कांटी बांध: स्थानीय निवासियों, भू- स्वामियों को बताने तथा भूमि अधिग्रहण की सूचना देना भी जरूरी नहीं समझा सरकार ने

·         सर्वे करने गये लागों को खदेड़ा ग्रामीणों ने।
·         ठेकेदार की मशीनें की गयीं वापस।
·          जिला मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन।

एक आदिवासी की अगुवाई में चलने वाली झारखण्ड सरकार को एक ऐसे डैम के निर्माण को रोकने के लिए कहना पड़ा जिस डैम का निर्माण कार्य बिना किसी सूचना, भूमि की मापी, मुआवजे के दर के निर्धारण तथा मुआवजे के अग्रिम भुगतान के ही शुरू कर दिया गया था। लेकिन यह निर्णय भी सरकार तब कर पायी जब एक स्थानीय युवक का अपहरण तथा हत्या कर दी गयी और स्थानीय आदिवासियों ने जुझारू तौर पर धरना, प्रदर्शन किया तथा ठेकेदार कम्पनी के लोगों को कार्यस्थल से भगा दिया। इस बांध के द्वारा आदिवासियों की 365 हेक्टेयर जमीन छिन जायेगी। सरकारी दावा है कि इस 12 मीटर ऊंचे बांध के द्वारा 24 गांवों की 3062 हेक्टेयर खरीफ तथा 1924 हेक्टेयर रवी फसलों को सिंचाई की सुविधा मिल पायेगी।

इस बीच ग्राम वासियों ने राजस्व विभाग के कर्मचारियों को सर्वे करने से रोक दिया है, निर्माण कार्य का ठेका हासिल करने वाली त्रिवेणी इंजीकान्स प्रा.लि. के अमले को भगा दिया है और 25 फरवरी 2011 को कलक्टर के सामने प्रदर्शन करके अपने इरादों से अवगत करा दिया है।

खूंटी जिले के कर्रा प्रखंड के सुनगी पंचायत के जबड़ा और घोरपिंड़ा गांव के बीच बह रही छाता नदी में कांटी जलाशय के नाम पर डैम बनाया जा रहा है। डैम का काम जमीन का मापी किये बिना, किसानों की जमीन अधिग्रहण किये बिना, जमीन की मुआवजा की दर तय तथा भुगतान किये बिना, यहां तक कि जिन किसानों की जमीन जाएगी, उनकी पहचान किये बिना ही 10 दिसंबर 2010 को त्रिवेनी इंजीकान्स प्रा.लि. ने भूमि पूजन के साथ डैम का शिलान्यास किया। 11 दिसंबर से डैम बनाने के लिए गांव में मशीन लायी गयी। 12 दिसंबर से डैम बनना शुरू हो गया। ग्रामीणों द्वारा लगातार विरोध के बाद, इस योजना के संबंध में जानकारी देने के लिए 17 मार्च 11 को एस डी ओ, खूंटी, अपर    समाहर्ता खंूटी, विशेष भूअर्जन पदाधिकारी रांची, जलपथप्रमंडल धू्रवा रांची के एक्जक्युटिव इंजीनियर, अंचल अधिकारी तथा प्रखंड विकास पदाधिकारी, ने नव- निर्वाचित पंचायत समिति सदस्यों को प्रखंड के किसान भवन में बैठक के लिए बुलाया। उपस्थित ग्रामीणों ने ‘‘यहां किसी तरह का डैम बनाने नहीं देगें’’-कहते हुए बैठक का बहिष्कार किया। इसके बाद सभी अधिकारी बी डी ओ के चैम्बर में बैठे। वहां इन सभी अधिकारियों से इस संदर्भ में कई सवाल पूछे गये। विशेष भूअर्जन पदाधिकारी, अपर समाहर्त्ता, एस डी ओ, सभी अधिकारियों ने कहा-विशेष भूअर्जन विभाग द्वारा जमीन की मापी करने, जिनकी जमीन जाएगी-उन किसानों की सही पहचान करने, जमीन का 80 प्रतिशत मुआवजा भुगतान करने के बाद ही जमीन पर किसी तरह का काम शुरू किया जा सकता है। जमीन किसानों की है, उनकी सहमति के बिना जमीन अधिग्रहीत नहीं की जा सकती है। लेकिन यहां जमीन का मापी किये बिना, मुआवजा का भुगतान किये बिना, काम शुरू किया गया-यह गलत हुआ है। लेकिन जलपथ प्रमंडल के एक्जक्युटिव इंजीनियर नहीं मानते हैं कि गलती हुई है। वहां काम को देखने के लिए ठेकेदार के आदमी विंध्याचल गुप्ता के साथ गांव के एक युवक बिजय धान को मेंट के बतौर रखा गया था।

13 दिसंबर को शाम करीब साढ़े सात बजे विजय धान और विंध्याचल का अपहरण हुआ। विंधयाचल को थोड़ी देर बाद छोड़ दिया गया, जबकि बिजय धान लापता रहे। 16 दिसबंर को विजय की लाश घोरपेंडा के पास एक कुंये में मिली।  अधिकारियों के अनुसार डैम बनने की जानकारी उन्हें तब हुई, जब इन दोनों युवकों का अपहरण हुआ। जिला प्रशासन को इस योजना की जानकारी 18 दिसंबर के बाद 9 फरवरी 11, 4 मार्च11 को भी दी गयी, तब भी अधिकारियों ने बताया कि-आज तक भी इस योजना के संबंध में कोई जानकारी उन्हे नहीं मिली है।

दूसरी ओर डैम नहीं बनाने की मांग को लेकर ग्रामीण लगातार संघर्ष कर रहे हैं। ग्रामीणों ने लिखित मांगपत्र कर्रा प्रखंड विकास पदाधिकारी को 2 बार, उपायुक्त खूंटी को 2 बार, एसपी खूंटी को 1 बार, आयुक्त दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल रांची को 1 बार, गृह सचिव झारखंड सरकार को 1 बार दिया है। डैम के विरोध में ग्रामीणों ने 25 जनवरी 11 को प्रखंड मुख्यालय में रैली और आम सभा कर मांग पत्र अधिकारियों को सौंपा। 22 फरवरी 11 को ग्रामीणों ने डैम प्रभावित संघर्ष समिति के बैनर तलेे रांची में एक प्रेस वार्ता बुलायी। 25 फरवरी 11 को ग्रामीणों ने डैम के निर्माण को रोकने की मांग को लेकर खूंटी जिला मुख्यालय में रैली-सभा कर उपायुक्त को मांग पत्र दिये।

इतना होने के बाद 17 मार्च 2011 को सरकार की ओर से इस योजना के संबंध में ग्रामीणों को जानकारी देने तथा ग्रामीणों की राय जानने के लिए 25 मार्च 2011 को मेरले में ग्राम सभा की बैठक बुलाने का फैसला लिया गया। इसकी तैयारी के लिए सीओ द्वारा जिला परिषद सदस्य (उत्तरी/दक्षिणी) ग्राम पंचायत मुखिया, पंचायत सदस्य, महिला समिति-लरता, सुनगी, जुरदाग, ग्राम प्रधान/कोषाध्यक्ष जबड़ा को बुलाया गया था।
बैठक के उद्वेश्य पर जैसे ही सीओ ने बात करना शुरू किया वहां उपस्थित नवनिर्वाचित पंचायत सदस्यों ने जिला परिषद अध्यक्ष को नहीं बुलाया गया है यह कहकर तथा इस पर अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए बैठक का बहिष्कार कर किसान भवन से बाहर निकल गये।

मीटिंग हाल में जबड़ा, घोपिंड़ा, जोन्हे के ग्रामीण भी उपस्थित थे। इन्होंने एक स्वर में आवाज उठायी -‘‘यहां किसी तरह का डैम नहीं बनाने देगें। जान देगें-लेकिन जमीन नहीं देगें।’’ डैम नहीं बनाने देगें कहते हुए सभी के सभी हाल से बाहर निकल गये। पांच मिनट के भीतर हाल खाली हो गया।

फिर आयी 25 मार्च की तारीख। सरकार की तरफ से जन- सुनवाई का आयोजन। सरकारी अमला तथा कम्पनी के कारिंदे मौजूद रहे परंतु स्थानीय लोगों ने इस जन सुनवायी का बहिष्कार यह कहकर किया कि ‘‘यह जन सुनवायी एक नाटक है तथा डैम के निर्माण को हरी झण्डी दिखाने की सुनियोजित साजिश का हिस्सा है।  -दयामनि बारला, राँची से
Share on Google Plus

संघर्ष संवाद के बारे में

एक दूसरे के संघर्षों से सीखना और संवाद कायम करना आज के दौर में जनांदोलनों को एक सफल मुकाम तक पहुंचाने के लिए जरूरी है। आप अपने या अपने इलाके में चल रहे जनसंघर्षों की रिपोर्ट संघर्ष संवाद से sangharshsamvad@gmail.com पर साझा करें। के आंदोलन के बारे में जानकारियाँ मिलती रहें।