्डे, लालच के बाद भी उ.प्र. सरकार उस पर लगाम न लगा सकी। हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक 2762 एकड़ ज़मीन का अधिग्रहण रद्द हो चुका है। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि अधिग्रहीत की गयी ज़मीन किसानों को वापस कर दी जाय। ज्ञातव्य है कि इस ज़मीन का अधिग्रहण, कब्ज़ा तथा मुआवज़े आदि का भुगतान भी हो चुका था। किसानों को मुआवजे की राशि वापस करने का निर्देश भी दिया गया है।

फलतः दादरी के पास स्थित सदरौना, मुजफ्फराबाद भरोसा तथा सरौसा गांवों की कृषि-भूमि के अधिग्रहण का प्रस्ताव भी रद्द कर दिया गया है।

इसी तरह बुन्देलखण्ड के ललितपुर जिले के दैलवारा गांव तथा इसके आस-पास के गांवों की ज़मीन को एक बिजलीघर बनाने हेतु लेने का प्रस्ताव था। परंतु किसानों के विरोध के नाते यहां पर भी भूमि-अधिग्रहण करने की प्रक्रिया रोक दी गयी है।

इलाहाबाद जिले की करछना तहसील के किसान सरकार तथा जे.पी. कंपनी के नापाक गठजोड़ से हड़पी गयी अपनी ज़मीन को छोड़ने को तैयार नहीं हैं और दमन-उत्पीड़न की परवाह किये बगैर सड़क पर उतरकर संघर्ष कर रहे हैं।


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